अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में विशेष जांच दल के गठन के बाद ट्रस्ट का पहला आधिकारिक रुख, पारदर्शी मूल्यांकन का दिया भरोसा

उत्तर प्रदेश के अयोध्या धाम में स्थित भव्य और ऐतिहासिक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले

Jun 15, 2026 - 11:01
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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में विशेष जांच दल के गठन के बाद ट्रस्ट का पहला आधिकारिक रुख, पारदर्शी मूल्यांकन का दिया भरोसा
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में विशेष जांच दल के गठन के बाद ट्रस्ट का पहला आधिकारिक रुख, पारदर्शी मूल्यांकन का दिया भरोसा
  • करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए सामाजिक अफवाहों पर विराम लगाने के उद्देश्य से निष्पक्ष जांच का किया स्वागत
  • पवित्र धाम की वित्तीय व्यवस्थाओं को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच जांच के पक्ष में उतरा प्रबंधन, सभी कानूनी प्रक्रियाओं में सहयोग देने की बात दोहराई

उत्तर प्रदेश के अयोध्या धाम में स्थित भव्य और ऐतिहासिक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले चढ़ावे और दान राशि को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी विवाद एक नए और गंभीर कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। इस पूरे मामले की कड़ियों को सुलझाने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया गया है। इस विशेष जांच प्रक्रिया के विधिवत धरातल पर उतरने और टीम के अयोध्या पहुंचने से ठीक पहले, पूरे प्रबंधन तंत्र को संभालने वाले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा आधिकारिक वक्तव्य जारी किया गया है। इस बयान के माध्यम से प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि वे इस जांच के लिए पूरी तरह से तैयार हैं और जांच टीम द्वारा पूछे जाने वाले हर एक तकनीकी और प्रशासनिक सवाल का अत्यंत प्रामाणिक व तथ्यात्मक जवाब दिया जाएगा, जिससे पूरे मामले की पारदर्शिता सबके सामने आ सके।

इस बड़े विवाद की शुरुआत की कड़ियों को टटोलें तो पता चलता है कि हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और विभिन्न राजनीतिक मंचों पर मंदिर के दानपात्रों से भारी मात्रा में नकदी और चढ़ावे की चोरी होने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों के सार्वजनिक होने के बाद से ही देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों और राम भक्तों की आस्था को गहरा धक्का लगा था, जिससे इस मामले ने तुरंत एक बड़ा राष्ट्रीय रूप ले लिया। मामले की संवेदनशीलता और जनभावनाओं से जुड़े होने के कारण, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों पर तत्काल प्रभाव से तीन सदस्यीय विशेष जांच दल की घोषणा की गई। इस जांच दल में प्रशासनिक, पुलिस और वित्तीय मामलों के शीर्ष और सबसे अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिन्हें इस पूरे कथित वित्तीय हेरफेर के मनी ट्रेल को खंगालने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ट्रस्ट की ओर से जारी किए गए इस नए और विस्तृत स्पष्टीकरण में यह बात प्रमुखता से कही गई है कि उन्होंने स्वयं ही राज्य के शीर्ष नेतृत्व से इस पूरे प्रकरण की एक अत्यंत निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने का औपचारिक लिखित आग्रह किया था। प्रबंधन का यह स्पष्ट मत है कि जब तक किसी स्वतंत्र और सरकारी जांच एजेंसी द्वारा पूरे वित्तीय रिकॉर्ड्स का गहन मूल्यांकन नहीं किया जाता, तब तक सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों पर फैलाई जा रही भ्रामक और नकारात्मक अफवाहों पर पूरी तरह से पूर्णविराम लगाना संभव नहीं होगा। इस आधिकारिक कदम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि मंदिर की संपूर्ण दान और वित्तीय प्रबंधन प्रणाली पूरी तरह से सुरक्षित है और वे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका को पूरी तरह से दूर करने के लिए कानून का पूरा सहयोग करने के लिए कटिबद्ध हैं। तीन सदस्यीय इस विशेष जांच दल (SIT) की कमान लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत (2004 बैच के आईएएस अधिकारी) को सौंपी गई है, जबकि उनके साथ लखनऊ रेंज की पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को सदस्य बनाया गया है। इस उच्च स्तरीय कमेटी को सात दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट और पंद्रह दिनों के भीतर अंतिम विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने का कड़ा निर्देश दिया गया है।

वित्तीय अनियमितताओं और कथित चढ़ावा चोरी के इन आरोपों की गंभीरता उस समय और अधिक बढ़ गई जब मंदिर के ही एक पूर्व आंतरिक वित्तीय और लेखा अधिकारी द्वारा एक सनसनीखेज दावा किया गया, जिसमें उन्होंने पूर्व में भी कुछ कर्मचारियों द्वारा लाखों रुपये की नकदी की कथित चोरी पकड़े जाने की बात कही थी। इसके साथ ही, कुछ संदिग्धों के परिसरों और बैंक खातों से कुछ लाख रुपये की तात्कालिक रिकवरी की खबरों ने भी इस पूरे मामले को हवा देने का काम किया। इन तमाम आंतरिक और बाहरी दावों के सामने आने के बाद, पूरे मंदिर परिसर की सुरक्षा, कैश काउंटिंग रूम की निगरानी व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरों के फुटेज के रखरखाव को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े होने लगे थे, जिनका वैज्ञानिक और दस्तावेजी समाधान ढूंढना अब इस नवगठित एसआईटी टीम का प्राथमिक उद्देश्य बन चुका है।

इस पूरे गंभीर प्रकरण के बाद अयोध्या धाम के संतों, महंतों और विभिन्न धार्मिक संगठनों के भीतर भी वैचारिक मतभेद और गहरी चिंता की लहर देखी जा रही है, जहां सभी प्रमुख धर्माचार्य इस पावन स्थल की पवित्रता और वित्तीय शुचिता को हर हाल में बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी अयोध्या के अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान इस प्रशासनिक कदम की सराहना करते हुए कहा कि इतनी त्वरित कार्रवाई से दूध का दूध और पानी का पानी होना पूरी तरह तय है, जिससे जनमानस का भरोसा और मजबूत होगा। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी इस पूरे वित्तीय विवाद का स्वतः संज्ञान लेते हुए ट्रस्ट से भगवान राम के नवीन भव्य मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से लेकर अब तक प्राप्त हुए कुल चढ़ावे, दान राशि के मिलान और डिजिटल ऑडिटिंग सिस्टम को लेकर एक विस्तृत और व्यापक रिपोर्ट तलब की है।

तकनीकी और व्यावहारिक धरातल पर देखें तो प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद से अयोध्या राम मंदिर में प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं, जिसके कारण दानपात्रों में प्रतिदिन करोड़ों रुपये की नकदी, चेक, विदेशी मुद्रा के साथ-साथ भारी मात्रा में सोना, चांदी और अन्य कीमती आभूषण जमा हो रहे हैं। इस विशाल धनराशि की दैनिक गिनती के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के विशेष अधिकारियों और कंप्यूटरीकृत प्रणालियों की मदद ली जाती है, जिसे एक अत्यधिक सुरक्षित और कैमरों से लैस कक्ष में अंजाम दिया जाता है। एसआईटी की टीम जल्द ही अयोध्या पहुंचकर इस पूरी गिनती प्रक्रिया के मैनुअल, डिजिटल कैश बुक, सीसीटीवी फुटेज के बैकअप और बैंक में जमा की गई रसीदों का मिलान वर्ष 2024 के शुरुआती महीनों से लेकर अब तक के डेटा से करेगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तविक संकलन और बैंक प्रविष्टियों के बीच कोई विसंगति मौजूद है या नहीं।

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