Gurmeet Ram Rahim Furlough: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को 21 दिन की फरलो, 17वीं बार जेल से आएगा बाहर
Gurmeet Ram Rahim Furlough: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को प्रशासन से 21 दिन की फरलो मिल गई है। 17वीं बार जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हुआ।

- राम रहीम को फिर मिली 21 दिन की फरलो, जानिए रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आने की शर्तें
- डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को मिली 21 दिन की फरलो, 17वीं बार जेल की सलाखों से बाहर आने का रास्ता साफ
- Dera Chief Furlough: गुरमीत राम रहीम को मिली 21 दिन की फरलो, 17वीं बार जेल से बाहर आने की मिली मंजूरी
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को जेल प्रशासन और राज्य सरकार से एक बार फिर 21 दिन की फरलो मिल गई है। रोहतक की सुनारिया जेल में विभिन्न मामलों में सजा काट रहे डेरा प्रमुख को 17वीं बार जेल की चारदीवारी से बाहर आने की प्रशासनिक अनुमति मिली है। जेल नियमावली के तहत तय शर्तों और सुरक्षा दिशानिर्देशों के आधार पर यह अस्थायी रिहाई मंजूर की गई है। इस अवधि के दौरान वह तय स्थान पर कड़े सुरक्षा घेरे और निगरानी में रहेगा। 21 दिनों की मियाद पूरी होने के बाद उसे पुनः सुनारिया जेल में आत्मसमर्पण करना होगा।
हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 21 दिन की फरलो स्वीकृत की गई है। प्रशासनिक और जेल नियमों के अंतर्गत मिली इस मंजूरी के बाद वह सत्रहवीं बार जेल से अस्थायी रूप से बाहर आ सकेगा। इससे पहले भी उसे अलग-अलग समय पर पैरोल और फरलो के माध्यम से कई बार जेल से बाहर रहने की छूट दी जा चुकी है।
प्रशासन की ओर से जारी आदेशों के तहत इस 21 दिवसीय फरलो के दौरान कई कड़े सुरक्षा नियम और दिशा-निर्देश लागू रहेंगे। इस अवधि में डेरा प्रमुख की गतिविधियों पर स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र द्वारा लगातार नजर रखी जाएगी ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य बनी रहे।
गुरमीत राम रहीम विभिन्न आपराधिक मामलों में अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद से सुनारिया जेल में सजा काट रहा है। सजा के दौरान बंदी कल्याण एवं जेल नियमावली के तहत कैदियों को दिए जाने वाले कानूनी अधिकारों का हवाला देकर डेरा प्रमुख की ओर से समय-समय पर पैरोल और फरलो के आवेदन दाखिल किए जाते रहे हैं।
हरियाणा सुधारात्मक सेवाएं अधिनियम और संबंधित जेल मैनुअल के प्रावधानों के अंतर्गत कैदियों के आचरण, जेल में बिताए समय और स्थानीय प्रशासन की अनापत्ति रिपोर्ट के आधार पर ऐसी अर्जियों का मूल्यांकन किया जाता है। सभी वैधानिक औपचारिकताओं और स्थानीय प्रशासन की समीक्षा के बाद सक्षम प्राधिकारी ने इस 21 दिन की फरलो को मंजूरी प्रदान की है।
अतीत में जब भी डेरा प्रमुख को जेल से अस्थायी रिहाई मिली है, उसे हरियाणा से बाहर उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित बरनावा आश्रम या निर्धारित सुरक्षित परिसर में रहने की अनुमति दी जाती रही है। इस दौरान उसके सार्वजनिक कार्यक्रमों, राजनीतिक बयानों और बड़ी सभाओं पर पाबंदियां लागू रहती हैं।
डेरा प्रमुख को 17वीं बार अस्थायी रिहाई मिलने के फैसले पर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। डेरा सच्चा सौदा के समर्थकों और अनुयायियों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे कानूनी दायरे में मिला वैध अधिकार बताया है। उनका कहना है कि कानून के अनुसार निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले प्रत्येक कैदी को यह कानूनी राहत पाने का हक है।
दूसरी ओर, कानूनी विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों के नेताओं ने बार-बार मिल रही अस्थायी रिहाई के समय और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का तर्क है कि गंभीर मामलों में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को इतने कम अंतरालों पर लगातार पैरोल और फरलो मिलना व्यवस्था की निष्पक्षता पर विमर्श खड़ा करता है। वहीं, राज्य के गृह विभाग और जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कदम पूरी तरह से जेल मैन्युअल और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप उठाया गया है।
डेरा प्रमुख की जेल से रिहाई का निर्णय सामाजिक, प्रशासनिक और सुरक्षा के नजरिए से काफी संवेदनशील माना जाता है। हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में डेरा सच्चा सौदा का एक बड़ा प्रभाव क्षेत्र है। ऐसे में जब भी राम रहीम जेल से बाहर आता है, संबंधित जिलों में पुलिस प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ती है।
कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाती है ताकि किसी भी तरह के शक्ति प्रदर्शन या सार्वजनिक जमावड़े से बचा जा सके। इसके साथ ही, बार-बार मिल रही इस राहत से भारतीय न्याय व्यवस्था और जेल सुधार नीतियों में कैदियों के अधिकारों और नियमों के एकसमान उपयोग को लेकर भी कानूनी बहस छिड़ जाती है।
प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद तय कानूनी प्रक्रियाओं और जमानत मुचलके की शर्तों को पूरा कर गुरमीत राम रहीम को सुनारिया जेल से निर्धारित स्थान के लिए रवाना किया जाएगा। 21 दिनों की इस फरलो अवधि के दौरान स्थानीय पुलिस प्रशासन उसकी आवाजाही और आगंतुकों की सूची की कड़ी निगरानी करेगा।
नियमों के अनुसार तय अवधि समाप्त होते ही उसे निर्धारित समय और तारीख पर रोहतक की सुनारिया जेल में वापस पहुंचना होगा। जेल अधिकारी और स्थानीय प्रशासन पूरे 21 दिन तक यह सुनिश्चित करेंगे कि रिहाई के लिए तय किए गए किसी भी नियम अथवा शांति व्यवस्था की शर्त का उल्लंघन न हो।
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