Fuel Price 26 June 2026: दिल्ली, नोएडा से मुंबई-लखनऊ तक बदला पेट्रोल-डीजल का भाव, देखें रेट लिस्ट

Petrol Diesel Price Today 26 June 2026: दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, मुंबई, कोलकाता सहित देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा भाव देखें।

Jun 26, 2026 - 12:41
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Fuel Price 26 June 2026: दिल्ली, नोएडा से मुंबई-लखनऊ तक बदला पेट्रोल-डीजल का भाव, देखें रेट लिस्ट
Petrol Diesel Price Today
  • Petrol Diesel Price Today: देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के आज के दाम जारी, जानिए नई दरें
  • पेट्रोल-डीजल की नई दरें जारी: दिल्ली, यूपी, मुंबई से लेकर मध्य प्रदेश और राजस्थान तक क्या हैं आज के भाव? तुरंत चेक करें लिस्ट
  • ईंधन की कीमतें अपडेट: देश भर के महानगरों और उत्तर प्रदेश के प्रमुख जिलों में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, कुछ जगहों पर मामूली बदलाव

भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने आज 26 जून 2026 को देश के विभिन्न राज्यों और प्रमुख शहरों के लिए पेट्रोल और डीजल के ताजा भाव जारी कर दिए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में कोई बड़ा फेरबदल देखने को नहीं मिला है, लेकिन स्थानीय स्तर पर लगने वाले वैट (VAT) और माल ढुलाई शुल्क (Freight Charges) के कारण अलग-अलग राज्यों और जिलों में तेल के दामों में मामूली अंतर बना हुआ है। दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, मुंबई, कोलकाता, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के लिए सुबह 6 बजे नई दरें अपडेट की गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय बाजार में आम जनता की जेब पर ईंधन के खर्च का क्या असर पड़ रहा है, इसकी पूरी जानकारी नीचे दी गई तालिका और विस्तृत रिपोर्ट में उपलब्ध है।

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में होने वाली दैनिक हलचल का सीधा असर भारत में ईंधन के खुदरा दामों पर पड़ता है। हालांकि, पिछले कुछ समय से घरेलू बाजार में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के आधार मूल्य में कोई बड़ा नीतिगत बदलाव नहीं किया है। देश के चारों प्रमुख महानगरों—दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई—में कीमतें अपने पुराने स्तर के आस-पास बनी हुई हैं। तेल कंपनियों द्वारा हर दिन सुबह छह बजे नई कीमतों की घोषणा की जाती है, जिसके बाद डीलर कमीशन और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले स्थानीय करों को जोड़कर अंतिम खुदरा मूल्य तय किया जाता है। यही कारण है कि एक ही राज्य के अलग-अलग जिलों में भी उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल के लिए भिन्न-भिन्न कीमतों का भुगतान करना पड़ता है।

शहर/राज्य पेट्रोल (₹/लीटर) डीजल (₹/लीटर)
दिल्ली 102.12 95.20
नोएडा 102.08 95.44
लखनऊ 101.86 95.36
कानपुर 101.59 95.06
बरेली 101.84 95.27
शाहजहांपुर 101.61 95.11
बाराबंकी 102.07 95.75
मुरादाबाद 102.56 95.99
आगरा 101.54 95.27
हरदोई 102.17 95.66
कोलकाता 113.47 99.82
पुणे 111.65 97.50 (लगभग)
मुंबई 111.21 97.83
असम 106.60 92.50 (लगभग)
चेन्नई 107.76 99.55
तमिलनाडु 109.10 99.65
मध्य प्रदेश 114.97 98.50 (लगभग)
राजस्थान 113.16 98.25

घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों के स्थिर रहने से परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को बड़ी राहत मिली है। माल ढुलाई से जुड़े संगठनों का मानना है कि यदि तेल की कीमतों में अचानक बड़ी बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा असर दैनिक उपयोग की वस्तुओं, सब्जियों और एफएमसीजी उत्पादों की कीमतों पर पड़ता है। खुदरा व्यापारियों के संघों के अनुसार, तेल के दाम स्थिर रहने से बाजार में महंगाई दर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। हालांकि, पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि विभिन्न राज्यों में वैट की दरों में भारी असमानता के कारण सीमावर्ती जिलों के पंप मालिकों को व्यापार में नुकसान उठाना पड़ता है, क्योंकि वाहन चालक कम टैक्स वाले पड़ोसी राज्य से तेल भरवाना अधिक पसंद करते हैं।

आम नौकरीपेशा और मध्यमवर्गीय परिवारों के मासिक बजट में ईंधन का खर्च एक बड़ा हिस्सा होता है। मुंबई और मध्य प्रदेश जैसे क्षेत्रों के वाहन मालिकों का कहना है कि देश में एक समान टैक्स व्यवस्था न होने के कारण उन्हें दिल्ली के मुकाबले प्रति लीटर काफी अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। दूसरी ओर, दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु और चेन्नई में भी कीमतें सौ रुपये प्रति लीटर के पार बनी हुई हैं, जिससे सार्वजनिक परिवहन और व्यक्तिगत वाहनों का खर्च बढ़ा हुआ है। असम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में भौगोलिक चुनौतियों और परिवहन व्यय के बावजूद दरें देश के अन्य बड़े राज्यों की तुलना में कुछ हद तक कम हैं, जिससे स्थानीय उपभोक्ताओं को राहत मिल रही है।

आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों और ओपेक (OPEC) देशों के तेल उत्पादन संबंधी निर्णयों पर निर्भर करेंगी। तेल बाजार के विश्लेषकों का अनुमान है कि जब तक वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 75 से 85 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी रहेंगी, तब तक भारतीय तेल कंपनियां घरेलू बाजार में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेंगी। हालांकि, भविष्य में यदि सरकारें वैट की समीक्षा करती हैं या ईंधन को वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे में लाने पर विचार करती हैं, तभी उपभोक्ताओं को कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। तब तक उपभोक्ताओं को दैनिक आधार पर जारी होने वाले इन भावों के अनुसार ही अपने खर्चों का प्रबंधन करना होगा।

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