दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट: चार शहरों में थी सीरियल धमाकों की खौफनाक साजिश, आठ संदिग्धों ने बनाई थी ग्रुप्स ऑफ टू की योजना।
दिल्ली के रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार विस्फोट की जांच में एक के बाद एक बड़े खुलासे हो रहे हैं। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी और दिल्ली पुलिस

दिल्ली के रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार विस्फोट की जांच में एक के बाद एक बड़े खुलासे हो रहे हैं। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी और दिल्ली पुलिस की संयुक्त जांच से पता चला है कि यह धमाका किसी अकेले हमले का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक व्यापक साजिश का पहला कदम था। आठ संदिग्ध आतंकियों ने चार शहरों में एक साथ सीरियल ब्लास्ट करने की योजना बनाई थी। वे चार ग्रुप्स में बंटे थे, प्रत्येक ग्रुप में दो सदस्य। हर ग्रुप के पास कई सुधारित विस्फोटक उपकरण (आईईडी) ले जाने थे। लक्ष्य शहरों में दिल्ली के अलावा अयोध्या, प्रयागराज और मुंबई शामिल थे। यह मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवात-उल-हिंद जैसे पाकिस्तान आधारित संगठनों से जुड़ा था। फरीदाबाद के मेडिकल कॉलेज से जुड़े डॉक्टरों का यह 'व्हाइट कॉलर' टेरर नेटवर्क 9 नवंबर को भंडाफोड़ होने से घबरा गया, जिसके चलते मुख्य आरोपी उमर उन नबी ने जल्दबाजी में कार में विस्फोटक फोड़ा। इससे साजिश आधी-अधूरी रह गई, लेकिन खतरा अभी बरकरार है।
घटना 10 नवंबर की शाम को घटी। समय था लगभग 6 बजकर 52 मिनट। चांदनी चौक के भीड़भाड़ वाले इलाके में रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास एक सफेद ह्यूंडई आई20 कार खड़ी हुई थी। अचानक भयानक धमाका हुआ। विस्फोट इतना तेज था कि कार के परखच्चे उड़ गए। आसपास की 12 गाड़ियां आग की लपटों में लिपट गईं। सड़क पर मलबा बिखर गया, दुकानों के शीशे टूटकर बिखर गए और हवा में धुंए की मोटी चादर छा गई। चीखें और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दिल्ली पुलिस, नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के कमांडो और फॉरेंसिक टीमें फौरन पहुंचीं। घायलों को तत्काल लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल पहुंचाया गया। शुरुआती आंकड़ों में 12 लोगों की मौत हुई, लेकिन 13 नवंबर तक यह संख्या 13 हो गई। मृतकों में अमरोहा के बस कंडक्टर अशोक कुमार, टैक्सी ड्राइवर पंकज साहनी, व्यापारी अमर कटारिया और ई-रिक्शा चालक मोहसिन शामिल थे। कई घायल अभी भी गंभीर हैं। प्रारंभ में इसे सीएनजी सिलेंडर ब्लास्ट समझा गया, लेकिन जांच में अमोनियम नाइट्रेट और आरडीएक्स के मिश्रण से बने करीब तीन किलोग्राम विस्फोटक का पता चला। दिल्ली पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम (यूएपीए) की धारा 16 और 18 के तहत मामला दर्ज किया।
जांच एजेंसियों ने तुरंत सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल शुरू की। बदरपुर बॉर्डर पर दोपहर करीब तीन बजे मुख्य आरोपी डॉक्टर उमर उन नबी को कार में सवार देखा गया। वे काले कपड़ों और मुखौटा में थे। उसके बाद वे कनॉट प्लेस, तुर्कमान गेट और सुनेहरी मस्जिद के आसपास घूमते दिखे। तुर्कमान गेट के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद में वे 10 से 15 मिनट रुके। फिर सुनेहरी मस्जिद की पार्किंग में कार खड़ी की, जो रेड फोर्ट से महज 500 मीटर दूर थी। कार वहां 3 बजकर 19 मिनट से 6 बजकर 48 मिनट तक रही। शाम को ट्रैफिक लाइट पर रुकते ही धमाका हो गया। फॉरेंसिक रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि उमर कार में अकेले थे। उनके पैर स्टीयरिंग व्हील और एक्सीलरेटर के बीच फंस गया था। रोहिणी फॉरेंसिक लैब में डीएनए टेस्ट से उनकी मां शमीमा बेगम के सैंपल से 100 प्रतिशत मैच आया। एम्स की टीम ने इसे आत्मघाती हमला बताया। उमर ने कार 29 अक्टूबर को फरीदाबाद से खरीदी थी। रजिस्ट्रेशन फर्जी था।
नया खुलासा सीरियल ब्लास्ट प्लान का है। जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, आठ संदिग्धों ने चार शहरों को निशाना बनाया था। वे चार ग्रुप्स में बंटे थे, हर ग्रुप में दो सदस्य। प्रत्येक ग्रुप के पास कई आईईडी ले जाने थे। लक्ष्य थे दिल्ली (रेड फोर्ट, मॉल और रेलवे स्टेशन), अयोध्या (राम मंदिर परिसर), प्रयागराज (धार्मिक स्थल) और मुंबई (ट्रेन स्टेशन और बाजार)। प्लान 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर था। इससे पहले 25 नवंबर को अयोध्या में भगवा ध्वज फहराने के दिन भी हमला तय था। साजिश 26/11 मुंबई हमलों की तर्ज पर थी- वाहन जनित विस्फोट और राइफल अटैक। कुल 200 आईईडी तैयार हो चुके थे। फंडिंग के लिए डॉक्टरों ने 20 लाख रुपये इकट्ठा किए, जो उमर को सौंपे गए। यह पैसा हवाला से तुर्की और जर्मनी से आया। पाकिस्तान के जैश ऑपरेटिव उमर बिन खत्ताब फंडिंग का मुख्य स्रोत था।
यह मॉड्यूल 'व्हाइट कॉलर टेरर' का चरम उदाहरण था। इसमें फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल सेंटर से जुड़े पढ़े-लिखे डॉक्टर शामिल थे। मुख्य आरोपी उमर उन नबी पुलवामा के कोइल गांव के थे। उन्होंने श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमडी की डिग्री ली थी। सितंबर 2025 में फरीदाबाद शिफ्ट हुए। डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनाई (उर्फ मुसाइब), 32 वर्षीय पुलवामा निवासी, उमर के करीबी थे। वे अल-फलाह में ही काम करते थे। डॉक्टर आदिल मजीद राथर (उर्फ अदील), कुलगाम के वनपोरा के रहने वाले, सहारनपुर से 5 नवंबर को गिरफ्तार हुए। डॉक्टर शाहीना सईद, 40 वर्षीय लखनऊ निवासी, जैश की महिला विंग 'जमात-उल-मोमिनात' की भारत प्रमुख थीं। वे रिक्रूटमेंट और फंडिंग संभालती थीं। 8 नवंबर को फरीदाबाद से पकड़ी गईं। दक्षिण कश्मीर के मौलवी इरफान अहमद ने इन डॉक्टरों को कट्टर बनाया। अन्य संदिग्धों में कानपुर के मेडिकल छात्र और ग्रेटर नोएडा के फरहान नबी सिद्दीकी शामिल हैं। कुल 13 संदिग्ध हिरासत में हैं।
साजिश दो साल पुरानी थी। श्रीनगर के नौगाम पुलिस पोस्ट पर 19 अक्टूबर को आपत्तिजनक पोस्टर मिलने से शुरूआत हुई। अनंतनाग अस्पताल से 7 नवंबर को एके-56 राइफल बरामद हुई। 8 नवंबर को अल-फलाह से पिस्टल और विस्फोटक जब्त हुए। 9 नवंबर को फरीदाबाद में बड़ी छापेमारी हुई। 2900 किलोग्राम विस्फोटक, जिसमें 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और 20 क्विंटल एनपीके उर्वरक शामिल था, बरामद हुए। यह रूम नंबर 13 से मिला। छापे की खबर टीवी पर आने से मॉड्यूल घबरा गया। उमर फरीदाबाद से फरार हो दिल्ली पहुंचे। तुर्कमान गेट मस्जिद में छिपे। जल्दबाजी में कार में विस्फोटक डाला, लेकिन असेंबली में गलती हुई। सेशन ऐप पर तुर्की के हैंडलर 'यूकासा' से चैट्स बरामद हुईं। मार्च 2025 में अंकारा यात्रा पर ब्रेनवॉश हुआ। टेलीग्राम ग्रुप 'उमर बिन खत्ताब' से रेडिकलाइजेशन। अन्य वाहन जैसे फोर्ड ईकोस्पोर्ट बरामद हो चुका। मारुति ब्रेजा की तलाश जारी।
परिवार सदमे में हैं। पुलवामा में उमर के पिता गुलाम नबी भट से पूछताछ हुई। मां शमीमा बेगम अवाक हैं। बहनोई ने बताया कि पढ़ाई के लिए कर्ज लिया था। लेकिन उमर के हालिया बदलाव नजर आए। वे दिल्ली मस्जिदों में 'जरूरी काम' बताते। एनआईए ने श्रीनगर पोस्टर केस से लिंक जोड़ा।
सरकार ने कड़ा रुख अपनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 नवंबर को उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। कैबिनेट ने इसे 'घिनौनी आतंकी घटना' घोषित किया। मोदी ने अस्पताल जाकर घायलों से मिले और कहा, "षड्यंत्रकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।" गृह मंत्री अमित शाह ने एजेंसियों को सभी अपराधियों को पकड़ने का निर्देश दिया। एनआईए को केस सौंपा गया। सुरक्षा हाई अलर्ट पर- हवाई अड्डे, रेलवे, धार्मिक स्थल और स्मारक। रेड फोर्ट तीन दिन बंद रहा। लाल किला मेट्रो 13 नवंबर तक बंद। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे 'आतंकी हमला' बताया और सहयोग की पेशकश की। इजरायल, सिंगापुर ने निंदा की। दिल्ली पुलिस ने कार डीलर्स से वाहन सत्यापन सख्त किया।
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