संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इजरायली बलों पर संगीन आरोप, कैदियों के साथ बर्बरता और यौन उत्पीड़न का दावा।

संयुक्त राष्ट्र और इजरायल के बीच चल रहा कूटनीतिक तनाव अब अपने सबसे निचले और गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। संयुक्त राष्ट्र

May 30, 2026 - 11:48
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संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इजरायली बलों पर संगीन आरोप, कैदियों के साथ बर्बरता और यौन उत्पीड़न का दावा।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इजरायली बलों पर संगीन आरोप, कैदियों के साथ बर्बरता और यौन उत्पीड़न का दावा।
  • वैश्विक मंच पर इजरायल ने यूएन महासचिव के खिलाफ खोला मोर्चा, एंटोनियो गुटेरेस के कार्यालय से तोड़े सभी राजनयिक संबंध
  • ब्लैकलिस्ट में नाम शामिल होने पर भड़का तेल अवीव, वैश्विक संस्था पर लगाया पक्षपात और झूठे दावों को बढ़ावा देने का आरोप

संयुक्त राष्ट्र और इजरायल के बीच चल रहा कूटनीतिक तनाव अब अपने सबसे निचले और गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पेश की गई एक नई वार्षिक रिपोर्ट के बाद दोनों पक्षों के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है। इस विस्तृत रिपोर्ट में इजरायली सुरक्षा बलों, सैन्य शिविरों और जेल प्रशासन पर फिलिस्तीनी कैदियों के साथ बेहद अमानवीय व्यवहार करने के सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हिरासत में लिए गए फिलिस्तीनी नागरिकों के साथ बलात्कार, यौन उत्पीड़न, जबरन कपड़े उतरवाने और गंभीर शारीरिक प्रताड़ना जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया है। इन आरोपों के आधार पर संयुक्त राष्ट्र ने इजरायली सुरक्षा बलों को संघर्ष के दौरान यौन हिंसा में संलिप्त रहने वाले देशों और संगठनों की वैश्विक ब्लैकलिस्ट में शामिल कर लिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है।

इस वैश्विक रिपोर्ट के सार्वजनिक होने और खुद को प्रतिबंधित सूची में शामिल किए जाने के बाद इजरायल सरकार ने इस पर अत्यंत आक्रामक और तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए उनके कार्यालय के साथ सभी प्रकार के राजनयिक संबंध और संपर्क तत्काल प्रभाव से तोड़ने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के स्थायी प्रतिनिधि ने एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर इस निर्णय की पुष्टि की और महासचिव को सीधे फोन करके अपने देश के कड़े रुख से अवगत कराया। इजरायली राजनयिकों का साफ कहना है कि जब तक मौजूदा महासचिव अपने पद पर बने हुए हैं, तब तक उनका देश इस कार्यालय के साथ किसी भी प्रकार का संवाद या सहयोग नहीं रखेगा।

संयुक्त राष्ट्र की इस 35 पन्नों की वार्षिक रिपोर्ट में उन मामलों का ब्योरा दिया गया है जिनका विभिन्न वैश्विक एजेंसियों द्वारा सत्यापन करने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक से हिरासत में लिए गए पुरुषों, महिलाओं और यहां तक कि नाबालिग लड़कों और लड़कियों को विभिन्न सैन्य शिविरों और जेलों में गंभीर यातनाएं दी गईं। इस जांच रिपोर्ट में कुख्यात 'सदे तेइमान' सैन्य शिविर और कई अन्य प्रमुख जेलों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जहां पूछताछ के दौरान कैदियों को निर्वस्त्र करने, उनके गुप्तांगों पर चोट पहुंचाने और सामूहिक उत्पीड़न जैसी हिंसक घटनाओं को अंजाम देने की बात कही गई है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इन कृत्यों में इजरायली सेना, जेल सेवा और विशेष आतंकवाद विरोधी पुलिस इकाइयां सीधे तौर पर शामिल रही हैं।

राजनयिक गतिरोध के मुख्य बिंदु

संयुक्त राष्ट्र ने इजरायली बलों को संघर्ष कालीन यौन हिंसा की ब्लैकलिस्ट में डाला।

जवाब में इजरायल ने यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के कार्यालय से संबंध तोड़े।

महासचिव का कार्यकाल समाप्त होने तक इजरायल ने संवाद बंद रखने का फैसला किया।

इजरायल के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र के इन सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार, शर्मनाक और मनगढ़ंत बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। इजरायली प्रशासन का तर्क है कि उनके देश ने संयुक्त राष्ट्र को हर एक दावे के संदर्भ में व्यापक, विस्तृत और तथ्यात्मक जवाब सौंपे थे, लेकिन वैश्विक संस्था ने उन सभी साक्ष्यों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। इजरायल का आरोप है कि संयुक्त राष्ट्र लंबे समय से उसके खिलाफ एक संस्थागत और राजनीतिक अभियान चला रहा है। इस कार्रवाई का एकमात्र उद्देश्य इजरायल की लोकतांत्रिक छवि को नुकसान पहुंचाना और उसकी सेना को उन आतंकवादी संगठनों के समकक्ष खड़ा करना है जो वास्तविक रूप से बर्बरता में शामिल रहे हैं।

इस कूटनीतिक तनातनी के बीच संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की ओर से भी आधिकारिक बयान सामने आया है, जिसमें गतिरोध को कम करने का प्रयास किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के मुख्य प्रवक्ता ने कहा है कि इजरायल द्वारा संबंधों को तोड़ने की घोषणा के बावजूद महासचिव के कार्यालय के दरवाजे इजरायली प्रतिनिधियों के लिए हमेशा की तरह खुले रहेंगे। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सभी 193 सदस्य देशों के साथ संवाद बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है। हालांकि, रिपोर्ट में यह चिंता भी व्यक्त की गई है कि इजरायल लगातार संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं को जमीनी स्तर पर जांच करने और जेलों का दौरा करने की अनुमति देने से इनकार करता रहा है, जिससे मामलों की स्वतंत्र जांच प्रभावित हो रही है।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक पर्यवेक्षकों की नजरें भी इस बड़े राजनयिक विवाद पर टिकी हुई हैं। कई वैश्विक संस्थाओं ने पूर्व में भी इजरायली हिरासत केंद्रों में कैदियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को लेकर चिंताएं जताई थीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इजरायल के भीतर ऐसी घटनाओं में शामिल सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने और उनकी जवाबदेही तय करने की प्रणाली में भारी कमी देखी गई है, जिससे एक तरह की जवाबदेही से मुक्ति का माहौल बनता है। इसके विपरीत, इजरायल का कहना है कि उसकी अपनी एक मजबूत और स्वतंत्र न्यायपालिका प्रणाली है जो किसी भी सैन्य या प्रशासनिक कदाचार की जांच करने में पूरी तरह सक्षम है और इसमें किसी बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

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