Commonwealth Games 2026: पैरा एथलेटिक्स में भारत का जलवा, दिलीप ने जीता गोल्ड और बासिल को मिला सिल्वर

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 के 7वें दिन भारत के दिलीप महादु गावित ने गोल्ड और मोहम्मद बासिल ने सिल्वर मेडल जीतकर नया इतिहास रच दिया है।

Jul 30, 2026 - 10:53
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Commonwealth Games 2026: पैरा एथलेटिक्स में भारत का जलवा, दिलीप ने जीता गोल्ड और बासिल को मिला सिल्वर
Commonwealth Games 2026 Dilip Mahadu Gavit Gold
  • ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026: 100 मीटर स्पर्धा में भारत का ऐतिहासिक कब्जा, एक साथ जीते स्वर्ण और रजत पदक
  • ग्लासगो में बजा भारत का डंका! पैरा एथलेटिक्स 100m रेस में दिलीप महादु ने जीता गोल्ड, बासिल ने कब्जाया सिल्वर
  • CWG 2026 Day 7: पैरा एथलेटिक्स में भारत की ऐतिहासिक डबल जीत, दिलीप महादु गावित ने जीता स्वर्ण पदक

स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में आयोजित किए जा रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 (Commonwealth Games 2026) का 7वां दिन भारत के लिए ऐतिहासिक और बेहद गौरवशाली साबित हुआ। पैरा एथलेटिक्स में पुरुषों की 100 मीटर टी47 (T47) फाइनल स्पर्धा में भारतीय धावकों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण और रजत, दोनों ही शीर्ष पदकों पर अपना कब्जा जमा लिया। भारत के स्टार पैरा एथलीट दिलीप महादु गावित ने 10.71 सेकेंड का समय निकालते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया, जबकि उनके हमवतन मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ ने 10.83 सेकेंड में रेस पूरी कर सिल्वर मेडल जीता। इस दोहरे धमाके के साथ भारत के खाते में कुल स्वर्ण पदकों की संख्या तीन हो गई है, वहीं कुल पदकों की संख्या 15 तक पहुंच चुकी है। आगामी प्रतियोगिताओं को देखते हुए भारत के मेडल तालिका में और इजाफा होना तय माना जा रहा है।

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 के सातवें दिन भारतीय दल ने अब तक का सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन दर्ज किया। पैरा एथलेटिक्स की 100 मीटर टी47 रेस में भारतीय स्प्रिंटर्स का पूरी तरह से दबदबा देखने को मिला। मुख्य आकर्षण यह रहा कि फाइनल मुकाबले में पहले और दूसरे दोनों ही स्थानों पर भारतीय एथलीटों ने तिरंगा फहराया। दिलीप महादु गावित की रफ्तार के सामने विपक्षी धावक टिक नहीं सके और वे पहले स्थान पर रहे, जबकि मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ ने थोड़ी ही दूरी से पिछड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया।

ट्रैक एंड फील्ड इवेंट्स के तहत आयोजित पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में जब दोनों भारतीय एथलीट ट्रैक पर उतरे, तो उनसे पोडियम फिनिश की उम्मीदें थीं। रेस की शुरुआत होते ही दिलीप महादु गावित ने अपनी शुरुआती गति से ही बढ़त बना ली और अंत तक अपनी स्पीड बरकरार रखी। दिलीप ने 10.71 सेकेंड का समय निकालते हुए पहला स्थान प्राप्त किया और भारत के लिए स्वर्ण पदक पक्का किया।

इसी मुकाबले में मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ ने भी शानदार फिनिशिंग दी। उन्होंने 10.83 सेकेंड के समय के साथ दूसरा स्थान हासिल किया और सिल्वर मेडल अपने नाम किया। एक ही स्पर्धा में दो भारतीय धावकों का शीर्ष दो स्थानों पर कब्जा जमाना ग्लासगो में मौजूद भारतीय प्रशंसकों के लिए सबसे बड़ा जश्न का क्षण बन गया। इस दोहरी जीत के साथ भारत की कुल पदक तालिका में अब 3 गोल्ड मेडल और कुल 15 पदक शामिल हो चुके हैं।

ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद स्वर्ण पदक विजेता दिलीप महादु गावित ने कहा कि देश के लिए राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड मेडल जीतना उनके करियर का सबसे बड़ा सपना था। उन्होंने अपने कोचिंग स्टाफ और भारतवासियों के निरंतर समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।

वहीं, रजत पदक जीतने वाले मोहम्मद बासिल ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पोडियम पर एक साथ दो भारतीय झंडों को लहराते देखना बेहद गर्व का क्षण था। भारतीय एथलेटिक्स महासंघ और खेल मंत्रालय की ओर से भी दोनों एथलीटों को इस शानदार सफलता पर बधाई संदेश भेजे गए हैं। खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों का मानना है कि पैरा एथलेटिक्स में भारत का यह प्रदर्शन देश में पैरा खेलों के बढ़ते स्तर को दर्शाता है।

इस दोहरी सफलता का सीधा असर ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों की ओवरऑल मेडल तालिका (Medal Tally) पर पड़ा है। भारत न केवल तालिका में ऊपर आया है, बल्कि पदक जीतने की लय भी तेज हुई है। पैरा एथलेटिक्स में मिली यह शानदार कामयाबी दल के अन्य एथलीटों के मनोबल को बढ़ाने में काफी मददगार साबित होगी।

इसके अलावा, भारत में पैरा-स्पोर्ट्स के बुनियादी ढांचे और एथलीटों की कड़ी मेहनत पर दुनिया का ध्यान आकर्षित हुआ है। टोक्यो और पेरिस पैरालिंपिक के बाद राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय पैरा धावकों के इस दमदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि भारत अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स मंचों पर एक बड़ी ताकत बन चुका है।

राष्ट्रमंडल खेल 2026 के आगामी दिनों में भारत के कई अन्य प्रमुख दल अपनी-अपनी स्पर्धाओं में उतरने वाले हैं। बैडमिंटन, कुश्ती, मुक्केबाजी और एथलेटिक्स की अन्य स्पर्धाओं में भी भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद की जा रही है। 15 पदकों के आंकड़े पर पहुंचने के बाद अब भारतीय दल की नजरें कुल पदकों की संख्या को और आगे ले जाने और स्वर्ण पदकों की गिनती में बढ़ोतरी करने पर टिकी हैं।

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