यूपी सरकार का बड़ा कदम- ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के नाम पर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लिए छात्रवृत्ति योजना की घोषणा।
Politics: उत्तर प्रदेश सरकार ने 25 अगस्त 2025 को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और इसरो के गगनयात्री शुभांशु शुक्ला के नाम पर एक नई छात्रवृत्ति योजना शुरू करने की घोषणा की। यह
उत्तर प्रदेश सरकार ने 25 अगस्त 2025 को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और इसरो के गगनयात्री शुभांशु शुक्ला के नाम पर एक नई छात्रवृत्ति योजना शुरू करने की घोषणा की। यह योजना अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और संबंधित क्षेत्रों में पढ़ाई करने वाले मेधावी छात्रों को समर्थन देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के लोक भवन में आयोजित एक सम्मान समारोह में इस योजना का ऐलान किया। इस अवसर पर उन्होंने शुभांशु शुक्ला की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी अंतरिक्ष यात्रा ने न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। यह छात्रवृत्ति योजना युवाओं को अंतरिक्ष अनुसंधान और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। शुभांशु शुक्ला, जो लखनऊ के मूल निवासी हैं, हाल ही में नासा के एक्सियॉम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की 18 दिन की यात्रा पूरी करके लौटे हैं। वे 41 साल बाद अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने। इस मिशन में उन्होंने 60 से अधिक प्रयोग किए, जिनमें से सात भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा डिजाइन किए गए थे। उनकी इस उपलब्धि को देश और प्रदेश के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। लखनऊ पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी की, जहां बच्चे तिरंगा लहराते हुए और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाते हुए उनकी गगनयात्री जैकेट में मौजूद राष्ट्रीय ध्वज और इसरो के प्रतीक को देखकर उत्साहित थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन में आयोजित समारोह में शुभांशु को शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, और लखनऊ की मेयर सुषमा खरकवाल ने भी उनके परिवार को सम्मानित किया। समारोह में शुभांशु के मिशन पर आधारित एक छोटी फिल्म दिखाई गई, जिसमें उनके 18 दिन में पृथ्वी के 320 चक्कर लगाने की यात्रा को दर्शाया गया। योगी ने कहा, “शुभांशु शुक्ला का यह मिशन न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश और भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी अंतरिक्ष यात्रा हमें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में प्रगति करने की दिशा दिखाती है।” इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में अंतरिक्ष शिक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि चार साल पहले प्रदेश में कोई विश्वविद्यालय या संस्थान अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में डिग्री, डिप्लोमा, या सर्टिफिकेट कोर्स नहीं चलाता था। आज, गोरखपुर का मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (AKTU), और एक दर्जन से अधिक तकनीकी संस्थान इस क्षेत्र में पाठ्यक्रम शुरू कर चुके हैं। यह उत्तर प्रदेश की भारत के विकास में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। योगी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए हमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, और गणित (STEM) जैसे क्षेत्रों में युवाओं को प्रोत्साहित करना होगा।”
शुभांशु शुक्ला ने समारोह में अपनी अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष स्टेशन पर पहली बार पहुंचने पर सूक्ष्म गुरुत्व (माइक्रोग्रैविटी) के कारण शरीर में कई बदलाव महसूस होते हैं। “सारा खून सिर की ओर चला जाता है, जिससे सिर भारी हो जाता है। दिल को गुरुत्व के खिलाफ काम नहीं करना पड़ता, इसलिए उसकी गति धीमी हो जाती है। पेट की सामग्री तैरने लगती है, जिससे भूख का अहसास नहीं होता। अंतरिक्ष में जीवन को बनाए रखना एक चुनौती है, जहां वैक्यूम, अत्यधिक तापमान, और हवा की कमी होती है।” उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “यह भारत के लिए अंतरिक्ष अन्वेषण का सुनहरा दौर है। गगनयान मिशन, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, और 2040 तक चंद्रमा पर मानव मिशन के लिए आप तैयार रहें। मैं भी इस दौड़ में शामिल रहूंगा।” इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने भी समारोह में हिस्सा लिया और योगी सरकार की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की प्रगति अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है। उन्होंने बताया कि अगले तीन महीनों में इसरो 6,500 किलोग्राम वजनी एक अमेरिकी संचार उपग्रह को भारतीय रॉकेट से लॉन्च करेगा। “पिछले 10 वर्षों में हमने 34 देशों के 433 उपग्रह और 132 भारतीय उपग्रह लॉन्च किए हैं, जिनमें से 93 प्रतिशत पिछले दशक में लॉन्च हुए।” उन्होंने यह भी बताया कि एक्सियॉम-4 मिशन के दौरान इसरो की एक टीम ने नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर में एक तकनीकी खराबी को पकड़ा था, जिससे मिशन की सफलता सुनिश्चित हुई। शुभांशु शुक्ला का जन्म लखनऊ में हुआ था। उनके पिता शंभु दयाल शुक्ला एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी हैं, और उनकी माता आशा शुक्ला गृहिणी हैं। उन्होंने सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (CMS) में पढ़ाई की और 1999 के कारगिल युद्ध से प्रेरित होकर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की परीक्षा दी। 2005 में उन्होंने NDA से कंप्यूटर विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और भारतीय वायुसेना अकादमी में उड़ान प्रशिक्षण लिया। वे 2,000 घंटे से अधिक उड़ान अनुभव के साथ एक कुशल टेस्ट पायलट हैं और मिग-21, मिग-29, सुखोई-30 MKI जैसे विमानों को उड़ा चुके हैं। 2019 में उन्हें इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए चुना गया, और उन्होंने रूस के यूरी गगारिन कॉस्मोनॉट प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण लिया।
छात्रवृत्ति योजना की घोषणा के साथ, योगी सरकार ने राज्य के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग को शुभांशु के अनुभव का उपयोग करने का निर्देश दिया है। यह योजना उन छात्रों को वित्तीय सहायता देगी, जो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, और संबंधित क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं। हालांकि, योजना की राशि और पात्रता मानदंडों का अभी खुलासा नहीं हुआ है। यह योजना उत्तर प्रदेश के युवाओं को गगनयान मिशन और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसे भविष्य के मिशनों के लिए तैयार करने में मदद करेगी। सोशल मीडिया पर इस घोषणा को खूब सराहना मिली। एक X यूजर ने लिखा, “शुभांशु शुक्ला ने देश का नाम रोशन किया, और अब उनके नाम पर छात्रवृत्ति युवाओं को प्रेरित करेगी।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह योजना उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का क्षण है। योगी सरकार का यह कदम भविष्य के वैज्ञानिकों को बढ़ावा देगा।” शुभांशु ने अपने स्कूल CMS में बच्चों से बातचीत में कहा, “मैं सुबह थक गया था, लेकिन आप बच्चों को सड़कों पर उत्साह से देखकर मेरी थकान गायब हो गई। मेहनत और लगन से आप भी अंतरिक्ष में जा सकते हैं।” उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी कमना मिश्रा, जो एक डेंटिस्ट हैं, उनकी स्कूल की सहपाठी थीं। उनकी मजेदार टिप्पणी, “कमना को पहले से पता था कि मैं कामयाब होऊंगा,” ने बच्चों में खूब हंसी बिखेरी।
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