Tata Sons Chairman: एन चंद्रशेखरन को मिला 5 साल का सेवा विस्तार, टाटा संस के बोर्ड ने दोबारा चेयरमैन पद पर लगाई मुहर
Tata Sons Chairman: एन चंद्रशेखरन अगले 5 साल तक टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगे। टाटा संस के बोर्ड ने उनके कार्यकाल विस्तार के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से औपचारिक मंजूरी दे दी है।

- Tata Sons Chairman: एन चंद्रशेखरन को मिला 5 साल का सेवा विस्तार, टाटा संस के बोर्ड ने दोबारा चेयरमैन पद पर लगाई मुहर
- Tata Group Big Decision: अगले पांच वर्षों तक एन चंद्रशेखरन के हाथों में रहेगी टाटा संस की कमान, निदेशक मंडल ने दी मंजूरी
- Corporate News: एन चंद्रशेखरन बने रहेंगे टाटा संस के मुखिया, बोर्ड रूम में सर्वसम्मति से पारित हुआ 5 साल का प्रस्ताव
- टाटा समूह में नेतृत्व की निरंतरता: एन चंद्रशेखरन के दूसरे कार्यकाल को हरी झंडी, जानिए भारतीय उद्योग जगत पर इसके क्या मायने हैं
सबसे बड़े और प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों में शुमार 150 वर्ष से अधिक पुराने टाटा समूह (Tata Group) की होल्डिंग कंपनी 'टाटा संस' (Tata Sons) के नेतृत्व को लेकर अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। टाटा संस के निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) ने मौजूदा कार्यकारी चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) को अगले पांच वर्षों के लिए दोबारा चेयरमैन पद पर बनाए रखने के प्रस्ताव को औपचारिक और सर्वसम्मत मंजूरी दे दी है। बोर्ड की बैठक में लिए गए इस निर्णय के बाद देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह में अगले पांच वर्षों तक रणनीतिक और प्रशासनिक निरंतरता बनी रहेगी।
कंपनी संचालन से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों और कॉरपोरेट रिकॉर्ड्स के अनुसार, बोर्ड बैठक के दौरान चंद्रशेखरन के पिछले कार्यकाल की उपलब्धियों, समूह के समग्र वित्तीय पुनर्गठन, कर्ज में कमी और नए जमाने के व्यवसायों में विस्तार की व्यापक समीक्षा की गई। बोर्ड के सदस्यों, जिनमें प्रमुख ट्रस्टी और स्वतंत्र निदेशक शामिल हैं, ने चंद्रशेखरन के कुशल नेतृत्व, कार्यशैली और संकट प्रबंधन की सराहना करते हुए उनके कार्यकाल को अगले पांच वर्षों के लिए विस्तारित करने पर अपनी सहमति व्यक्त की।
- टीसीएस से शुरू हुआ सफर और 2017 में संभाली थी कमान
एन चंद्रशेखरन का टाटा समूह के साथ जुड़ाव दशकों पुराना और बेहद प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने वर्ष 1987 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में एक सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर के रूप में अपने पेशेवर सफर की शुरुआत की थी। अपनी तकनीकी दक्षता, रणनीतिक दृष्टि और प्रशासनिक कुशलता के दम पर वह लगातार सीढ़ियां चढ़ते हुए वर्ष 2009 में टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) के शीर्ष पद तक पहुंचे। उनके नेतृत्व में टीसीएस न केवल भारत की सबसे मूल्यवान आईटी कंपनी बनी, बल्कि समूह के लिए सबसे बड़ा राजस्व और लाभ सृजित करने वाला आधार स्तंभ भी सिद्ध हुई।
फरवरी 2017 में जब टाटा समूह एक बड़े आंतरिक नेतृत्व संकट और कॉरपोरेट विवाद से गुजर रहा था, तब एन चंद्रशेखरन को टाटा संस का पहला गैर-पारसी चेयरमैन नियुक्त किया गया था। उस नाजुक दौर में पदभार संभालने के बाद उन्होंने समूह की विभिन्न सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के बीच आपसी तालमेल को सुदृढ़ किया, कॉरपोरेट गवर्नेंस के उच्च मानकों को पुनर्स्थापित किया और शेयरधारकों के भरोसे को नया आयाम दिया।
- साधारण कारोबार से हाई-टेक तक: चंद्रशेखरन के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने पारंपरिक विनिर्माण से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीकी और उपभोक्ता केंद्रित व्यवसायों की ओर तेजी से कदम बढ़ाए हैं:
एयर इंडिया की ऐतिहासिक वापसी: भारत सरकार से राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयर इंडिया का सफल अधिग्रहण और उसका निजीकरण चंद्रशेखरन के कार्यकाल की सबसे ऐतिहासिक घटनाओं में से एक रहा, जिसने समूह को नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी बना दिया।
डिजिटल और सुपर ऐप प्लेटफॉर्म: 'टाटा न्यू' (Tata Neu) के माध्यम से रिटेल, ग्रोसरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और वित्तीय सेवाओं को एकीकृत करने का महत्वाकांक्षी डिजिटल मॉडल पेश किया गया।
इलेक्ट्रिक वाहन और ग्रीन एनर्जी: टाटा मोटर्स को देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) क्रांति का अगुआ बनाने के साथ-साथ टाटा पावर के रिन्यूएबल पोर्टफोलियो को रिकॉर्ड स्तर पर विस्तारित किया गया।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण: वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए सेमीकंडक्टर चिप निर्माण और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली संयंत्रों की नींव रखी गई।
वित्तीय अनुशासन और गैर-प्रमुख संपत्तियों का विनिवेश: घाटे में चल रही कंपनियों को बंद या पुनर्गठित कर समूह की कुल बैलेंस शीट को कर्ज-मुक्त बनाने की दिशा में अनुकरणीय कदम उठाए गए।
- शेयरधारकों और शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संदेश
भारतीय शेयर बाजार और वित्तीय विश्लेषकों ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार को बेहद सकारात्मक संकेत माना है। टाटा समूह की लगभग 30 से अधिक सूचीबद्ध कंपनियां जिनमें टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर, टाइटन और इंडियन होटल्स शामिल हैं भारतीय पूंजी बाजार के कुल मूल्यांकन (मार्केट कैप) में एक विशाल हिस्सेदारी रखती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े औद्योगिक साम्राज्य में शीर्ष स्तर पर नीतिगत स्थिरता निवेशकों के विश्वास को मजबूत करती है। चंद्रशेखरन के अगले पांच साल के रोडमैप में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स को चालू करना, एयर इंडिया और विस्तारा का पूर्ण एकीकरण कर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एयरलाइन बनाना और समूह की आपूर्ति श्रृंखला को चीन पर निर्भरता से मुक्त कर आत्मनिर्भर बनाना सबसे प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
टाटा संस में लगभग 66 प्रतिशत की निर्णायक हिस्सेदारी परोपकारी संस्था 'टाटा ट्रस्ट्स' के पास है। चंद्रशेखरन को ट्रस्ट्स के वरिष्ठ सदस्यों और मार्गदर्शकों का पूर्ण समर्थन प्राप्त रहा है। उनकी सादगी, डेटा-संचालित निर्णय लेने की क्षमता और जमीनी स्तर पर निष्पादन (एग्जीक्यूशन) पर फोकस ने उन्हें कॉरपोरेट जगत के सबसे सम्मानित लीडर्स की श्रेणी में स्थापित किया है।
हालांकि, आने वाले पांच वर्षों में उनके सामने वैश्विक मंदी, अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के कारण आईटी क्षेत्र में आने वाले संरचनात्मक व्यवधान और भारी-भरकम पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) वाली परियोजनाओं के समयबद्ध संचालन की कठिन चुनौतियां भी होंगी। बोर्ड के इस नए जनादेश से स्पष्ट है कि समूह को पूरा भरोसा है कि चंद्रशेखरन के रणनीतिक मार्गदर्शन में टाटा समूह न केवल इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करेगा, बल्कि वैश्विक उद्योग जगत में भारत की साख को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा।
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