वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल का बड़ा बयान: ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत को तेल-गैस में आत्मनिर्भर बनना होगा, 90% आयात जोखिम भरा।
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान अस्थिर वैश्विक भू-राजनीतिक
- अनिल अग्रवाल ने चेताया- भारत तीन तरफ समुद्र से घिरा, संकट में आयात रोका जा सकता है, घरेलू उत्पादन ही एकमात्र विकल्प
- दुनिया भारत को सिर्फ बाजार बनाकर रखना चाहती है, उत्पादन से नौकरियां पैदा होंगी: अनिल अग्रवाल का ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान अस्थिर वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति में हर बड़े राष्ट्र के लिए ऊर्जा में आत्मनिर्भर होना अत्यंत आवश्यक है। भारत इस मामले में कमजोर स्थिति में है क्योंकि देश अपनी तेल और गैस जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है।
अनिल अग्रवाल ने अपने बयान में भारत की भौगोलिक स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारत तीन तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है जिसके कारण शत्रुतापूर्ण समय में समुद्री मार्गों को ब्लॉक किया जा सकता है। ऐसे में आयात पर निर्भरता देश को असुरक्षित बनाती है। इसलिए घरेलू उत्पादन को बढ़ाना ही एकमात्र रास्ता है। अनिल अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता तेल और गैस बाजार है। मांग अगले कम से कम 20 वर्षों तक बढ़ती रहेगी। लेकिन 90 प्रतिशत आयात के कारण देश वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि भारत में संसाधनों की भरमार है, लगभग 300 बिलियन बैरल ऑयल इक्विवेलेंट तक के संसाधन हैं जो गुयाना की क्षमता से 30 गुना अधिक है।
- घरेलू उत्पादन की आवश्यकता
जोर दिया कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने से ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी। अनिल अग्रवाल ने कहा कि आयात की तुलना में घरेलू उत्पादन आधी लागत पर किया जा सकता है। इसके लिए एक्सप्लोरेशन को तेज करना होगा। उन्होंने अनुमान लगाया कि बड़े पैमाने पर एक्सप्लोरेशन से स्थिति बदल सकती है। अनिल अग्रवाल ने कहा कि दुनिया भारत को उत्पादक नहीं बनाना चाहती, बल्कि सिर्फ एक बड़ा बाजार बनाकर रखना चाहती है। लेकिन भारत को इस रुख के खिलाफ जाना होगा। उन्होंने कहा कि हमें आत्मनिर्भर बनने के लिए संघर्ष करना होगा।
- नौकरियों का सृजन
उन्होंने बताया कि केवल घरेलू उत्पादन से ही बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा होती हैं। यह बात विश्व स्तर पर सिद्ध है। आयात से नौकरियां नहीं बनतीं जबकि घरेलू उत्पादन से रोजगार बढ़ता है। अनिल अग्रवाल ने अनाज के मामले का उदाहरण दिया जहां भारत आयात निर्भर से आत्मनिर्भर बना। ठीक उसी तरह तेल और गैस में भी आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है। अनिल अग्रवाल ने कहा कि एक्सप्लोरेशन को अनलॉक करने के लिए स्थिर और सहायक वातावरण चाहिए। भारी विनियमन से सुविधा की ओर बदलाव की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत के उद्यमियों, व्यापारियों और स्टार्टअप्स पर भरोसा करके एक्सप्लोरेशन और उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
- भारत की क्षमता
उन्होंने दोहराया कि भारत में संसाधन प्रचुर हैं। उत्पादन बढ़ाने से ऊर्जा सुरक्षा के साथ आर्थिक विकास भी होगा। अनिल अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान वैश्विक स्थिति में यह समय है कि भारत तेजी से कदम उठाए। यह बयान अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के माध्यम से दिया। उन्होंने ऊर्जा स्वतंत्रता को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया। वर्तमान भू-राजनीतिक अस्थिरता में ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है। अनिल अग्रवाल ने इस पर जोर दिया कि बड़े राष्ट्र ऊर्जा स्वतंत्रता सुनिश्चित कर रहे हैं और भारत को भी ऐसा करना होगा। अनिल अग्रवाल ने सुझाव दिया कि एक्सप्लोरेशन लाइसेंस बढ़ाने, नियम सरल करने और उत्पादन को प्रोत्साहन देने से स्थिति बदल सकती है। उन्होंने कहा कि भारत में खजाना है और इसे उपयोग में लाना होगा। अनिल अग्रवाल के बयान से ऊर्जा क्षेत्र में घरेलू उत्पादन बढ़ाने की बहस तेज हो गई है।
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