गल्फ में बढ़ते युद्ध जैसे हालात, हजारों भारतीयों की घर वापसी की जद्दोजहद, दुबई से लौटे यात्रियों ने सुनाई अनिश्चितता और अफवाहों की कहानी। 

गल्फ क्षेत्र में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़े संघर्ष ने पूरे मध्य पूर्व को हिलाकर रख दिया है, जिसके कारण हवाई क्षेत्रों में व्यापक

Mar 7, 2026 - 12:03
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गल्फ में बढ़ते युद्ध जैसे हालात, हजारों भारतीयों की घर वापसी की जद्दोजहद, दुबई से लौटे यात्रियों ने सुनाई अनिश्चितता और अफवाहों की कहानी। 
गल्फ में बढ़ते युद्ध जैसे हालात, हजारों भारतीयों की घर वापसी की जद्दोजहद, दुबई से लौटे यात्रियों ने सुनाई अनिश्चितता और अफवाहों की कहानी। 
  • स्पेशल फ्लाइट्स से लखनऊ पहुंचे लोग, राहत की सांस के साथ साझा किए अनुभव

गल्फ क्षेत्र में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़े संघर्ष ने पूरे मध्य पूर्व को हिलाकर रख दिया है, जिसके कारण हवाई क्षेत्रों में व्यापक प्रतिबंध लग गए और हजारों उड़ानें रद्द हो गईं। इस संकट की शुरुआत फरवरी के अंत में हुई, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर सैन्य हमले शुरू किए, जिसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए। परिणामस्वरूप, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत और बहरीन जैसे देशों के हवाई क्षेत्र बंद हो गए, जिससे लाखों यात्री फंस गए। भारत सरकार ने इस स्थिति पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए विशेष उड़ानें शुरू कीं, और अब तक हजारों भारतीय विभिन्न शहरों में पहुंच चुके हैं। लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर दुबई से बेंगलुरु होते हुए पहुंचे यात्रियों ने बताया कि वहां का माहौल इतना तनावपूर्ण था कि हर पल अनिश्चितता का डर सताता रहता था। फ्लाइट रद्द होने की खबरें लगातार फैल रही थीं, और अफवाहों ने स्थिति को और जटिल बना दिया। इस संघर्ष के कारण अब तक 1,221 भारतीय कैरियर्स की उड़ानें और 388 विदेशी कैरियर्स की सेवाएं रद्द हो चुकी हैं, जिससे यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। सरकार ने 24 घंटे यात्री सहायता केंद्र स्थापित किए हैं, ताकि फंसे हुए लोगों को सहायता मिल सके।

इस संकट ने विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात में रहने वाले भारतीय प्रवासियों को प्रभावित किया है, जहां करीब 12,000 भारतीयों ने दूतावासों से सहायता मांगी है। दुबई और अबू धाबी जैसे प्रमुख हबों में हवाई अड्डे बंद होने से यात्री कई दिनों तक फंसे रहे, और कुछ मामलों में उन्हें फुजैराह या रास अल खैमाह जैसे वैकल्पिक हवाई अड्डों से उड़ानें लेनी पड़ीं। भारतीय एयरलाइंस ने विशेष चार्टर उड़ानें संचालित कीं, जिनमें से कई मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु पहुंचीं। लखनऊ पहुंचे एक समूह ने बताया कि उन्होंने दुबई में मिसाइल अलर्ट सुने थे, और करीब 50 किलोमीटर दूर एक हमले की खबर से दहशत फैल गई थी। यात्रियों को होटलों में रुकना पड़ा, जहां लगातार अपडेट्स की कमी से चिंता बढ़ती गई। सरकार ने ओमान और अन्य सुरक्षित मार्गों के माध्यम से उड़ानें व्यवस्थित कीं, जैसे कि फुजैराह से मस्कट होते हुए भारत। इस प्रक्रिया में स्पाइसजेट ने 14 विशेष उड़ानें संचालित कीं, जबकि एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने दुबई, अबू धाबी, जेद्दा और मस्कट से अतिरिक्त सेवाएं शुरू कीं। इन उड़ानों से अब तक 1,100 से अधिक यात्री दिल्ली पहुंच चुके हैं, और आगे भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी।

विशेष उड़ानों की व्यवस्था

भारतीय सरकार ने फंसे हुए नागरिकों के लिए 58 उड़ानें संचालित करने की योजना बनाई है, जिसमें दुबई से लखनऊ, हैदराबाद और कोलकाता जैसे शहरों तक पहुंच शामिल है। ये उड़ानें वैकल्पिक मार्गों जैसे मस्कट और फुजैराह से होकर गुजरती हैं, ताकि हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों से बचा जा सके। यात्री बिना अतिरिक्त शुल्क के रीबुकिंग कर सकते हैं।

संघर्ष की शुरुआत से अब तक मध्य पूर्व के प्रमुख हवाई अड्डों जैसे दुबई इंटरनेशनल, हमाद इंटरनेशनल और जायद इंटरनेशनल में हजारों उड़ानें प्रभावित हुई हैं, और गुरुवार को अकेले 281 भारतीय उड़ानें रद्द हुईं। यात्रियों ने बताया कि दुबई में मिसाइल हमलों की चेतावनी से लोग घरों में दुबके रहे, और हवाई अड्डों पर भीड़ बढ़ गई। लखनऊ पहुंचे यात्रियों में से कई ने एक महीने पहले टिकट बुक किए थे, लेकिन संघर्ष के कारण उनकी योजनाएं बिगड़ गईं। वे बेंगलुरु होते हुए लखनऊ पहुंचे, जहां शाम करीब 5:50 बजे लैंडिंग हुई। इस दौरान, वे लगातार समाचारों पर नजर रखते रहे, और अफवाहों ने उनकी चिंता दोगुनी कर दी। कनाडा और फ्रांस जैसे देशों ने भी अपने नागरिकों के लिए चार्टर उड़ानें शुरू कीं, जबकि भारत ने दूतावासों के माध्यम से पंजीकरण प्रक्रिया तेज की। अब तक 19,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, और स्थिति सामान्य होने तक वैकल्पिक मार्गों पर निर्भरता बनी रहेगी।

फंसे हुए भारतीयों की कहानियां दिल दहलाने वाली हैं, जहां दुबई और दोहा में रहने वाले लोग मिसाइल हमलों के बीच फंस गए। एक यात्री ने बताया कि उन्होंने दुबई में ड्रोन हमले की खबर सुनी, जिससे हवाई अड्डे पर अफरा-तफरी मच गई। कई लोग कई दिनों तक हवाई अड्डों पर सोने को मजबूर हुए, और भोजन तथा पानी की कमी का सामना किया। भारत सरकार ने एमपी जैसे राज्यों से फंसे 100 से अधिक लोगों की सहायता की, और विशेष उड़ानों से उन्हें इंडोर और अन्य शहरों में पहुंचाया। लखनऊ पहुंचे समूह में जौनपुर के निवासी शामिल थे, जिन्होंने बताया कि वे एक महीने पहले दुबई गए थे, लेकिन संघर्ष ने उनकी वापसी को जोखिम भरा बना दिया। वे शुक्रवार को राहत महसूस कर घर लौटे। इस संकट ने वैश्विक उड्डयन को प्रभावित किया, जहां एतिहाद, एमिरेट्स और कतर एयरवेज जैसी कंपनियां आंशिक सेवाएं बहाल कर रही हैं। भारत में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु हवाई अड्डों पर 278 उड़ानें रद्द हुईं, और यात्री सहायता केंद्रों पर हजारों कॉल्स आ रही हैं। ईरान पर अमेरिका-इजराइल हमलों से गल्फ में ड्रोन और मिसाइल हमले बढ़े, जिससे दुबई जैसे शहरों में क्षति हुई। हवाई अड्डों पर यात्री फंस गए, और कतर ने फोन अलर्ट भेजे। भारत ने 10 मिलियन प्रवासियों की सुरक्षा पर चिंता जताई।

सरकार की तत्परता से अब स्थिति नियंत्रण में आ रही है, जहां इंडिगो ने जेद्दा से अहमदाबाद के लिए विशेष उड़ान संचालित की, और 200 से अधिक यात्री लौटे। दुबई से अमृतसर, गोवा और लखनऊ जैसी उड़ानें बहाल हो रही हैं, लेकिन पूर्ण सामान्यीकरण में समय लगेगा। यात्रियों ने बताया कि अनिश्चितता से ज्यादा अफवाहों ने उन्हें परेशान किया, जैसे कि निकटवर्ती क्षेत्रों में हमलों की खबरें। विदेश मंत्रालय ने संवाद और कूटनीति पर जोर दिया, ताकि संघर्ष जल्द समाप्त हो। अब तक चार विशेष उड़ानें दिल्ली पहुंच चुकी हैं, और आगे 48 उड़ानों प्रति घंटे की क्षमता वाले सुरक्षित गलियारे खोले गए हैं। इस प्रक्रिया से यात्रियों को मानसिक राहत मिली है, और परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई।  इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में रहने वाले 10 मिलियन भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं, जहां कुछ हताहत भी रिपोर्ट हुए। सरकार ने दूतावासों को 24/7 सक्रिय रखा है, और पंजीकरण के माध्यम से सहायता प्रदान की जा रही है। लखनऊ पहुंचे यात्रियों ने बताया कि वे तनावपूर्ण दिनों के बाद घर लौटकर सुकून महसूस कर रहे हैं। संघर्ष के विस्तार से जॉर्डन और अन्य देश भी प्रभावित हुए, जहां भारतीय छात्र और पर्यटक फंस गए। वैकल्पिक मार्गों जैसे इस्तांबुल और कराची से उड़ानें उपलब्ध कराई गईं। कुल मिलाकर, यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था और यात्रा को प्रभावित कर रहा है, लेकिन भारत की सक्रियता से हजारों लोग सुरक्षित लौट रहे हैं।

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