गोंडा में नशे के सौदागरों पर पुलिस का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार, भट्टी में स्वाहा हुआ 41 करोड़ से अधिक का मादक पदार्थ।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से नशे के अवैध कारोबार और ड्रग माफियाओं के खिलाफ एक बेहद बड़ी और अभूतपूर्व प्रशासनिक कार्रवाई

May 30, 2026 - 11:39
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गोंडा में नशे के सौदागरों पर पुलिस का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार, भट्टी में स्वाहा हुआ 41 करोड़ से अधिक का मादक पदार्थ।
गोंडा में नशे के सौदागरों पर पुलिस का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार, भट्टी में स्वाहा हुआ 41 करोड़ से अधिक का मादक पदार्थ।
  • 'ऑपरेशन दहन' के तहत 15 क्विंटल से अधिक नशीली सामग्री को किया गया नष्ट, जिले के 898 मुकदमों से जुड़ा था जखीरा
  • सुरक्षा और पर्यावरण मानकों का पालन करते हुए चीनी मिल के इंसीनरेटर में फूंका गया जहर, प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से नशे के अवैध कारोबार और ड्रग माफियाओं के खिलाफ एक बेहद बड़ी और अभूतपूर्व प्रशासनिक कार्रवाई की खबर सामने आई है। जिला पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने मिलकर 'ऑपरेशन दहन' के तहत एक व्यापक अभियान चलाया, जिसके अंतर्गत भारी मात्रा में जब्त किए गए मादक पदार्थों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया। इस अभियान के दौरान गांजा, चरस, हेरोइन, स्मैक और कोकीन जैसे जानलेवा नशीले पदार्थों के एक विशाल जखीरे को पूरी तरह से जलाकर स्वाहा कर दिया गया। यह वह घातक नशा था, जो समाज के युवाओं और हजारों जिंदगियों को पूरी तरह से बर्बाद कर सकता था। इस पूरी विनष्टीकरण प्रक्रिया को बेहद गोपनीय और सुरक्षित तरीके से अंजाम दिया गया, जिसने क्षेत्र के नशे के सौदागरों की रीढ़ तोड़कर रख दी है।

इस बड़े विनष्टीकरण अभियान के तहत नष्ट किए गए मादक पदार्थों की कुल मात्रा और उनकी आर्थिक कीमत बेहद चौंकाने वाली है। आधिकारिक रूप से साझा की गई जानकारी के अनुसार, पुलिस ने कुल 15 क्विंटल (1500 किलोग्राम) से भी अधिक वजन की नशीली सामग्री को आग के हवाले किया है। अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में इस पूरे जखीरे की अनुमानित कीमत लगभग 41 करोड़ 60 लाख रुपये आंकी गई है। यह कोई एक या दो दिन की बरामदगी नहीं थी, बल्कि लंबे समय से जिले के अलग-अलग थानों की पुलिस द्वारा विभिन्न तस्करों और तस्कर गिरोहों के पास से जब्त की गई सामग्री थी। इस विशाल मात्रा को एक साथ नष्ट करके प्रशासन ने यह साफ संदेश दिया है कि अवैध मादक पदार्थों के व्यापार को लेकर किसी भी स्तर पर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

इस ऐतिहासिक कार्रवाई की पृष्ठभूमि और कानूनी प्रक्रियाओं पर दृष्टि डालें तो यह पूरा जखीरा जिले के विभिन्न थानों में दर्ज कुल 898 आपराधिक मामलों से संबंधित था। इन सभी मामलों में न्यायालयी प्रक्रियाओं और विधिक औपचारिकताओं को पूरा कर लिया गया था। एनडीपीएस अधिनियम (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट) के कड़े प्रावधानों और नियमों के तहत गठित की गई एक उच्च स्तरीय ड्रग डिस्पोजल कमेटी के निरीक्षण और मंजूरी के बाद ही इस विनष्टीकरण को अंतिम रूप दिया गया। न्यायालय से हरी झंडी मिलने के बाद मालखानों में वर्षों से जमा इस जानलेवा सामग्री को पूरी सुरक्षा के बीच बाहर निकाला गया और कड़ी निगरानी में मिल परिसर तक पहुंचाया गया।

नष्ट किए गए मादक पदार्थों का विवरण

गांजा: 1285.7 किलोग्राम (सबसे अधिक मात्रा)

चरस: 52.57 किलोग्राम

डोडा: 95.71 किलोग्राम

स्मैक: 6.1186 किलोग्राम

हेरोइन: 0.1136 किलोग्राम

अपीम और कोकीन: क्रमशः 0.878 किलोग्राम एवं 0.045 किलोग्राम

मादक पदार्थों को नष्ट करने के लिए चुने गए स्थान और उसकी वैज्ञानिक पद्धति का भी विशेष महत्व रहा। इस पूरे जखीरे को खुले में जलाने के बजाय गोंडा जिले में स्थित एक चीनी मिल के पावर प्लांट की धधकती भट्टी (इंसीनरेटर) में झोंका गया। खुले में नशीले पदार्थों को जलाने से पर्यावरण और आस-पास रहने वाली जनता के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता था, इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कड़े दिशा-निर्देशों का पालन किया गया। चीनी मिल के आधुनिक इंसीनरेटर में लगे एयर पॉल्यूशन कंट्रोल सिस्टम की मदद से बेहद उच्च तापमान पर इस जहरीली सामग्री को बिना किसी वायु प्रदूषण के पूरी तरह से भस्म कर दिया गया।

इस पूरी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान मौके पर प्रशासनिक और पुलिस महकमे के कई आला अधिकारी व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। सुरक्षा के दृष्टिकोण से पूरी मिल परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था और अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। ड्रग डिस्पोजल कमेटी के सदस्यों की उपस्थिति में एक-एक पैकेट का वजन और मिलान किया गया, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। इस विनष्टीकरण की पूरी प्रक्रिया की बाकायदा वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई गई, ताकि इसे विधिक साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखा जा सके। अधिकारियों के अनुसार, नशे के खिलाफ इस तरह की बड़ी कार्रवाई से पुलिस मालखानों में जगह भी खाली हुई है।

'ऑपरेशन दहन' दरअसल पूरे उत्तर प्रदेश में नशे के सौदागरों और ड्रग सिंडिकेट को समूल नष्ट करने के लिए चलाया जा रहा एक व्यापक प्रांतीय अभियान है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के निर्देशों पर एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से इस मुहिम को आगे बढ़ा रही हैं। गोंडा में हुई यह कार्रवाई इसी प्रदेशव्यापी अभियान की एक महत्वपूर्ण और बड़ी कड़ी है। इस अभियान का प्राथमिक उद्देश्य केवल अपराधियों को जेल भेजना ही नहीं है, बल्कि उनके द्वारा फैलाए गए जाल और जब्त की गई अवैध सामग्री का पूरी तरह से वैज्ञानिक निस्तारण करना है ताकि समाज को इस अभिशाप से पूरी तरह से मुक्त कराया जा सके।

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