छोटे निवेशकों ने दिखाया बड़ा दम: मार्च में इक्विटी फंड्स में 56% का उछाल, रू.40,450 करोड़ की ऐतिहासिक पूंजी आई।

भारतीय शेयर बाजार में मार्च 2026 के दौरान मची भारी उथल-पुथल के बावजूद घरेलू निवेशकों ने म्यूचुअल फंड पर अपने भरोसे को और अधिक

Apr 11, 2026 - 12:52
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छोटे निवेशकों ने दिखाया बड़ा दम: मार्च में इक्विटी फंड्स में 56% का उछाल, रू.40,450 करोड़ की ऐतिहासिक पूंजी आई।
छोटे निवेशकों ने दिखाया बड़ा दम: मार्च में इक्विटी फंड्स में 56% का उछाल, रू.40,450 करोड़ की ऐतिहासिक पूंजी आई।
  • भारतीय निवेशकों का अटूट विश्वास: बाजार की मंदी में भी म्यूचुअल फंड में निवेश का बना नया कीर्तिमान
  • एसआईपी (SIP) के भरोसे आम आदमी ने जीता बाजार: उतार-चढ़ाव के बीच रू.32,100 करोड़ के मासिक योगदान का रचा इतिहास

भारतीय शेयर बाजार में मार्च 2026 के दौरान मची भारी उथल-पुथल के बावजूद घरेलू निवेशकों ने म्यूचुअल फंड पर अपने भरोसे को और अधिक मजबूती के साथ पेश किया है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, मार्च के महीने में इक्विटी म्यूचुअल फंड में होने वाला निवेश फरवरी की तुलना में 56 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ रू.40,450.26 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा न केवल पिछले महीने के रू.25,977.91 करोड़ से काफी अधिक है, बल्कि यह पिछले आठ महीनों में निवेश का सबसे उच्चतम स्तर भी है। बाजार में छाई अस्थिरता के बीच निवेशकों के इस कदम ने यह साबित कर दिया है कि अब भारतीय खुदरा निवेशक बाजार की गिरावट को घबराहट के बजाय 'खरीदारी के अवसर' के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च महीने में सेंसेक्स और निफ्टी में देखी गई लगभग 11 प्रतिशत की गिरावट ने निवेशकों के लिए वैल्युएशन को आकर्षक बना दिया था। इसी का परिणाम रहा कि निवेशकों ने बाजार में गिरावट का फायदा उठाते हुए 'बाय द डिप' (गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति अपनाई। विशेष रूप से फ्लेक्सी-कैप, स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स में निवेशकों की रुचि सबसे अधिक रही। फ्लेक्सी-कैप फंड्स इस महीने रू.10,054 करोड़ के शुद्ध निवेश के साथ सबसे लोकप्रिय श्रेणी बनकर उभरे। यह पहली बार है जब किसी एक महीने में इस श्रेणी ने इतना बड़ा निवेश आकर्षित किया है, जो निवेशकों की विविधीकरण (Diversification) की ओर बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

इस पूरे निवेश चक्र में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी (SIP) ने निभाई है। एसआईपी के प्रति बढ़ते रुझान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मार्च में एसआईपी योगदान पहली बार रू.32,000 करोड़ के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करते हुए रू.32,087 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। फरवरी में यह आंकड़ा रू.29,845 करोड़ था। एसआईपी खातों की संख्या भी बढ़कर 9.72 करोड़ हो गई है, जो यह दर्शाता है कि आम भारतीय परिवार अब अपनी बचत का एक बड़ा हिस्सा नियमित रूप से शेयर बाजार में लगाने के प्रति अनुशासित हो गया है। बाजार की उठापटक अब एसआईपी निवेशकों के इरादों को हिलाने में विफल साबित हो रही है।

  • मिड और स्मॉल कैप में भारी उत्साह

बाजार में मंदी के बावजूद मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में निवेशकों का उत्साह देखने लायक था। स्मॉल-कैप फंड्स में निवेश 61 प्रतिशत बढ़कर रू.6,264 करोड़ रहा, जबकि मिड-कैप फंड्स में रू.6,064 करोड़ का निवेश आया। निवेशकों ने इन श्रेणियों में आई हालिया गिरावट को एक निवेश अवसर के रूप में लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे लंबी अवधि के रिटर्न के लिए छोटे और मझोले शेयरों पर बड़ा दांव लगाने को तैयार हैं।

हालांकि, जहाँ एक तरफ इक्विटी फंड्स में रिकॉर्ड निवेश देखा गया, वहीं दूसरी तरफ म्यूचुअल फंड उद्योग के कुल 'एसेट्स अंडर मैनेजमेंट' (AUM) में गिरावट दर्ज की गई। मार्च के अंत तक कुल एयूएम घटकर रू.73.73 लाख करोड़ रह गया, जो फरवरी में रू.82.03 लाख करोड़ था। इस गिरावट का मुख्य कारण बाजार में आई भारी गिरावट और डेट फंड्स (Debt Funds) से होने वाली भारी निकासी थी। मार्च के महीने में कंपनियों द्वारा एडवांस टैक्स भुगतान और साल के अंत की जरूरतों के कारण डेट ओरिएंटेड स्कीमों से लगभग रू.2.95 लाख करोड़ की निकासी की गई। एयूएम में आई यह कमी निवेशकों के अविश्वास के कारण नहीं, बल्कि 'मार्क-टू-मार्केट' वैल्यूएशन में गिरावट और संस्थागत निकासी के कारण है। हाइब्रिड फंड्स और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) की बात करें तो यहाँ भी निवेशकों का व्यवहार काफी बदलता नजर आया। हाइब्रिड फंड्स से इस महीने रू.16,538 करोड़ की शुद्ध निकासी हुई, जबकि इंडेक्स फंड्स और अन्य ईटीएफ में निवेश लगभग चार गुना बढ़कर रू.19,802 करोड़ हो गया। सोने की बढ़ती कीमतों के बीच गोल्ड ईटीएफ में निवेश की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर हुई, लेकिन फिर भी रू.2,266 करोड़ का निवेश इस श्रेणी में आया। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि निवेशक अब पारंपरिक हाइब्रिड स्कीमों के मुकाबले पैसिव निवेश (Passive Investment) के साधनों को अधिक पसंद कर रहे हैं, जहाँ लागत कम और पारदर्शिता अधिक होती है।

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