NEET पेपर लीक मामला: CJP ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग की, केंद्र सरकार की ओर से आज जवाब आने की उम्मीद

नीट पेपर लीक विवाद में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर छात्र संगठन सीजेपी अड़ गया है। आज केंद्र सरकार इस मुद्दे पर जवाब दे सकती है।

Jul 25, 2026 - 13:52
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NEET पेपर लीक मामला: CJP ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग की, केंद्र सरकार की ओर से आज जवाब आने की उम्मीद
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, जंतर मंतर छात्र प्रदर्शन
  • शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP, आज सरकार दे सकती है जंतर-मंतर आंदोलन पर बड़ा जवाब
  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े छात्र! जंतर-मंतर पर तनाव के बीच आज सरकार देगी बड़ा जवाब
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा CJP, छात्र प्रदर्शन पर आज सरकार दे सकती है बड़ा आधिकारिक बयान

नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में फैली कथित धांधली को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग पर पूरी तरह अड़ गए हैं। जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजामों और तनावपूर्ण माहौल के बीच आज केंद्र सरकार की ओर से इस मामले पर आधिकारिक जवाब दिए जाने की संभावना है। छात्र नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन खत्म नहीं होगा। पूरी दिल्ली और देश के युवाओं की निगाहें आज सरकार के रुख पर टिकी हैं।

देशभर के लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े नीट पेपर लीक मामले ने अब गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया है। जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों के गठबंधन और CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की नैतिक जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के तहत हुई व्यापक अनियमितताओं के लिए मंत्रालय का नेतृत्व सीधे तौर पर जिम्मेदार है। सरकार द्वारा सोनम वांगचुक के अनशन समाप्ति के दौरान दिए गए आश्वासनों और कड़े कानून के प्रस्तावों के बावजूद, आंदोलित छात्र केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की शर्त पर डटे हुए हैं। इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए आज केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर बड़ा फैसला या आधिकारिक वक्तव्य सामने आ सकता है।

नीट परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद से ही धांधली के आरोपों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन जंतर-मंतर पर लगातार उग्र और व्यापक होता गया। शुरुआती दौर में जांच समितियों के गठन और प्रशासनिक फेरबदल के आश्वासन मिलने के बाद भी छात्रों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। हाल ही में जंतर-मंतर पर पुलिस के साथ हुई झड़पों और FRS तकनीक द्वारा असामाजिक तत्वों की पहचान के खुलासों के बीच सीजेपी ने अपने रुख को और सख्त कर लिया। छात्र प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि सरकार मुख्य मुद्दे यानी जवाबदेही से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। गुरुवार और शुक्रवार को लगातार हुई कई उच्चस्तरीय दौर की बैठकों के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जंतर-मंतर पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और आज सरकार द्वारा आधिकारिक प्रेस वार्ता या बयान के माध्यम से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की उम्मीद है।

इस पूरे घटनाक्रम पर छात्र संगठनों और सरकार दोनों ही ओर से बयानबाजी तीखी हो गई है। सीजेपी के प्रमुख छात्र नेताओं का कहना है कि लाखों छात्रों का विश्वास टूट चुका है और जब तक शीर्ष स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल नहीं होता, तब तक परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कायम नहीं हो सकता। उन्होंने साफ किया कि केवल लिखित आश्वासन काफी नहीं हैं, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ही आंदोलन खत्म करने का एकमात्र रास्ता है। वहीं दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं और प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सरकार परीक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार लागू कर रही है और सख्त कानून बनाकर दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया जारी है। सरकार का तर्क है कि इस संवेदनशील मोड़ पर राजनीतिक कारणों से इस्तीफे की मांग करना परीक्षा व्यवस्था के पुनर्निर्माण में बाधा डाल सकता है।

जंतर-मंतर पर उपजे इस तीखे गतिरोध का असर सीधे तौर पर देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक मशीनरी पर पड़ रहा है। लगातार जारी विरोध प्रदर्शन के कारण केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव अत्यधिक बढ़ गया है। यदि आज सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कोई सहमति नहीं बनती है, तो यह आंदोलन देश के अन्य राज्यों और विश्वविद्यालय परिसरों तक फैल सकता है। इसके अलावा, संसद के आगामी सत्र में भी इस मुद्दे पर भारी हंगामा होने के आसार हैं, जिससे बजटीय और विधायी कामकाज प्रभावित हो सकता है। प्रशासनिक दृष्टि से, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के पुनर्गठन और नई परीक्षा तिथियों के निर्धारण में भी इस अनिश्चितता के कारण देरी हो रही है, जिससे आगामी सत्र के परीक्षार्थी असमंजस की स्थिति में हैं।

आज का दिन इस पूरे आंदोलन के भविष्य का फैसला कर सकता है। केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले संभावित जवाब और प्रस्ताव पर सीजेपी और सहयोगी छात्र संगठनों की कार्यकारिणी की बैठक होगी। यदि सरकार शिक्षा मंत्री के संबंध में कोई ठोस कदम उठाती है या उच्चस्तरीय जांच आयोग की समयबद्ध रिपोर्ट का कोई नया रोडमैप पेश करती है, तो जंतर-मंतर पर जारी गतिरोध समाप्त हो सकता है। इसके विपरीत, यदि छात्र संगठन सरकार के जवाब से असंतुष्ट रहते हैं, तो उन्होंने देशभर में शांतिपूर्ण चक्का जाम और राष्ट्रव्यापी छात्र हड़ताल की चेतावनी दी है। दिल्ली पुलिस ने भी किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए जंतर-मंतर के आसपास के इलाकों में सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया है।

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