JNU में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: कुलगुरु प्रो. शांतिश्री डी. पंडित ने रेक्टर-1 और रेक्टर-2 को पद से हटाया
JNU में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। कुलगुरु प्रो. शांतिश्री डी. पंडित ने रेक्टर-1 प्रो. बृजेश पांडेय और रेक्टर-2 प्रो. दीपेंद्र नाथ दास को पद से हटा दिया।

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- जेएनयू में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कुलगुरु ने दोनों रेक्टरों को पद से कार्यमुक्त किया
देश के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में शुक्रवार को एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। जेएनयू की कुलगुरु प्रो. शांतिश्री डी. पंडित ने विश्वविद्यालय के दोनों शीर्ष अधिकारियों रेक्टर-1 प्रो. बृजेश पांडेय और रेक्टर-2 प्रो. दीपेंद्र नाथ दास को उनके पदों से कार्यमुक्त कर दिया है। यह महत्वपूर्ण निर्णय विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (Executive Council) की बैठक के दौरान लिया गया। दोनों अधिकारी पिछले दो वर्षों से अधिक समय से इन महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस अचानक की गई कार्रवाई को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन कैंपस के गलियारों में इसे हालिया प्रशासनिक असहमतियों और छात्र प्रदर्शनों से जुड़े घटनाक्रमों से जोड़कर देखा जा रहा है।
देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में शुमार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शुक्रवार को प्रशासनिक स्तर पर बड़ा घटनाक्रम सामने आया। विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. शांतिश्री डी. पंडित ने एक कड़ा फैसला लेते हुए दोनों रेक्टरों को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया। हटाए गए अधिकारियों में रेक्टर-एक प्रो. बृजेश पांडेय और रेक्टर-दो प्रो. दीपेंद्र नाथ दास शामिल हैं। कार्यकारी परिषद की आधिकारिक बैठक में यह निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई विस्तृत या लिखित कारण स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक दोनों अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है कि प्रशासन में अब उनकी सेवाओं की आवश्यकता नहीं है।
जेएनयू परिसर में पिछले कुछ समय से प्रशासनिक व्यवस्था और नीतिगत निर्णयों को लेकर आंतरिक खींचतान की खबरें सामने आ रही थीं। विश्वविद्यालय के सूत्रों के अनुसार, कुलगुरु और रेक्टरों के बीच कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक मुद्दों पर एक राय नहीं बन पा रही थी। लगभग एक माह पहले भी एक रेक्टर और कुलगुरु के बीच किसी विषय पर गंभीर असहमति की चर्चाएं कैंपस में गर्म थीं। इसके अलावा, हाल के दिनों में नीट पेपर लीक विवाद और अन्य मांगों को लेकर छात्रों के आंदोलनों से उत्पन्न परिस्थितियों को संभालने के तौर-तरीकों पर भी प्रशासनिक स्तर पर मतभेद बताए जा रहे हैं। इन्हीं असहमतियों के बीच शुक्रवार को बुलाई गई कार्यकारी परिषद की बैठक में कुलगुरु ने दोनों रेक्टरों को कार्यमुक्त करने का प्रस्ताव रखा, जिसके बाद यह बड़ा फैसला अमल में लाया गया।
अचानक हुए इस प्रशासनिक फेरबदल पर जेएनयू शिक्षक संघ (JNUTA) और छात्र संगठनों में विभिन्न तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, अभी तक पदमुक्त किए गए दोनों प्रोफेसरों या विश्वविद्यालय के जनसंपर्क विभाग की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत प्रेस बयान जारी नहीं किया गया है। विश्वविद्यालय परिसर में कुछ अध्यापकों का मानना है कि कुलगुरु के कार्यकाल में रेक्टर स्तर पर इस प्रकार के बदलाव पहले भी देखे गए हैं, इसलिए इसे प्रशासनिक पुनर्गठन के रूप में भी देखा जा सकता है। वहीं, छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रशासन के भीतर जारी इस खींचतान का असर विश्वविद्यालय के सामान्य कामकाज और छात्र-हितों से जुड़ी फाइलों के निस्तारण पर नहीं पड़ना चाहिए।
जेएनयू के दोनों प्रमुख रेक्टरों को एक साथ हटाए जाने का सीधा असर विश्वविद्यालय के दैनिक प्रशासनिक और अकादमिक संचालन पर पड़ना तय माना जा रहा है। रेक्टर-1 और रेक्टर-2 के पास प्रवेश प्रक्रिया, संकाय नियुक्तियों, छात्र कल्याण, छात्रावास प्रबंधन और अकादमिक समन्वय से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होती हैं। अचानक दोनों पदों के खाली होने से कई प्रशासनिक फाइलों की मंजूरी अटक सकती है। इसके अलावा, इस फैसले से विश्वविद्यालय प्रशासन और संकाय सदस्यों के बीच आंतरिक अविश्वास या अनिश्चितता का माहौल बनने की आशंका जताई जा रही है। नए अधिकारियों की नियुक्ति होने तक प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना कुलगुरु के लिए एक प्रमुख चुनौती होगा।
दोनों रेक्टरों को हटाए जाने के बाद अब जेएनयू कुलगुरु प्रो. शांतिश्री डी. पंडित द्वारा नए रेक्टर-1 और रेक्टर-2 की नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द पूरी की जा सकती है। इसके लिए विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसरों में से नए चेहरों का चयन किया जाएगा। कार्यकारी परिषद की अगली बैठकों में इन नई नियुक्तियों पर मुहर लग सकती है। दूसरी तरफ, कैंपस के शिक्षक और छात्र संगठन इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि प्रशासन द्वारा इस फेरबदल को लेकर क्या कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाता है या नहीं।
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