दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट: नये सीसीटीवी वीडियो से खुलासा, धमाके से घंटों पहले उमर उन नबी तुर्कमान गेट मस्जिद में जाता दिखा, साजिश की आखिरी कड़ी बनी।
दिल्ली के रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार विस्फोट की जांच में नया मोड़ आ गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक महत्वपूर्ण सीसीटीवी वीडियो बरामद
दिल्ली के रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार विस्फोट की जांच में नया मोड़ आ गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक महत्वपूर्ण सीसीटीवी वीडियो बरामद किया है, जिसमें मुख्य आरोपी डॉक्टर उमर उन नबी को तुर्कमान गेट के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद में जाते हुए दिखाया गया है। यह वीडियो धमाके से करीब तीन घंटे पहले का है, जब उमर मस्जिद में 10 से 15 मिनट रुके। उसके बाद वे सुनेहरी मस्जिद के पास पार्किंग में कार खड़ी करके रेड फोर्ट की ओर बढ़े। यह फुटेज न केवल उमर के अंतिम घंटों को उजागर करता है, बल्कि साजिश की तैयारी को भी पुष्ट करता है। एनआईए और दिल्ली पुलिस का मानना है कि मस्जिद में रुकना उमर का आखिरी 'प्रेयर' या संपर्क स्थापित करने का प्रयास हो सकता है। इस खुलासे से जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 'व्हाइट कॉलर' टेरर मॉड्यूल की परतें और खुल रही हैं, जिसमें फरीदाबाद के मेडिकल प्रोफेशनल्स शामिल थे।
घटना की शुरुआत 10 नवंबर की शाम को हुई। समय था करीब 6 बजकर 52 मिनट। चांदनी चौक के हलचल भरे इलाके में रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास एक सफेद ह्यूंडई आई20 कार में जबरदस्त धमाका हो गया। विस्फोट की तीव्रता इतनी थी कि कार के टुकड़े चारों ओर बिखर गए। आसपास की 12 से अधिक गाड़ियां जल उठीं, सड़क पर मलबा फैल गया और दुकानों के शीशे टूट गए। धुंए की चादर ने पूरा इलाका ढक लिया। राहगीरों में भगदड़ मच गई। दिल्ली पुलिस, एनएसजी कमांडो और फॉरेंसिक टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। घायलों को लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृतकों में स्थानीय व्यापारी, बस कंडक्टर अशोक कुमार और पर्यटक शामिल थे। कुल 12 लोगों की मौत हुई और 20 से अधिक घायल हुए। प्रारंभिक जांच में कार में अमोनियम नाइट्रेट और आरडीएक्स के मिश्रण से बने करीब तीन किलोग्राम विस्फोटक होने का पता चला। दिल्ली पुलिस ने यूएपीए की धारा 16 और 18 के तहत मामला दर्ज किया।
जांच आगे बढ़ने पर सीसीटीवी फुटेज मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। सबसे पहले बदरपुर बॉर्डर पर दोपहर करीब 3 बजे उमर को कार में सवार देखा गया। वे मुखौटा पहने थे। उसके बाद वे कनॉट प्लेस, तुर्कमान गेट और रामलीला मैदान के आसपास घूमते नजर आए। नया वीडियो तुर्कमान गेट के पास का है, जो 12 नवंबर को सामने आया। इसमें उमर को सफेद ह्यूंडई आई20 से उतरते हुए दिखाया गया है। वे असफ अली रोड पर पैदल चलते हुए फैज-ए-इलाही मस्जिद की ओर जाते हैं। यह मस्जिद रामलीला मैदान के कोने में स्थित है, जो तुर्कमान गेट के सामने है। वीडियो में उमर काले कपड़ों में हैं, सिर पर टोपी पहने। वे मस्जिद में घुसते हैं और करीब 10 से 15 मिनट बाद बाहर आते हैं। इंडिया टुडे और एनडीटीवी की रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने इस फुटेज को वेरिफाई किया है। उसके बाद उमर सुनेहरी मस्जिद के पार्किंग में कार खड़ी करते हैं, जो रेड फोर्ट से महज 500 मीटर दूर है। पार्किंग में कार 3 बजकर 19 मिनट पर घुसती है और 6 बजकर 22 मिनट तक खड़ी रहती है। शाम 6 बजकर 50 मिनट पर कार रेड फोर्ट की ओर बढ़ती है और धमाका हो जाता है।
यह वीडियो उमर के अंतिम आंदोलनों को स्पष्ट करता है। पुलिस का कहना है कि मस्जिद में रुकना सामान्य नमाज से ज्यादा लगता है। संभव है कि वहां किसी से मिले हों या अंतिम निर्देश लें। फैज-ए-इलाही मस्जिद तबलीगी जमात से जुड़ी है, लेकिन अभी कोई लिंक साबित नहीं हुआ। एनआईए अब मस्जिद के आसपास के अन्य कैमरों की जांच कर रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट से पता चला कि धमाके के समय उमर कार में अकेले थे। उनके पैर स्टीयरिंग व्हील और एक्सीलरेटर के बीच फंस गया था। रोहिणी फॉरेंसिक लैब में डीएनए टेस्ट से मां शमीमा बेगम के सैंपल से 100 प्रतिशत मैच आया। एम्स की टीम ने पुष्टि की कि यह आत्मघाती हमला था। उमर ने कार 29 अक्टूबर को फरीदाबाद से खरीदी थी। रजिस्ट्रेशन फर्जी था।
उमर की पृष्ठभूमि चौंकाने वाली है। 32 वर्षीय उमर पुलवामा के कोइल गांव के रहने वाले थे। उन्होंने श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और एमडी की डिग्री ली। वे अनंतनाग के जीएमसी में सीनियर रेजिडेंट रहे। सितंबर 2025 में फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल सेंटर में असिस्टेंट प्रोफेसर बन गए। परिवार उन्हें शांत स्वभाव का मानता था। चाचा ने बताया कि उमर किताबें पढ़ने के शौकीन थे, लेकिन हाल में दिल्ली के मस्जिदों में ज्यादा जाते। जांच में पता चला कि वे दो साल से रेडिकल थे। मार्च 2025 में तुर्की के अंकारा गए, जहां जैश हैंडलर 'यूकासा' ने ब्रेनवॉश किया। सेशन ऐप पर एन्क्रिप्टेड चैट्स से संपर्क होता था। टेलीग्राम ग्रुप 'उमर बिन खत्ताब' से प्रभावित हुए। उमर मॉड्यूल के लॉजिस्टिक्स हेड थे।
यह मॉड्यूल 'व्हाइट कॉलर टेरर' का उदाहरण था। पढ़े-लिखे डॉक्टर इसमें लिप्त थे। 9 नवंबर को फरीदाबाद में छापेमारी हुई। 2900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद हुए। डॉक्टर मुजम्मिल शकील गनाई, डॉक्टर आदिल राथर और डॉक्टर शाहीना शाहिद गिरफ्तार हुए। शाहीना जैश की महिला विंग 'जमात-उल-मोमिनात' की प्रमुख थीं। मौलवी इरफान अहमद ने रेडिकलाइजेशन किया। कुल 13 संदिग्ध हिरासत में हैं। अल-फलाह यूनिवर्सिटी से डायरी बरामद हुईं, जो दो साल की साजिश दिखाती हैं। कानपुर से मेडिकल छात्र और ग्रेटर नोएडा से फरहान सिद्दीकी पकड़े गए।
साजिश में 6 दिसंबर को बाबरी बरसी पर दिल्ली-मुंबई में सीरियल ब्लास्ट प्लान था। 25 नवंबर को अयोध्या राम मंदिर पर हमला तय। 200 आईईडी तैयार थे। लेकिन फरीदाबाद छापे से घबरा कर उमर ने जल्दबाजी की। टीवी पर मॉड्यूल बस्ट की खबर देखी। फरीदाबाद से फरार हो दिल्ली पहुंचे। मस्जिद में तीन घंटे छिपे। कार में विस्फोटक असेंबल करने में गलती हुई। फोर्ड ईकोस्पोर्ट बरामद हो चुका। मारुति ब्रेजा की तलाश जारी। फंडिंग तुर्की-जर्मनी से हवाला से आई।
परिवार सदमे में है। पुलवामा में पिता गुलाम नबी भट से पूछताछ हुई। मां अवाक हैं। बहनोई ने कहा कि पढ़ाई के लिए कर्ज लिया। लेकिन उमर के बदलाव नजर आए। वे 'जरूरी काम' बताते। एनआईए ने श्रीनगर में पोस्टर केस से लिंक जोड़ा।
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