राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप, जवाब में शपथ पत्र की मांग, कोलकाता में तीखी बहस।
Political: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद देश में एक नया सियासी विवाद शुरू हो गया है। राहुल गांधी...
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद देश में एक नया सियासी विवाद शुरू हो गया है। राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं कि चुनाव आयोग ने 2024 के लोकसभा और कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पक्ष में वोट चोरी कराई। इन आरोपों का जवाब देते हुए, चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से अपने दावों को शपथ पत्र के जरिए साबित करने की मांग की और उनके बयानों को आधारहीन और गैर-जिम्मेदाराना बताया। इस मुद्दे ने कोलकाता सहित पूरे देश में तीखी बहस छेड़ दी है, जिसकी चर्चा आज तक के लोकप्रिय कार्यक्रम हल्ला बोल में पत्रकार अंजना ओम कश्यप ने की। यह विवाद न केवल चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर भी बहस को जन्म दे रहा है।
राहुल गांधी ने 1 अगस्त 2025 को संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में और 8 अगस्त को बेंगलुरु में ‘वोट अधिकार रैली’ में अपने आरोपों को दोहराया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास ठोस सबूत हैं कि चुनाव आयोग ने कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्यों में वोटर लिस्ट में हेरफेर कर बीजेपी को फायदा पहुंचाया। खास तौर पर, उन्होंने कर्नाटक की महादेवपुरा विधानसभा सीट का उदाहरण दिया, जो बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। राहुल ने दावा किया कि उनके 40 शोधकर्ताओं की टीम ने छह महीने तक डेटा की जांच की और पाया कि महादेवपुरा में 1,00,250 फर्जी वोट डाले गए। इनमें 11,965 डुप्लिकेट वोटर, 40,009 फर्जी पते वाले वोटर, 10,452 एक ही पते पर असंभव संख्या में वोटर, 4,132 बिना फोटो वाले वोटर और 33,692 फॉर्म-6 के दुरुपयोग के मामले शामिल थे। उन्होंने एक उदाहरण दिया कि मुनि रेड्डी गार्डन में 10-15 वर्ग फीट के एक छोटे से मकान में 80 वोटर पंजीकृत थे, जो असंभव है।
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच एक करोड़ नए वोटर अचानक वोटर लिस्ट में जुड़ गए, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में बीजेपी के पक्ष में वोट डाले। उन्होंने हरियाणा में भी इसी तरह की अनियमितताओं का जिक्र किया, जहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच कुल मतों का अंतर केवल 22,779 था। राहुल ने कहा, “यह कोई छोटी-मोटी गलती नहीं है, बल्कि यह देश के लोकतंत्र पर हमला है। यह गद्दारी से कम नहीं है।” उन्होंने चुनाव आयोग के अधिकारियों को चेतावनी दी कि अगर विपक्ष भविष्य में सत्ता में आया, तो इस मामले में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे रिटायर हो चुके हों।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों का जवाब 1 और 8 अगस्त 2025 को दिए अपने बयानों में दिया। आयोग ने राहुल गांधी के दावों को “आधारहीन और गैर-जिम्मेदाराना” बताया और उनसे अपने सबूतों को शपथ पत्र के जरिए साबित करने की मांग की। आयोग ने कहा कि नियम 20 (3) (बी) के तहत, वोटर लिस्ट में अनियमितताओं का दावा करने वाले को विशिष्ट नाम और विवरण के साथ शपथ पत्र देना होता है। ऐसा न करने पर तीन साल तक की जेल हो सकती है। आयोग ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने कभी भी औपचारिक रूप से कोई शिकायत दर्ज नहीं की। 12 जून 2025 को आयोग ने उन्हें ईमेल और पत्र के जरिए अपनी शिकायतें साझा करने के लिए बुलाया था, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
चुनाव आयोग ने कर्नाटक के महादेवपुरा के मामले में कहा कि अगर कांग्रेस को वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का शक था, तो उनके उम्मीदवारों को 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद 45 दिनों के भीतर हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर करनी चाहिए थी। आयोग ने यह भी बताया कि एक लाख मतदान केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज की जांच में 273 साल लग सकते हैं, जो व्यावहारिक नहीं है। इसके अलावा, आयोग ने यह तर्क दिया कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार वोटर लिस्ट को अपनी जाति जनगणना के लिए इस्तेमाल कर रही है, फिर उसे फर्जी कैसे बता सकती है?
राहुल गांधी ने आयोग की शपथ पत्र की मांग का जवाब बेंगलुरु रैली में दिया। उन्होंने कहा, “मैंने संसद में संविधान की शपथ ली है। मेरे हर शब्द को शपथ के रूप में लिया जाना चाहिए। मुझे अलग से हलफनामा देने की जरूरत नहीं है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब जनता ने उनके डेटा पर सवाल उठाए, तो चुनाव आयोग ने अपनी वेबसाइट ही बंद कर दी। कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने भी राहुल के दावों का समर्थन करते हुए कहा कि वोट चोरी लोकतंत्र के लिए अभिशाप है और कांग्रेस जल्द ही अपने सबूत सार्वजनिक करेगी।
इस विवाद ने कोलकाता सहित पूरे देश में तीखी बहस छेड़ दी है। आज तक के कार्यक्रम हल्ला बोल में पत्रकार अंजना ओम कश्यप ने इस मुद्दे पर चर्चा की, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। चर्चा में राहुल गांधी के आरोपों और चुनाव आयोग के जवाब पर गहन विचार-विमर्श हुआ। कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि राहुल के आरोप गंभीर हैं और अगर सही हैं, तो यह भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा है। हालांकि, अन्य ने आयोग का पक्ष लेते हुए कहा कि बिना ठोस सबूत के इस तरह के दावे करना गलत है।
बीजेपी ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए इसे उनकी हताशा का नतीजा बताया। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, “राहुल गांधी केवल तभी चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हैं, जब उनकी पार्टी हारती है। जब वे हिमाचल प्रदेश या तेलंगाना में जीतते हैं, तब वे आयोग की तारीफ क्यों नहीं करते?” पात्रा ने यह भी कहा कि राहुल की भाषा “अलोकतांत्रिक और असम्मानजनक” है और उन्हें अपने दावों के लिए शपथ पत्र देना चाहिए या देश से माफी मांगनी चाहिए।
विपक्षी नेताओं ने राहुल के समर्थन में आवाज उठाई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि महादेवपुरा में 1,00,250 वोटों की चोरी हुई और यह पैटर्न कई अन्य जगहों पर भी दोहराया गया। शशि थरूर ने चुनाव आयोग से इन सवालों का जवाब देने की मांग की, जबकि शिवसेना (यूबीटी) के आदित्य ठाकरे और राजस्थान के नेता सचिन पायलट ने भी राहुल के दावों का समर्थन किया। 7 अगस्त को राहुल गांधी द्वारा आयोजित एक डिनर मीटिंग में 25 विपक्षी दलों के नेताओं ने उनके सबूतों को देखा और 11 अगस्त को चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च करने का फैसला किया।
इस विवाद ने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या राहुल गांधी अपने दावों को शपथ पत्र के जरिए साबित करेंगे? क्या उनके पास वाकई इतने ठोस सबूत हैं, जैसा कि वे दावा कर रहे हैं? अगर ये सबूत सही हैं, तो क्या यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है? या फिर यह केवल सियासी हथकंडा है, जैसा कि बीजेपी का कहना है? हल्ला बोल में अंजना ओम कश्यप ने इन सवालों पर चर्चा की और दर्शकों से पूछा कि क्या वे राहुल के दावों पर भरोसा करते हैं। कई दर्शकों ने सोशल मीडिया पर अपनी राय दी, जिसमें कुछ ने राहुल के साहस की तारीफ की, तो कुछ ने इसे राजनीतिक नौटंकी बताया।
चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट किया कि वह अपने काम में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखेगा। हालांकि, इस विवाद ने आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि आयोग को राहुल के आरोपों का विस्तृत जवाब देना चाहिए, ताकि जनता का भरोसा बना रहे। दूसरी ओर, आयोग का कहना है कि वह बिना सबूत के आरोपों पर ध्यान नहीं देगा और सभी अधिकारियों को निष्पक्ष काम करने के लिए कहा गया है।
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