Yemen Conflict: यमन में 24 घंटे में 54 हवाई हमलों का हूतियों ने किया दावा, सऊदी अरब के सैन्य अभियानों पर फिर गरमाया तनाव

यमन में हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 24 घंटे में 54 हवाई हमले किए हैं। इस दावे से संघर्ष विराम प्रयासों के बीच नया तनाव पैदा हो गया है।

Sep 15, 2026 - 14:29
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Yemen Conflict: यमन में 24 घंटे में 54 हवाई हमलों का हूतियों ने किया दावा, सऊदी अरब के सैन्य अभियानों पर फिर गरमाया तनाव
  • Yemen Conflict: यमन में 24 घंटे में 54 हवाई हमलों का हूतियों ने किया दावा, सऊदी अरब के सैन्य अभियानों पर फिर गरमाया तनाव
  • Yemen Crisis: हूती विद्रोहियों का आरोप- सऊदी नीत गठबंधन ने किए 54 एयरस्ट्राइक, पश्चिम एशिया में बढ़ा संघर्ष का खतरा
  • यमन में हवाई हमलों पर हूतियों का बड़ा दावा: 24 घंटे में दर्जनों ठिकानों पर बमबारी, शांति वार्ताओं के बीच बिगड़े हालात
  • Middle East Tension: यमन पर 24 घंटे में 54 हवाई हमलों का हूती दावा, सऊदी अरब के साथ सीमाई इलाकों में तनातनी तेज

पश्चिम एशिया में रणनीतिक रूप से संवेदनशील यमन के युद्धक्षेत्र से एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव के संकेत मिल रहे हैं। यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने बीते 24 घंटों के भीतर देश के विभिन्न इलाकों में 54 से अधिक हवाई हमले (एयरस्ट्राइक) किए हैं। हूती नियंत्रण वाले मीडिया चैनलों और उनके सैन्य प्रवक्ताओं की ओर से जारी बयानों में यह आरोप लगाया गया है कि ये हमले रणनीतिक सीमावर्ती प्रांतों और अंदरूनी ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए। हालांकि, सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन की ओर से इन दावों पर तत्काल कोई विस्तृत आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।

यमन में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध के बीच जब भी हवाई हमलों या सीमा पार गोलाबारी की घटनाएं सामने आती हैं, तो इससे क्षेत्रीय शांति प्रयासों को भारी झटका लगता है। हूतियों का कहना है कि हवाई हमलों की यह ताजा श्रृंखला ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों के बीच स्थायी संघर्ष विराम कायम करने की कोशिशों में जुटा हुआ है।

  • दावों का भौगोलिक दायरा और हूतियों का आरोप

हूती सूत्रों के अनुसार, जिन 54 हवाई हमलों का दावा किया गया है, उनका एक बड़ा हिस्सा उत्तरी यमन के सादा प्रांत, मारिब के बाहरी इलाकों, अल-जौफ और सऊदी अरब से सटी सीमावर्ती पट्टियों पर केंद्रित रहा। सादा प्रांत को हूती आंदोलन का ऐतिहासिक गढ़ माना जाता है, जबकि तेल और गैस से समृद्ध मारिब प्रांत पिछले कई वर्षों से दोनों पक्षों के बीच भीषण जमीनी जंग का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

हूती सैन्य नेतृत्व ने आरोप लगाया कि इन हवाई हमलों में सैन्य ठिकानों के साथ-साथ संचार तंत्र, लॉजिस्टिक्स आपूर्ति लाइनों और रिहायशी बस्तियों के निकटवर्ती क्षेत्रों को भी क्षति पहुंची है। हूतियों ने इसे अंतरराष्ट्रीय संघर्ष विराम समझौतों और युद्धक्षेत्र में बनी नाजुक सहमति का सीधा उल्लंघन करार दिया है। संगठन की ओर से चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा गया है कि यदि इस प्रकार के सैन्य अभियान जारी रहे, तो वे सऊदी अरब के सीमावर्ती सैन्य ठिकानों और रणनीतिक बुनियादी ढांचों के खिलाफ जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले करने के लिए बाध्य होंगे।

  • सऊदी गठबंधन का रणनीतिक परिप्रेक्ष्य

दूसरी तरफ, स्वतंत्र रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि हूतियों द्वारा किए जाने वाले दावों में अक्सर सैन्य हताहतों और हमलों की संख्या को अपने राजनीतिक विमर्श के अनुसार प्रस्तुत किया जाता है। सऊदी अरब और उसके सहयोगी गठबंधन का मुख्य उद्देश्य हूती विद्रोहियों द्वारा सीमा पार दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों, आत्मघाती ड्रोनों के लॉन्च पैड्स और हथियारों के भंडारण डिपो को निष्क्रिय करना रहा है।

सऊदी नीत गठबंधन अतीत में भी यह स्पष्ट करता रहा है कि उसके द्वारा किए जाने वाले हवाई अभियान केवल खुफिया सूचनाओं के आधार पर पहचाने गए वैध सैन्य ठिकानों पर ही केंद्रित होते हैं। सऊदी सीमा की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों—विशेषकर लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य—में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना गठबंधन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। जब भी हूती विद्रोही सीमाई चौकियों पर अपनी सैन्य उपस्थिति मजबूत करने या ड्रोन हमले की तैयारी करते हैं, तब गठबंधन द्वारा सामरिक हवाई कार्रवाई को अंजाम दिया जाता है।

  • शांति प्रक्रिया और बैकचैनल वार्ताओं पर असर

यमन संकट का यह नया मोड़ उस समय सामने आया है जब ओमान की मध्यस्थता में सऊदी अरब और हूतियों के प्रतिनिधियों के बीच गोपनीय और प्रत्यक्ष वार्ताओं के कई दौर चल रहे थे। इन वार्ताओं का मुख्य एजेंडा यमन के बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर लगे प्रतिबंधों में ढील देना, सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए तेल राजस्व साझा करने की व्यवस्था बनाना और दोनों देशों के बीच औपचारिक संघर्ष विराम की घोषणा करना था।

24 घंटे में 54 हवाई हमलों का यह सनसनीखेज दावा इस नाजुक राजनीतिक संवाद को पटरी से उतारने का जोखिम पैदा करता है। जानकारों का कहना है कि यदि हूती विद्रोही इन हमलों के जवाब में सऊदी अरब के औद्योगिक या ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाते हैं, तो तनाव एक बार फिर अनियंत्रित हो सकता है। इससे न केवल दोनों देशों के बीच महीनों से जमी शांति की नींव दरक जाएगी, बल्कि संपूर्ण खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा और जहाजों के परिवहन पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

संयुक्त राष्ट्र (UN) लगातार चेतावनी देता रहा है कि यमन वर्तमान में दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक से जूझ रहा है। एक दशक से अधिक समय से जारी गृहयुद्ध के कारण देश की बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं, जल आपूर्ति और शिक्षा ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है। लाखों लोग भोजन और बुनियादी दवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता पर निर्भर हैं।

हवाई हमलों और सैन्य टकराव में किसी भी प्रकार की तेजी का सीधा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है। यदि संघर्ष विराम के प्रयास विफल होते हैं और मारिब व अन्य प्रांतों में युद्ध दोबारा भीषण रूप लेता है, तो विस्थापितों की एक नई लहर पैदा हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत और अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दोनों पक्षों से संयम बरतने, सैन्य गतिविधियों को तत्काल रोकने और वार्ता की मेज पर लौटने की अपील कर रहे हैं ताकि इस मानवीय त्रासदी को और गहरा होने से रोका जा सके।

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