फर्रुखाबाद में पुलिस उत्पीड़न से तंग युवक की आत्महत्या- पैंट पर लिखा सुसाइड नोट, दो पुलिसकर्मियों के नाम का जिक्र किया।
Farrukhabad News: मऊदरवाजा थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत गुतासी के मजरा छेदा नगला में 25 वर्षीय दिलीप राजपूत ने 14 जुलाई 2025 की रात अपने घर....
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। मऊदरवाजा थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत गुतासी के मजरा छेदा नगला में 25 वर्षीय दिलीप राजपूत ने 14 जुलाई 2025 की रात अपने घर में धोती से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मरने से पहले दिलीप ने अपनी पैंट पर नीली स्याही से सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी के परिवार के तीन लोगों और दो पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए। इस नोट में पुलिस द्वारा रिश्वत मांगने और मारपीट का जिक्र किया गया है। इस घटना ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है, और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
दिलीप राजपूत का अपनी पत्नी नीरज के साथ कुछ दिन पहले झगड़ा हुआ था। इस विवाद के बाद नीरज ने थाना मऊदरवाजा की हथियापुर चौकी में दिलीप के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने दिलीप को चौकी बुलाया। वहां सिपाही यशवंत यादव ने कथित तौर पर मामले को सुलझाने के लिए दिलीप के पिता राम रईस से 50,000 रुपये की मांग की। जब राम रईस ने रुपये देने से इनकार किया, तो उनके साथ मारपीट की गई। बाद में सिपाही महेश उपाध्याय ने 40,000 रुपये लेकर दोनों पक्षों के बीच समझौता करवा दिया।
समझौते के बाद दिलीप अपने पिता के साथ घर लौटे, लेकिन इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया। उसी रात, दिलीप ने अपने कमरे में धोती से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी पत्नी के पिता वनवारी लाल, भाई राजू, बहनोई रजनेश राजपूत, और सिपाहियों यशवंत यादव व महेश उपाध्याय को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया। नोट में दिलीप ने पुलिस द्वारा रिश्वत मांगने और थर्ड डिग्री टॉर्चर का भी उल्लेख किया। सुसाइड नोट को नीली स्याही से उनकी सफेद पैंट पर लिखा गया था, जो इस मामले को और भी मार्मिक बनाता है।
घटना की सूचना मिलने पर अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने बताया कि दिलीप की पत्नी की शिकायत के बाद दोनों पक्षों को चौकी पर बुलाकर समझौता करवाया गया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दिलीप के शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं मिले, जिससे मारपीट के आरोपों पर सवाल उठ रहे हैं। फिर भी, सुसाइड नोट में लगाए गए गंभीर आरोपों को देखते हुए सिपाही यशवंत यादव और महेश उपाध्याय को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
यह घटना न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज की उदासीनता को भी उजागर करती है। दिलीप जैसे युवा, जो सामाजिक और पारिवारिक दबावों के साथ-साथ कथित पुलिस उत्पीड़न का सामना करते हैं, अक्सर मानसिक रूप से टूट जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ करना और पुलिस सुधारों पर ध्यान देना जरूरी है।
पुलिस ने दिलीप के परिजनों की शिकायत पर पत्नी के परिवार के तीन सदस्यों वनवारी लाल, राजू, और रजनेश राजपूत तथा दोनों सिपाहियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आत्महत्या के पीछे के सटीक कारण क्या थे और पुलिस की भूमिका कितनी थी। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दिलीप की आत्महत्या की खबर फैलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। परिजनों ने पुलिस पर रिश्वतखोरी और उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। इस मामले ने स्थानीय लोगों में पुलिस प्रशासन के प्रति गुस्सा पैदा कर दिया। फर्रुखाबाद के सांसद मुकेश राजपूत के भतीजे राहुल राजपूत मौके पर पहुंचे और परिजनों को न्याय का भरोसा दिलाया। उन्होंने पुलिस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
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