Parliament Monsoon Session 2026: संसद में मॉनसून सत्र का पहला दिन, जंतर-मंतर पर विभिन्न संगठनों का भारी विरोध प्रदर्शन

Parliament Monsoon Session 2026: संसद का मॉनसून सत्र शुरू होते ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी है। पढ़ें सुरक्षा और राजनीतिक समीकरण पर पूरी रिपोर्ट।

Jul 20, 2026 - 13:04
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Parliament Monsoon Session 2026: संसद में मॉनसून सत्र का पहला दिन, जंतर-मंतर पर विभिन्न संगठनों का भारी विरोध प्रदर्शन
Jantar Mantar Protest Delhi
  • Monsoon Session Day 1 Update: एक तरफ संसद का मॉनसून सत्र शुरू, दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों का फूटा गुस्सा
  • संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन दिल्ली में बढ़ा सियासी पारा, जंतर-मंतर पर सुरक्षा सख्त, जानें क्यों हो रहा है प्रदर्शन
  • Monsoon Session Protest: संसद के मॉनसून सत्र के आगाज के साथ ही जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन शुरू, सुरक्षा चाक-चौबंद

देश की राजधानी दिल्ली में आज राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गईं, जब एक तरफ नए संसद भवन में संसद का मॉनसून सत्र (Parliament Monsoon Session 2026) शुरू हुआ, तो वहीं दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर विभिन्न सामाजिक, किसान और राजनीतिक संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया। जुलाई 2026 के इस अहम सत्र के पहले ही दिन विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जमा हुए हैं। विपक्ष जहां संसद के भीतर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है, वहीं सड़क पर जारी इस आंदोलन ने कानून-व्यवस्था और राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। दिल्ली पुलिस ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए लुटियंस दिल्ली और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, और आने वाले दिनों में यह विरोध प्रदर्शन और तेज होने की उम्मीद है।

संसद के विधायी कार्यों और सरकारी कामकाज के लिहाज से मॉनसून सत्र का पहला दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन इस बार का सत्र केवल संसद की चारदीवारी के भीतर ही नहीं, बल्कि दिल्ली की सड़कों पर भी हलचल लेकर आया है। लुटियंस जोन स्थित ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर पर सोमवार सुबह से ही विभिन्न यूनियनों और नागरिक समाज के समूहों ने डेरा डाल दिया है। इन संगठनों का उद्देश्य संसद सत्र के दौरान सरकार का ध्यान अपनी लंबित मांगों की ओर आकर्षित करना है। प्रदर्शनकारियों में किसान संगठन, छात्र संघ और विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं, जो अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं।

सत्र के पहले दिन की शुरुआत संसद भवन में सांसदों के शपथ ग्रहण (यदि कोई उपचुनाव हुआ हो) और शोक प्रस्तावों के साथ हुई। ठीक इसी समय, जंतर-मंतर पर सुबह 9 बजे से ही प्रदर्शनकारियों का जुटना शुरू हो गया था।

सुरक्षा घेरा: दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कई टुकड़ियों को जंतर-मंतर, संसद मार्ग और कनाट प्लेस के आसपास तैनात किया गया है। जगह-जगह तीन स्तरीय बैरिकेडिंग की गई है ताकि कोई भी प्रदर्शनकारी संसद भवन की ओर मार्च न कर सके।

संगठनों की मांगें: प्रदर्शनकारी संगठनों में मुख्य रूप से फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी चाहने वाले किसान, बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवा और पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग कर रहे केंद्रीय और राज्य कर्मचारी शामिल हैं।

यातायात में व्यवधान: जंतर-मंतर की ओर आने वाले कई रास्तों को बंद कर दिए जाने या रूट डायवर्ट किए जाने के कारण मध्य दिल्ली में सुबह के समय लोगों को भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।

इस दोहरे मोर्चे पर जारी घटनाक्रम पर सत्ता पक्ष, विपक्ष और प्रदर्शनकारियों के नेताओं के बयान सामने आए हैं:

विपक्ष का रुख: मुख्य विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि जो आवाज जंतर-मंतर पर गूंज रही है, उसे वे संसद के भीतर भी उठाएंगे। विपक्ष ने सरकार पर जनता की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया और स्थगन प्रस्ताव लाने की बात कही।

सरकार का पक्ष: संसदीय कार्य मंत्रालय और सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया कि सरकार नियमों के तहत हर तार्किक और सकारात्मक मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि संसद सत्र को सुचारू रूप से चलाने में व्यवधान नहीं डाला जाना चाहिए और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।

आंदोलनकारियों का बयान: संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "संसद सत्र देश की नीति तय करने का समय है, इसलिए हम सरकार को चेताने आए हैं कि देश की जनता की बुनियादी मांगों को बजट और विधायी कार्यों में प्राथमिकता दी जाए।"

संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर पर हुए इस भारी विरोध प्रदर्शन का व्यापक असर देखने को मिल रहा है:

संसदीय कार्यवाही पर असर: संसद के भीतर भी विपक्षी सांसदों ने जंतर-मंतर पर उठ रहे मुद्दों को लेकर नारेबाजी की, जिससे पहले दिन ही सदन की कार्यवाही में बार-बार व्यवधान उत्पन्न हुआ।

प्रशासनिक सतर्कता: दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों को खुद जमीन पर उतरकर स्थिति का जायजा लेना पड़ा है। खुफिया एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि कोई शरारती तत्व स्थिति का फायदा न उठा सके।

जनता की परेशानी: मध्य दिल्ली में आने-जाने वाले दैनिक यात्रियों को डायवर्जन के कारण काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

चूंकि मॉनसून सत्र अगले कुछ हफ्तों तक चलने वाला है, इसलिए जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों का सिलसिला थमने के आसार नहीं हैं। आने वाले दिनों में कई बड़े संगठनों ने 'संसद मार्च' का आह्वान भी कर रखा है। दिल्ली पुलिस और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन प्रदर्शनों को शांतिपूर्ण बनाए रखने और नई दिल्ली क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य रखने की होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद का कोई रास्ता नहीं निकलता, तो यह राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और उग्र रूप ले सकता है।

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