देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बने जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि, सेनाओं में बढ़ेगा संयुक्तता और आधुनिकीकरण का नया दौर।
भारतीय सैन्य बलों में शीर्ष नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही देश की सुरक्षा रणनीति को एक नया आयाम मिला है। भारत सरकार ने
- जनरल अनिल चौहान के सेवानिवृत्त होने के बाद जनरल सुब्रमणि ने संभाली कमान, थिएटर कमान और रक्षा सुधारों को मिलेगी नई गति
- थिएटर कमान और स्वदेशीकरण को गति देने की बड़ी जिम्मेदारी के साथ नए सीडीएस ने संभाला पदभार, सुरक्षा तंत्र होगा और मजबूत
भारतीय सैन्य बलों में शीर्ष नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही देश की सुरक्षा रणनीति को एक नया आयाम मिला है। भारत सरकार ने सैन्य सुधारों की दिशा में तेजी लाते हुए एक बेहद अनुभवी और रणनीतिक मामलों के गहरे जानकार को देश के सबसे बड़े सैन्य पद की जिम्मेदारी सौंपी है।
मई 2026 के अंतिम दिन, जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने आधिकारिक तौर पर भारत के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया। साउथ ब्लॉक के लॉन में आयोजित एक भव्य त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर (Tri-Service Guard of Honour) के साथ सैन्य परंपराओं के अनुसार कमांड का यह हस्तांतरण हुआ। जनरल सुब्रमणि ने जनरल अनिल चौहान का स्थान लिया है, जिनका कार्यकाल मई के आखिर में समाप्त हुआ। यह नियुक्ति ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर हुई है जब भारतीय सेनाएं अपने इतिहास के सबसे बड़े संगठनात्मक पुनर्गठन और आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही हैं, जहां तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना और थिएटर कमान की स्थापना करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
इस सर्वोच्च जिम्मेदारी को संभालने से पहले जनरल सुब्रमणि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) में सैन्य सलाहकार के रूप में देश की रणनीतिक योजनाओं में अहम भूमिका निभा रहे थे। वह जुलाई 2025 में थल सेना के उप-प्रमुख (Vice Chief of the Army Staff) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, जिसके बाद उनकी गहरी रणनीतिक समझ को देखते हुए उन्हें सुरक्षा मामलों के मुख्य ढांचे से जोड़ा गया। अब सीडीएस के रूप में उनके कंधों पर न केवल सैन्य मामलों के विभाग (DMA) के सचिव की जिम्मेदारी होगी, बल्कि वह रक्षा मंत्री के स्थायी सैन्य सलाहकार और चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के स्थायी अध्यक्ष के रूप में भी कार्य करेंगे। उनका यह नया सफर देश की तीनों सेनाओं की ताकत को एकजुट करने और भविष्य की युद्ध प्रणालियों के लिए रक्षा तंत्र को तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
कमांड संभालने के तुरंत बाद, नए सीडीएस ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण को लेकर अपनी स्पष्ट प्राथमिकताओं को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सशस्त्र बलों के भीतर संयुक्तता, तालमेल और एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए संगठनात्मक सुधारों को गति दी जाएगी। प्रधानमंत्री के 'जय' (JAI - Jointness, Atmanirbharta, and Innovation) यानी संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार के दृष्टिकोण को पूरी तरह से लागू करने की प्रतिबद्धता जताई गई। देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के संकल्प को दोहराते हुए यह भी स्पष्ट किया गया कि रक्षा तैयारियों में स्वदेशी हथियारों और प्रौद्योगिकियों के विकास तथा उनके त्वरित समावेशन पर विशेष जोर रहेगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा का एक बेहद मजबूत और केंद्रीय स्तंभ है। जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि को चीन और पाकिस्तान की सीमाओं से जुड़े सैन्य ऑपरेशन्स का व्यापक अनुभव है, जो उत्तरी और पश्चिमी मोर्चे पर भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने में गेम-चेंजर साबित होगा।
सैन्य आधुनिकीकरण के इस सफर में नई सोच और नवाचार के महत्व को बेहद आवश्यक माना गया है। नए नेतृत्व के अनुसार, केवल पारंपरिक तरीकों से भविष्य की चुनौतियों का सामना नहीं किया सकता, इसलिए विचारों और कार्यों में नए प्रयोगों को बढ़ावा दिया जाएगा। इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए सैन्य बलों, घरेलू रक्षा उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों, स्टार्टअप्स और अनुसंधान से जुड़े पूरे इकोसिस्टम के बीच साझेदारी को पहले से कहीं अधिक मजबूत किया जाएगा। इस तरह के व्यापक सहयोग से देश के भीतर ही आधुनिक तकनीकों का विकास हो सकेगा, जिससे न केवल रक्षा बजट का प्रभावी उपयोग होगा बल्कि विदेशी निर्भरता को भी न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकेगा।
जनरल सुब्रमणि का चार दशकों से अधिक का शानदार सैन्य करियर कई चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण कमान नियुक्तियों से भरा रहा है। दिसंबर 1985 में गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन प्राप्त करने वाले इस अधिकारी ने देश के विभिन्न भौगोलिक और अशांत क्षेत्रों में अपनी कमान का लोहा मनवाया है। उन्होंने असम में उग्रवाद विरोधी अभियानों के दौरान 'ऑपरेशन राइनो' के तहत 16 गढ़वाल राइफल्स का नेतृत्व किया, जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली और मध्य क्षेत्र में 17 माउंटेन डिविजन का मार्गदर्शन किया। इसके अतिरिक्त, उन्हें पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना की अग्रणी स्ट्राइक कमान, '2 कोर' (Kharga Corps) का नेतृत्व करने का भी गौरव प्राप्त है, जो उनकी युद्धक क्षमताओं को दर्शाता है।
रणनीतिक कौशल के साथ-साथ उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बेहद समृद्ध है, जिसने उनकी सैन्य सूझबूझ को और अधिक निखारा है। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के पूर्व छात्र रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने संयुक्त सेवा कमान स्टाफ कॉलेज, ब्रिटेन और नेशनल डिफेंस कॉलेज, नई दिल्ली से उच्च सैन्य शिक्षा प्राप्त की है। उनके पास किंग्स कॉलेज लंदन से मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री और मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एम.फिल की उपाधि भी है। कजाकिस्तान में भारत के रक्षा अताशे (Defence Attache) के रूप में कार्य करने का उनका अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को समझने में मददगार साबित होगा।
Also Read- यूरोप में फिर मची दहशत: स्विट्जरलैंड में सिरफिरे शख्स ने चाकू से हमला कर तीन लोगों को किया लहूलुहान।
What's Your Reaction?







