Rampur News: जुड़वां बहनों के एक जैसे बायोमेट्रिक्स ने उड़ाए सिस्टम के होश, डीएम अजय द्विवेदी ने सुलझाया आधार कार्ड का अनोखा मामला
रामपुर में जुड़वां बहनों के बायोमेट्रिक्स मेल खाने के कारण आधार कार्ड जारी नहीं हो पा रहा था। डीएम अजय द्विवेदी के संज्ञान और विशेष प्रक्रिया से मामला हल हुआ।

- एक जैसे फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतली! रामपुर में आधार सर्वर हुआ कन्फ्यूज, प्रशासनिक सूझबूझ से बना दोनों बहनों का कार्ड
- रामपुर का अजब मामला: डुप्लीकेसी बताकर बार-बार रिजेक्ट हो रहा था आधार, जिला प्रशासन और यूआईडीएआई के समन्वय से मिली पहचान
- Rampur Twins Aadhaar Issue: जब तकनीकी एल्गोरिदम भी खा गया धोखा, डीएम की विशेष पहल पर बहनों को मिला कानूनी दस्तावेज
रामपुर। उत्तर प्रदेश के रामपुर जनपद में एक अत्यंत दुर्लभ और प्रशासनिक व तकनीकी दृष्टि से पेचीदा मामला सामने आया है। यहां एक जैसी शारीरिक बनावट वाली दो जुड़वां बहनों के बायोमेट्रिक मिलान (फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतली का पैटर्न) के अत्यधिक मेल खाने के कारण भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का केंद्रीय सर्वर लगातार उनके आधार कार्ड आवेदन को निरस्त कर रहा था। प्रणाली इसे एक ही व्यक्ति द्वारा दो अलग-अलग नामों से आवेदन (डुप्लीकेसी) मानकर ब्लॉक कर रही थी। महीनों से पहचान दस्तावेज के अभाव में परेशान परिवार जब जिलाधिकारी अजय द्विवेदी के समक्ष पहुंचा, तो प्रशासनिक संवेदनशीलता और तकनीकी समन्वय के जरिए इस जटिल समस्या का सुरक्षित समाधान निकाला गया।
आधुनिक पहचान प्रणाली के अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति का बायोमेट्रिक डेटा अद्वितीय (यूनिक) माना जाता है, लेकिन जैविक रूप से मोनोजाइगोटिक (एकसमान) जुड़वां बच्चों में कभी-कभी शारीरिक बनावट और पैटर्न में इतनी अधिक समानता आ जाती है कि उच्च स्तरीय डिजिटल एल्गोरिदम भी भ्रमित हो जाते हैं।
- समस्या की जड़: सिस्टम क्यों बता रहा था डुप्लीकेट डेटा?
प्राप्त विवरण के अनुसार, रामपुर की रहने वाली इन दो जुड़वां बहनों का जब परिवार आधार केंद्र पर पंजीकरण कराने ले गया, तो पहली बहन का बायोमेट्रिक डेटा आसानी से सिस्टम में दर्ज हो गया। लेकिन जब दूसरी बहन के अंगुलियों के निशान और आंखों की पुतली (आईरिस) को स्कैन किया गया, तो यूआईडीएआई के 'डी-डुप्लीकेशन' सिस्टम ने चेतावनी जारी कर दी।
सॉफ्टवेयर ने यह संकेत दिया कि यह बायोमेट्रिक डेटाबेस में पहले से मौजूद रिकॉर्ड से मिलता-जुलता है। आधार सुरक्षा नियमों के तहत यदि किसी व्यक्ति का बायोमेट्रिक पहले से मौजूद डेटा से एक निश्चित सीमा से अधिक मेल खाता है, तो सिस्टम धोखाधड़ी या फर्जीवाड़े की आशंका को रोकने के लिए आवेदन को स्वतः खारिज (रिजेक्ट) कर देता है। इसके चलते दूसरी बहन का पहचान दस्तावेज नहीं बन पा रहा था और स्कूल प्रवेश सहित कई कल्याणकारी सेवाओं के लिए परिवार को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था।
- जनसुनवाई में पहुंचा मामला, डीएम अजय द्विवेदी ने लिया संज्ञान
परिवार ने कई आधार केंद्रों और सीएससी (जन सेवा केंद्र) के चक्कर काटे, लेकिन हर बार सर्वर स्तर पर आवेदन निरस्त हो जाता था। अंततः परिजनों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी अजय द्विवेदी की जनसुनवाई में अपनी समस्या रखी।
जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता और विशिष्टता को समझते हुए इसे सामान्य लिपिकीय त्रुटि मानने के बजाय एक तकनीकी अपवाद (बायोमेट्रिक एक्सेप्शन) के रूप में देखा। यदि किसी व्यक्ति की जैविक पहचान में तकनीकी रूप से यह बाधा आती है, तो उसे नागरिक अधिकारों और पहचान से वंचित नहीं किया जा सकता।
- प्रशासनिक समाधान: कैसे तैयार हुआ पहचान का रास्ता?
जिलाधिकारी अजय द्विवेदी ने तत्काल जिला ई-गवर्नेंस सेल और आधार पंजीयन के नोडल अधिकारियों को तलब किया। मामले को सुलझाने के लिए निम्नलिखित प्रशासनिक कदम उठाए गए:
शारीरिक सत्यापन: प्रशासन की उपस्थिति में दोनों बहनों का भौतिक सत्यापन कराया गया ताकि यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हो सके कि वे दो अलग-अलग स्वतंत्र व्यक्ति हैं।
दस्तावेजी जांच: दोनों बहनों के जन्म प्रमाण पत्र, परिजनों के पहचान दस्तावेज और स्थानीय निकाय द्वारा जारी पारिवारिक विवरण की गहन पड़ताल की गई।
यूआईडीएआई से समन्वय: राज्य और क्षेत्रीय यूआईडीएआई कार्यालय को एक विशेष रिपोर्ट प्रेषित की गई, जिसमें मामले की जैविक प्रकृति और जुड़वां होने के प्रमाण प्रस्तुत किए गए।
अपवाद हैंडलिंग (Exception Handling): प्राधिकरण के नियमों में शारीरिक रूप से बायोमेट्रिक न मिलने या असाधारण परिस्थितियों के लिए 'बायोमेट्रिक एक्सेप्शन' का प्रावधान होता है। विशेष अनुमोदन के तहत अतिरिक्त फोटोग्राफिक प्रमाण, अभिभावकों के सत्यापन और मैनुअल ऑडिट के जरिए दोनों बहनों के अलग-अलग विशिष्ट पहचान कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया।
प्रशासन के इस त्वरित और संवेदनशील कदम से दोनों बालिकाओं का पहचान पत्र बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिससे उनके परिजनों ने राहत की सांस ली और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
यह मामला यह स्पष्ट करता है कि उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेटेड सिस्टम कितने भी सक्षम क्यों न हों, कुछ विशिष्ट प्राकृतिक मामलों में मानवीय सूझबूझ और जमीनी प्रशासनिक हस्तक्षेप अपरिहार्य होता है। रामपुर प्रशासन द्वारा दिखाई गई तत्परता ने यह सिद्ध किया कि जनहित से जुड़े मामलों में नियमों की मानवीय व्याख्या ही सुशासन की वास्तविक पहचान है।
What's Your Reaction?

