उत्तर प्रदेश में महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट नियमों में बड़ा बदलाव: योगी सरकार ने शाम 7 से सुबह 6 बजे तक काम की अनुमति दी, डबल वेतन और सुरक्षा सुनिश्चित।
उत्तर प्रदेश सरकार ने कामकाजी महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए नाइट शिफ्ट के नियमों में व्यापक बदलाव किया है। अब राज्य की महिलाएं
उत्तर प्रदेश सरकार ने कामकाजी महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए नाइट शिफ्ट के नियमों में व्यापक बदलाव किया है। अब राज्य की महिलाएं अपनी सहमति से शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक फैक्ट्रियों और अन्य औद्योगिक इकाइयों में काम कर सकेंगी। यह बदलाव उत्तर प्रदेश फैक्ट्रीज संशोधन अधिनियम 2025 के तहत लागू हुआ है, जिसे अक्टूबर 2025 के पहले सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी थी। इसके बाद 12 नवंबर 2025 को गजट अधिसूचना जारी कर दी गई। पहले नियमों के अनुसार, महिलाओं को रात 9 बजे के बाद काम करने की मनाही थी, लेकिन अब समय सीमा को ज्यादा लचीला बनाकर शाम 7 बजे से शुरू करने की छूट दी गई है। यह कदम न केवल महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाएगा, बल्कि राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में भी मदद करेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया है।
यह फैसला उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति देगा। राज्य में फैक्ट्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन महिलाओं की सीमित भागीदारी एक बाधा बनी हुई थी। नए नियमों के तहत महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने के लिए लिखित सहमति देनी होगी, जो श्रम विभाग में पंजीकृत होगी। सहमति स्वैच्छिक होगी और किसी भी समय वापस ली जा सकेगी। सबसे बड़ी राहत यह है कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं को दोगुना वेतन मिलेगा। यानी सामान्य शिफ्ट के वेतन का दोगुना भुगतान अनिवार्य होगा। इसके अलावा, नियोक्ताओं को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे। फैक्ट्रियों में सीसीटीवी कैमरे लगाना जरूरी होगा, खासकर कार्यस्थल, पार्किंग और प्रवेश-निकास द्वारों पर। परिवहन सुविधा भी अनिवार्य है, जिसमें महिलाओं के लिए सुरक्षित वाहन उपलब्ध कराना शामिल है। इन वाहनों में सुरक्षा गार्ड तैनात रहेंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्राथमिक चिकित्सा किट और डॉक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
ये नियम 29 प्रकार की खतरनाक उद्योगों पर भी लागू होंगे, जहां पहले महिलाओं को काम करने की अनुमति नहीं थी। जैसे रसायन, धातु प्रसंस्करण और भारी मशीनरी वाले क्षेत्र। अब इनमें भी महिलाएं सहमति से नाइट शिफ्ट ले सकेंगी, बशर्ते सुरक्षा मानक पूरे हों। श्रम विभाग के अधिकारियों ने कहा कि नियमों का सख्ती से पालन होगा। उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होगी। यह बदलाव महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने में मदद करेगा। राज्य में लगभग 2 करोड़ महिलाएं कार्यबल का हिस्सा हैं, लेकिन नाइट शिफ्ट की कमी से कई अवसर छूट जाते थे। अब आईटी, टेक्सटाइल, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, इससे राज्य की जीडीपी में 5-7 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह फैसला महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि घर से कार्यस्थल तक हर स्तर पर सुरक्षा के इंतजाम होंगे। उत्तर प्रदेश में पहले से ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। जैसे 1090 महिला पावर लाइन, 112 हेल्पलाइन, 1694 एंटी-रोमियो स्क्वायड और सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत 9000 से ज्यादा महिला पुलिस बीट। राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दोषसिद्धि दर 71 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 18 प्रतिशत से कहीं ज्यादा है। यह जीरो टॉलरेंस नीति का परिणाम है। योगी सरकार ने पिछले सालों में महिलाओं के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे मिशन शक्ति, पिंक बूथ और लाड़ली बेटी योजना। नाइट शिफ्ट नियम इन प्रयासों का विस्तार हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह बदलाव औद्योगिक निवेश को आकर्षित करेगा, क्योंकि कंपनियां अब लचीली शिफ्ट चला सकेंगी।
नए नियमों में अन्य बदलाव भी शामिल हैं। महिलाएं अब सप्ताह में छह दिन तक नाइट शिफ्ट ले सकेंगी। पहले चार दिन की सीमा थी। ओवरटाइम की ऊपरी सीमा को 75 घंटे से बढ़ाकर प्रति तिमाही 144 घंटे कर दिया गया है। इससे महिलाओं को ज्यादा कमाई का मौका मिलेगा। लेकिन स्वास्थ्य पर असर न पड़े, इसके लिए वार्षिक मेडिकल चेकअप अनिवार्य होगा। नियोक्ताओं को शिफ्ट के अंत में महिलाओं को घर तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। अगर कोई घटना होती है, तो तुरंत रिपोर्टिंग सिस्टम काम करेगा। श्रम विभाग ने ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है, जहां महिलाएं अपनी सहमति दर्ज करा सकेंगी। यह पारदर्शिता बढ़ाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम लिंग समानता की दिशा में बड़ा है। लेकिन कार्यान्वयन पर नजर रखनी होगी, ताकि शोषण न हो।
यह फैसला निजी क्षेत्र की मांगों को पूरा करता है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ जैसे औद्योगिक हबों में कंपनियां महिलाओं की कमी महसूस कर रही थीं। अब वे नाइट शिफ्ट चला सकेंगी, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी। एक सर्वे के अनुसार, 60 प्रतिशत महिलाएं लचीली शिफ्ट चाहती हैं। यह बदलाव उन्हें घर-परिवार संतुलित करने में मदद करेगा। लेकिन कुछ संगठनों ने चिंता जताई है कि सुरक्षा के दावे कितने मजबूत होंगे। सरकार ने कहा कि मॉनिटरिंग सिस्टम से सब नियंत्रण में रहेगा। राज्य में पहले से 500 से ज्यादा फैक्ट्रियों में सीसीटीवी लगे हैं। अब सभी को अनिवार्य किया जाएगा। परिवहन के लिए जीएसआरटीसी जैसी बसें बढ़ाई जाएंगी। महिलाओं के लिए विशेष वाहन चलेंगे।
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। 2024-25 में जीएसडीपी 25 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुकी है। महिलाओं की भागीदारी से यह लक्ष्य जल्द हासिल होगा। केंद्र सरकार के श्रम कोड भी इसी दिशा में हैं। यूपी ने इसे जल्द लागू किया। विपक्ष ने स्वागत किया, लेकिन कहा कि ग्रामीण इलाकों में भी लागू हो। सपा नेता ने कहा कि यह अच्छा कदम है, लेकिन सुरक्षा पहले। भाजपा ने इसे अपनी उपलब्धि बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाएं राज्य की ताकत हैं। यह फैसला उन्हें नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। उद्योगपतियों ने सराहना की। एक एसोसिएशन ने कहा कि इससे रोजगार बढ़ेंगे। महिलाओं को ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शुरू होंगे।
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