बिहार में पुलिस की साख पर बट्टा: नशे में धुत दारोगा को ग्रामीणों ने बनाया बंधक, हाई वोल्टेज ड्रामे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

क्षेत्र में फैले तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से जनता के बीच पुलिस की छवि धूमिल होती है और विश्वास का संकट पैदा होता है। विभाग अब इस

Mar 24, 2026 - 12:10
Mar 24, 2026 - 12:13
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बिहार में पुलिस की साख पर बट्टा: नशे में धुत दारोगा को ग्रामीणों ने बनाया बंधक, हाई वोल्टेज ड्रामे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
बिहार में पुलिस की साख पर बट्टा: नशे में धुत दारोगा को ग्रामीणों ने बनाया बंधक, हाई वोल्टेज ड्रामे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

  • शराबबंदी वाले राज्य में खाकी हुई शर्मसार: भीड़ के हत्थे चढ़े नशेड़ी दारोगा, ग्रामीणों ने खंभे से बांधकर किया घंटों प्रदर्शन
  • कानून के रखवाले ने ही तोड़ा कानून: बिहार के बेगूसराय में शराब के नशे में टल्ली मिले सब-इंस्पेक्टर, जांच के घेरे में विभागीय लापरवाही

बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद पुलिस विभाग के भीतर से ही नियमों के उल्लंघन की एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। राज्य के बेगूसराय जिले में स्थानीय ग्रामीणों ने एक सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) को कथित तौर पर नशे की हालत में पकड़कर बंधक बना लिया। यह घटना उस समय हुई जब उक्त पुलिस अधिकारी ड्यूटी पर तैनात थे और उनका व्यवहार सामान्य नहीं लग रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि दारोगा जी इतने अधिक नशे में थे कि वे ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे और आम जनता के साथ बदसलूकी कर रहे थे। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और बिहार पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जैसे ही यह खबर फैली, मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और लोगों ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

घटना के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा प्रकरण एक वायरल वीडियो के माध्यम से चर्चा में आया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वर्दी पहने हुए दारोगा को भीड़ ने चारों तरफ से घेर रखा है और उन्हें एक स्थान पर बैठने के लिए मजबूर किया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि दारोगा की गाड़ी से शराब की गंध आ रही थी और उनके बोलने के लहजे से यह स्पष्ट था कि वे नशे में हैं। ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा कि जहां एक तरफ आम जनता को शराब के छोटे से पाउच के लिए जेल भेज दिया जाता है, वहीं कानून के रखवाले खुद सरेआम शराब पीकर घूम रहे हैं। इस भेदभावपूर्ण रवैये से नाराज होकर लोगों ने दारोगा को तब तक मुक्त नहीं किया जब तक कि वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंच गए।

बेगूसराय पुलिस मुख्यालय ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए तुरंत जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। शुरुआती कार्रवाई के तहत आरोपी दारोगा को हिरासत में लेकर उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया है। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि विभागीय जांच की रिपोर्ट आने के बाद सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। बिहार में शराबबंदी को सफल बनाने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से पुलिस के कंधों पर है, ऐसे में एक पुलिस अधिकारी का ही नशे में पाया जाना विभाग के लिए बड़ी फजीहत का सबब बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दृश्यों में ग्रामीण दारोगा से यह पूछते नजर आ रहे हैं कि उन्हें शराब कहां से मिली, जिस पर अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे थे। बिहार में अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है। सरकार का दावा है कि इससे अपराध में कमी आई है और परिवारों की स्थिति सुधरी है। हालांकि, समय-समय पर पुलिस कर्मियों के ही इस कानून को तोड़ने की खबरें आती रहती हैं। इस ताजा घटना ने विपक्षी दलों को भी सरकार पर हमला करने का एक नया हथियार दे दिया है।

इस घटना के दौरान मौके पर मौजूद भीड़ का गुस्सा सातवें आसमान पर था। लोगों का कहना था कि पुलिस वाले अक्सर चेकिंग के नाम पर आम लोगों को परेशान करते हैं, लेकिन जब वे खुद गलती करते हैं तो विभाग उन्हें बचाने की कोशिश करता है। बंधक बनाए गए दारोगा को छुड़ाने के लिए जब स्थानीय थाने की दूसरी टीम पहुंची, तो उन्हें भी ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों की मांग थी कि दारोगा पर भी वही कानूनी धाराएं लगाई जाएं जो एक सामान्य नागरिक पर शराब पीने के जुर्म में लगाई जाती हैं। काफी मान-मनौव्वल और निष्पक्ष जांच के ठोस आश्वासन के बाद ही भीड़ ने रास्ता साफ किया और पुलिस अधिकारी को ले जाने दिया।

क्षेत्र में फैले तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से जनता के बीच पुलिस की छवि धूमिल होती है और विश्वास का संकट पैदा होता है। विभाग अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या दारोगा के साथ कोई और भी इस गैरकानूनी गतिविधि में शामिल था। जांच टीम उन सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो को भी साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल कर रही है जिनमें दारोगा की हालत स्पष्ट रूप से संदिग्ध दिखाई दे रही है। यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं रह गया है, बल्कि यह शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन की खामियों को भी दर्शाता है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मेडिकल रिपोर्ट में शराब के सेवन की पुष्टि हो जाती है, तो संबंधित दारोगा की सेवा समाप्त की जा सकती है। बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम के तहत सरकारी सेवकों के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। इस घटना के बाद बेगूसराय के अन्य थानों में भी हड़कंप मचा हुआ है और पुलिस कर्मियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपनी ड्यूटी के दौरान मर्यादा बनाए रखें। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से कार्रवाई की जाए ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए। आम जनता अब इस मामले में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट और की गई सजा का इंतजार कर रही है।

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