Birbhum Cash Recovery: बीरभूम में करोड़ों की बरामदगी पर शुभेंदु अधिकारी का तीखा हमला, बोले- 'एक-एक भ्रष्टाचारी से होगा हिसाब'
बीरभूम में ₹28.5 करोड़ कैश और 15 किलो सोना बरामद होने के बाद भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी पर जोरदार हमला बोला और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

- बीरभूम में ₹28.5 करोड़ और सोने की जब्ती पर घिरी TMC, शुभेंदु अधिकारी ने साधा निशाना; जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की मांग
- 'जनता के पैसे की खुली डकैती!': बीरभूम में ₹28.5 करोड़ नकद और सोना मिलने के बाद भड़के शुभेंदु अधिकारी, टीएमसी पर बोला करारा हमला
- Suvendu Adhikari On Birbhum Raid: बीरभूम कैश जब्ती मामले में शुभेंदु अधिकारी का टीएमसी पर बड़ा राजनीतिक हमला, केंद्रीय एजेंसियों की जांच की मांग
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पुलिस द्वारा एक ठिकाने से ₹28.53 करोड़ नकद और 15 किलोग्राम सोना जब्त किए जाने के बाद राज्य का राजनीतिक पारा चरम पर पहुंच गया है। इस रिकॉर्ड जब्ती को लेकर राज्य के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने 30 जुलाई, 2026 को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उसके शीर्ष नेतृत्व पर करारा राजनीतिक हमला बोला है। कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि यह बेहिसाब संपत्ति अवैध बालू, पत्थर खनन और सिंडिकेट राज का नतीजा है। अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बंगाल की जनता का खून-पसीना चूसने वाले भ्रष्टाचारियों का जल्द ही पूरा हिसाब-किताब होगा। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय एजेंसियों जैसे ईडी (ED) और आयकर विभाग से कराने की जोरदार वकालत की है।
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मोहम्मदबाजार थाना क्षेत्र स्थित देउचा गांव में पुलिस की छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में अघोषित संपत्ति बरामद हुई थी। सत्ताधारी दल के एक स्थानीय प्रभाव वाले कारोबारी के रिश्तेदार मिनार मंडल के घर से ₹28.53 करोड़ कैश तथा करीब 15 किलो सोना (अनुमानित मूल्य ₹21.5 करोड़) मिला था।
नोटों के विशाल बंडलों को गिनने के लिए पुलिस को बैंक से नोट गिनने की पांच मशीनें मंगवानी पड़ी थीं। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और आभूषणों की जब्ती की खबर जैसे ही सार्वजनिक हुई, राज्य की विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने इसे राज्य सरकार और टीएमसी के कथित भ्रष्टाचार का सीधा सबूत बताते हुए राजनीतिक मोर्चा खोल दिया।
बीरभूम में हुई इस मैराथन छापेमारी के बाद 30 जुलाई को शुभेंदु अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि देउचा इलाके में मिले इस काले धन के तार केवल स्थानीय बालू-पत्थर कारोबारियों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके तार सत्तारूढ़ दल के शीर्ष नेताओं और प्रभावशाली राजनीतिक आकाओं से जुड़े हुए हैं।
अधिकारी ने अपने संबोधन और सोशल मीडिया बयानों के जरिए आरोप लगाया कि वर्षों से बीरभूम और आसपास के जिलों में चल रहे अवैध खनन और सिंडिकेट कारोबार की कमाई को इसी तरह सुरक्षित ठिकानों पर छिपाया जाता रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्राथमिक जांच में जिस मिनार मंडल के घर से यह बरामदगी हुई है, वह तृणमूल कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं के करीबी टुल्लू मंडल का रिश्तेदार और मुख्य सहयोगी है। भाजपा नेता ने सवाल उठाया कि एक साधारण पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति बिना राजनीतिक संरक्षण के इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और सोना अपने घर में कैसे जमा कर सकता है।
शुभेंदु अधिकारी (भाजपा) का रुख:
भाजपा नेता ने कड़े शब्दों में कहा, "यह जब्ती केवल हिमशैल का सिरा (Tip of the iceberg) है। बंगाल में चारों तरफ भ्रष्टाचार का जाल फैला हुआ है। चाहे शिक्षक भर्ती हो, मवेशी तस्करी हो या अवैध खनन का कारोबार—हर जगह टीएमसी नेताओं और उनके बिचौलियों का बोलबाला है। जनता का जो पैसा लूटा गया है, एक-एक पाई का हिसाब लिया जाएगा। कोई भी भ्रष्टाचारी बच नहीं पाएगा।" उन्होंने मांग की कि राज्य पुलिस के साथ-साथ इस मामले में धन शोधन (Money Laundering) की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (Income Tax) को भी तुरंत अपनी कार्रवाई आगे बढ़ानी चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) का पलटवार:
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ताओं और नेताओं ने शुभेंदु अधिकारी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि पुलिस राज्य सरकार के अधीन पूरी निष्पक्षता से काम कर रही है और खुद राज्य पुलिस ने ही यह सफल छापेमारी की है। टीएमसी नेताओं का तर्क है कि यदि राज्य सरकार किसी को बचाना चाहती, तो यह रेड ही संभव नहीं हो पाती। टीएमसी ने आरोप लगाया कि भाजपा हर आपराधिक या वित्तीय अपराध को राजनीतिक रंग देकर राज्य की छवि धूमिल करने की कोशिश करती है।
बीरभूम में हुई इस रिकॉर्ड जब्ती और उस पर शुभेंदु अधिकारी के आक्रामक रुख ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारी हलचल मचा दी है:
राजनीतिक ध्रुवीकरण: आगामी स्थानीय व राज्य स्तरीय चुनावों से पहले भ्रष्टाचार का मुद्दा एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
प्रशासनिक और कानूनी दबाव: विपक्षी दबाव के कारण पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों पर इस मामले के मुख्य सरगनाओं तक पहुंचने और वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला (Money Trail) को बेनकाब करने का भारी दबाव है।
सिंडिकेट राज पर जनता का ध्यान: बीरभूम के खनिज समृद्ध क्षेत्रों में सक्रिय अवैध बालू और पत्थर माफियाओं की कार्यशैली पर एक बार फिर आम जनता और मीडिया का ध्यान आकर्षित हुआ है।
शुभेंदु अधिकारी द्वारा केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग किए जाने के बाद अब यह देखना अहम होगा कि क्या ईडी या आयकर विभाग इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर या मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करते हैं। वहीं दूसरी तरफ, बीरभूम पुलिस हिरासत में लिए गए आरोपी से पूछताछ कर रही है और फरार चल रहे मुख्य संदिग्धों की तलाश में लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर विधानसभा से लेकर सड़कों तक जोरदार राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं।
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