पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में जहरीली शराब का तांडव, अब तक 15 लोगों ने गंवाई जान, कई अस्पतालों में भर्ती।

महाराष्ट्र के पुणे और उससे सटे पिंपरी-चिंचवड़ औद्योगिक क्षेत्र में अवैध और मिलावटी शराब के सेवन से भारी त्रासदी सामने

May 30, 2026 - 12:16
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पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में जहरीली शराब का तांडव, अब तक 15 लोगों ने गंवाई जान, कई अस्पतालों में भर्ती।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में जहरीली शराब का तांडव, अब तक 15 लोगों ने गंवाई जान, कई अस्पतालों में भर्ती।
  • अवैध शराब सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस और आबकारी विभाग का महाअभियान, मुख्य सप्लायर सहित आठ आरोपी गिरफ्तार
  • प्रशासनिक सुस्ती पर भड़का जनता का आक्रोश, मुख्यमंत्री ने दिए उच्च स्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई के कड़े निर्देश

महाराष्ट्र के पुणे और उससे सटे पिंपरी-चिंचवड़ औद्योगिक क्षेत्र में अवैध और मिलावटी शराब के सेवन से भारी त्रासदी सामने आई है। पिछले अड़तालीस घंटों के भीतर संदिग्ध जहरीली शराब पीने के कारण कम से कम 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। इस भीषण कांड के सामने आने के बाद समूचे पुणे संभाग के प्रशासनिक अमले और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग की टीमों को प्रभावित बस्तियों में भेजा गया है, वहीं पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमों ने अवैध शराब के ठिकानों पर व्यापक छापेमारी शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में पनप रहे अवैध शराब के खतरनाक नेटवर्क को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह दर्दनाक सिलसिला पुणे के हडपसर इलाके के पांढरे मला और काले पडल के साथ-साथ पिंपरी-चिंचवड़ के फुगेवाड़ी और दापोडी जैसी घनी आबादी वाली बस्तियों में शुरू हुआ। घटना की शुरुआत बुधवार को हुई जब कुछ स्थानीय मजदूरों और कामगारों ने एक स्थानीय गुप्त ठिकाने से खरीदी गई देसी शराब का सेवन किया था। शराब पीने के कुछ ही घंटों बाद लोगों को पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टियां, चक्कर आना और आंखों के सामने पूरी तरह धुंधलापन छा जाने जैसी गंभीर शिकायतें होने लगीं। जब तक प्रभावित लोगों के परिजन कुछ समझ पाते और उन्हें नजदीकी चिकित्सालयों में भर्ती कराते, तब तक कई लोगों ने दम तोड़ दिया था। मौतों का यह आंकड़ा देखते ही देखते बढ़ गया, जिससे प्रभावित इलाकों में कोहराम मच गया और कई घरों में एक साथ मातम छा गया।

चिकित्सीय सूत्रों और प्राथमिक फोरेंसिक जांच से जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उनके अनुसार इस अवैध शराब में भारी मात्रा में मेथेनॉल मिलाए जाने की तीव्र आशंका है। मेथेनॉल एक बेहद खतरनाक और औद्योगिक रूप से उपयोग किया जाने वाला केमिकल है, जिसे शराब की तीव्रता बढ़ाने के लिए अक्सर मिलावटी धंधेबाजों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है, जो मानव शरीर के अंगों को तुरंत पूरी तरह निष्क्रिय कर देता है। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों के शरीर में इस घातक केमिकल के लक्षण साफ दिखाई दे रहे हैं और कई मरीजों के बचने की संभावना बेहद कम है क्योंकि उनका लिवर और किडनी बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। पुलिस प्रशासन ने मौतों के सटीक वैज्ञानिक कारणों का पता लगाने के लिए शवों का पोस्टमार्टम कराया है और शराब के नमूनों को रासायनिक विश्लेषण के लिए फोरेंसिक साइंस लैब भेज दिया है। जहरीली शराब के कारण सबसे ज्यादा मौतें पिंपरी-चिंचवड़ के फुगेवाड़ी और दापोडी गांवों में दर्ज की गई हैं, जहां अब तक आठ लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा पुणे शहर के हडपसर और काले पडल क्षेत्रों में भी सात अन्य लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

इस बड़े घटनाक्रम के बाद राज्य सरकार पूरी तरह से हरकत में आ गई है और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की कवायद शुरू हो चुकी है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे मामले को अत्यंत संवेदनशील और गंभीर बताते हुए तुरंत एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। मुख्यमंत्री ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के पुलिस आयुक्तों को आपसी समन्वय के साथ इस पूरे अवैध नेटवर्क को ध्वस्त करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। सरकार की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि इस धंधे के पीछे सक्रिय पूरे इकोसिस्टम को चिन्हित कर लिया गया है और इसमें शामिल किसी भी बड़े से बड़े अपराधी या लापरवाही बरतने वाले स्थानीय अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। गृह विभाग और आबकारी विभाग को इस मामले पर चौबीस घंटे के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।

कानूनी कार्रवाई के मोर्चे पर पुलिस और आबकारी विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए अब तक आठ प्रमुख आरोपियों को दबोच लिया है। पुलिस ने इस पूरे अवैध रैकेट के मुख्य सूत्रधार और सप्लायर योगेश वानखेड़े को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है, जिसके खिलाफ पहले भी अवैध शराब की तस्करी के कई मामले दर्ज हैं। शुरुआती पूछताछ में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपी ने बिना किसी वैध अनुमति के मुंबई से भारी मात्रा में इथेनॉल और मेथेनॉल जैसी सामग्री मंगवाई थी। इसके बाद उसने हडपसर के एक गोपनीय ठिकाने पर बेहद असुरक्षित और जानलेवा तरीके से शराब का मिश्रण तैयार किया और इसे अपने चार स्थानीय खुदरा विक्रेताओं के माध्यम से विभिन्न श्रमिक बस्तियों में खपा दिया। पुलिस अब इस बात की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है कि इस धंधे में और कौन से सफेदपोश लोग पर्दे के पीछे से मदद कर रहे थे।

इस भीषण त्रासदी के बाद स्थानीय नागरिकों और विपक्षी दलों में भारी आक्रोश और असंतोष देखा जा रहा है। जनसामान्य का आरोप है कि इन इलाकों में लंबे समय से हाथभट्टी और मिलावटी शराब का धंधा धड़ल्ले से फल-फूल रहा था, जिसकी शिकायतें समय-समय पर स्थानीय पुलिस और आबकारी चौकियों को दी गई थीं। नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन ने इन शिकायतों को नजरअंदाज न किया होता और समय रहते कठोर दंडात्मक कदम उठाए होते, तो आज इतने परिवारों के चिराग नहीं बुझते। कई स्थानों पर आक्रोशित प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने अवैध शराब बेचने वाली दुकानों और संदिग्ध ठिकानों पर तोड़फोड़ भी की, जिसके बाद कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को प्रभावित बस्तियों में अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा है।

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