UP News: बरेली की महिला इंस्पेक्टर नरगिस खान पर आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा- 14 वर्षों में 10 करोड़ की संपत्ति, पति पहले से जेल में बंद।
उत्तर प्रदेश के बरेली में तैनात महिला पुलिस इंस्पेक्टर नरगिस खान एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। मेरठ के मेडिकल थाने में उनके खिलाफ आय ...
उत्तर प्रदेश के बरेली में तैनात महिला पुलिस इंस्पेक्टर नरगिस खान एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। मेरठ के मेडिकल थाने में उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) का मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला 4 जून 2025 को तब सुर्खियों में आया, जब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने जांच के बाद नरगिस खान के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(b) और 13(2) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। जांच में पता चला कि नरगिस खान ने अपनी सेवा के 14 वर्षों में 10.59 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की, जबकि उनकी वैध आय केवल 5.36 करोड़ रुपये थी। यह 5.23 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का मामला भ्रष्टाचार और अनुचित तरीकों से धन अर्जन का गंभीर आरोप लगाता है। इससे पहले, नरगिस खान और उनके पति सुरेश यादव को 2021 में लखनऊ से 1.72 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया था, और वर्तमान में सुरेश यादव जेल में बंद हैं।
नरगिस खान, जो वर्तमान में बरेली में पुलिस इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं, के खिलाफ 2022 में मेरठ में आय से अधिक संपत्ति की शिकायत दर्ज की गई थी। इस शिकायत के आधार पर मेरठ के एंटी करप्शन ब्यूरो ने जांच शुरू की। जांच दल, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर ज्ञानेंद्र पांडे ने किया, ने नरगिस खान की आय, खर्च, और संपत्तियों का गहन विश्लेषण किया। जांच में पाया गया कि 2008 से 2022 तक की अवधि में नरगिस खान की कुल वैध आय, जिसमें वेतन, भत्ते, और अन्य वैध स्रोत शामिल थे, लगभग 5.36 करोड़ रुपये थी। इसके बावजूद, उन्होंने 10.59 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की, जिसमें अचल संपत्ति, बैंक खाते, और अन्य निवेश शामिल हैं। इस 5.23 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति को उनकी वैध आय से उचित नहीं ठहराया जा सका।
एंटी करप्शन ब्यूरो ने नरगिस खान के खिलाफ मेडिकल थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। जांच में उनके बैंक खातों, अचल संपत्तियों (जैसे मेरठ, लखनऊ, और बरेली में संपत्तियां), और अन्य निवेशों की गहन छानबीन की जा रही है। यह भी उल्लेखनीय है कि नरगिस खान के पति, सुरेश यादव, पहले से ही 2021 में लखनऊ के अलीगंज में 1.72 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में जेल में हैं। इस मामले में नरगिस और उनके पति को गाजियाबाद के कविनगर पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जहां उन पर रिटायर्ड उप श्रमायुक्त की पत्नी से ठगी का आरोप था।
- पहले के विवाद और गिरफ्तारी
नरगिस खान का नाम इससे पहले भी विवादों से जुड़ा रहा है। 2021 में, गाजियाबाद पुलिस ने उन्हें और उनके पति सुरेश यादव को लखनऊ के अलीगंज में उनके फ्लैट से गिरफ्तार किया था। यह मामला रिटायर्ड उप श्रमायुक्त की पत्नी से 1.72 करोड़ रुपये की ठगी से संबंधित था। नरगिस, जो उस समय मेरठ के कोऑपरेटिव सेल में तैनात थीं, पर आरोप था कि उन्होंने और उनके पति ने मिलकर पीड़िता को धोखा दिया। इस मामले में उनकी जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया था, और सुरेश यादव अभी भी जेल में हैं। यह घटना नरगिस की कार्यशैली और उनके प्रभावशाली रवैये को दर्शाती है, जिसके बारे में कहा जाता है कि समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के दौरान वह जिले के पुलिस कप्तानों तक को प्रभावित करती थीं।
X पर कई पोस्ट्स में दावा किया गया कि सपा सरकार के दौरान नरगिस खान की पहुंच इतनी थी कि वह थानों का चार्ज अपनी मर्जी से लेती थीं और उनकी तैनाती हमेशा प्रभावशाली स्थानों पर रही। हालांकि, ये दावे अभी तक सत्यापित नहीं हुए हैं और इन्हें जांच के बाद ही पुष्ट किया जा सकता है।
- जांच की प्रक्रिया और एंटी करप्शन ब्यूरो
एंटी करप्शन ब्यूरो ने इस मामले में अपनी जांच को व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया। जांच दल ने नरगिस खान के सभी वित्तीय लेन-देन, संपत्ति दस्तावेज, और बैंक खातों की जांच की। यह पाया गया कि उनके पास मेरठ, लखनऊ, और बरेली में कई संपत्तियां हैं, जिनमें फ्लैट, प्लॉट, और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं। इसके अलावा, उनके बैंक खातों में भारी मात्रा में जमा राशि और निवेश भी पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि नरगिस के पति सुरेश यादव के नाम पर भी कई संपत्तियां दर्ज हैं, जो संभवतः उनके भ्रष्टाचार से अर्जित धन से खरीदी गईं।
एंटी करप्शन ब्यूरो के इंस्पेक्टर ज्ञानेंद्र पांडे ने FIR में उल्लेख किया कि नरगिस खान ने अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध है। इस अधिनियम की धारा 13(1)(b) के तहत, यदि कोई लोक सेवक अपनी आय से अधिक संपत्ति रखता है और उसे उचित नहीं ठहरा सकता, तो उसे सात साल तक की सजा और संपत्ति जब्ती का सामना करना पड़ सकता है।
नरगिस खान के खिलाफ यह मामला उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल के वर्षों में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है, जिसके तहत कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उदाहरण के लिए, 2022 में मेरठ में एक सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ 1.4 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का मामला दर्ज हुआ था, जिसमें उनके पास एक स्विमिंग पूल वाला फार्महाउस और अन्य संपत्तियां थीं। इसी तरह, 2024 में लखनऊ रेंज के अतिरिक्त निदेशक (प्रोसिक्यूशन) वीरेंद्र विक्रम सिंह के खिलाफ 86.12 लाख रुपये की अघोषित संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था।
नरगिस खान का यह मामला न केवल पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारी किस तरह अपने प्रभाव का दुरुपयोग करते हैं। X पर कई यूजर्स ने इस मामले को लेकर गुस्सा जाहिर किया और मांग की कि नरगिस खान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। एक यूजर ने लिखा, "यह सिर्फ एक इंस्पेक्टर का मामला नहीं है, यह सिस्टम की खामी को दर्शाता है। ऐसे अधिकारियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।"
मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने इस मामले में तटस्थ रुख अपनाते हुए कहा कि जांच पूरी होने तक कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी। एंटी करप्शन ब्यूरो ने स्पष्ट किया कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है, और नरगिस खान के दस्तावेजों, बैंक खातों, और संपत्तियों की गहन पड़ताल की जा रही है। यदि दोष सिद्ध होता है, तो नरगिस को न केवल सजा का सामना करना पड़ सकता है, बल्कि उनकी संपत्तियां भी जब्त की जा सकती हैं।
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, "कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। यदि कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ पूरी सख्ती बरती जाएगी।"
नरगिस खान, जो मेरठ की मूल निवासी हैं, ने अपने करियर की शुरुआत उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के रूप में की थी। उनकी तेज-तर्रार छवि और प्रभावशाली कार्यशैली ने उन्हें जल्द ही इंस्पेक्टर के पद तक पहुंचाया। हालांकि, उनकी कार्यशैली हमेशा से विवादों का केंद्र रही है। X पर कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया कि सपा सरकार के दौरान नरगिस खान की तैनाती हमेशा प्रमुख थानों में रही, और वह अपने प्रभाव के दम पर जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रभावित करती थीं। हालांकि, ये दावे अभी तक सत्यापित नहीं हुए हैं और इन्हें जांच के बाद ही पुष्ट किया जा सकता है।
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