Maharashtra MPSC TET Paper Leak: अभिजीत दिपके का राज्य सरकार पर बड़ा हमला, कहा- शिक्षा व्यवस्था की किसी को परवाह नहीं

महाराष्ट्र में MPSC और TET पेपर लीक मामले पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अभिजीत दिपके ने राज्य सरकार पर छात्रों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी।

Jul 31, 2026 - 14:01
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Maharashtra MPSC TET Paper Leak: अभिजीत दिपके का राज्य सरकार पर बड़ा हमला, कहा- शिक्षा व्यवस्था की किसी को परवाह नहीं
Maharashtra MPSC TET Paper Leak
  • Abhijit Dipke Target BJP Government: महाराष्ट्र में MPSC और TET पेपर लीक पर भड़के अभिजीत दिपके, राज्यव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी
  • 'नेताओं के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं...': महाराष्ट्र में MPSC-TET पेपर लीक पर भड़के अभिजीत दिपके, दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
  • Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक पर राजनीति गर्म, अभिजीत दिपके ने सरकार को घेरा

महाराष्ट्र में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं के कथित पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को लेकर सियासी तापमान बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषक व कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने बृहस्पतिवार (30 जुलाई 2026) को मुंबई में सत्तापक्ष पर जोरदार जुबानी हमला बोला। उन्होंने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ नेताओं को राज्य के युवाओं और उनकी शिक्षा की कोई चिंता नहीं है। दिपके ने कहा कि नेताओं के बच्चे विदेश में पढ़ाई करते हैं, इसलिए उन्हें पुलिस भर्ती या TET देने वाले आम छात्रों के भविष्य से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरे महाराष्ट्र में एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा।
महाराष्ट्र में हाल के दिनों में MPSC, TET और पुलिस भर्ती जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के मामलों को लेकर युवाओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर अभिजीत दिपके ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान राज्य सरकार की नीतियों और मंशा पर कड़े सवाल खड़े किए।
उन्होंने तीखे तंज कसते हुए कहा कि चाहे सत्ता के शीर्ष पर बैठे कोई भी नेता हों, इनमें से किसी को भी आम छात्रों की शिक्षा और उनके करियर की कोई परवाह नहीं है। दिपके का दावा है कि राज्य का नेतृत्व प्रशासनिक सुधारों और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित करने के बजाय आगामी राजनीतिक समीकरणों और चुनावों की तैयारियों में व्यस्त है।
अभिजीत दिपके ने अपने वक्तव्य में महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था और लगातार सामने आ रहे भर्ती घोटालों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस संभवतः अभी से 2029 के आगामी विधानसभा चुनावों की गोटियां बिछाने में व्यस्त हैं, जिसके कारण MPSC और TET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में हो रही धांधली पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और सरकार में शामिल मंत्रियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सत्ताधारी नेताओं और बड़े अधिकारियों के बच्चे तो विदेशों के नामी संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं। उन्हें कभी पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती या MPSC की कठिन परीक्षाओं में बैठना नहीं पड़ता। यही वजह है कि जब किसी आम गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार के छात्र की परीक्षा का पेपर लीक होता है, तो इन नेताओं की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता।
दिपके ने स्पष्ट किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सालों बिताने वाले युवाओं का सब्र अब टूट रहा है। बार-बार परीक्षाएं रद्द होने या स्थगित होने से अभ्यर्थियों का मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है। उन्होंने घोषणा की कि युवाओं और छात्रों को उनका वाजिब हक दिलाने के लिए वे जल्द ही पूरे महाराष्ट्र में एक बड़ा और एकजुट आंदोलन खड़ा करेंगे।
अभिजीत दिपके के इस तीखे हमले के बाद महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। छात्र संगठनों और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों के संघों ने दिपके के रुख का समर्थन किया है। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाना सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भाजपा और सरकार के समर्थकों ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। सत्तापक्ष के प्रतिनिधियों का कहना है कि राज्य सरकार भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। किसी भी गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर तुरंत जांच के आदेश दिए जाते हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाती है।
महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक का मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। राज्य भर में लाखों युवा हर साल भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, ऐसे में इस तरह के बयान और प्रस्तावित आंदोलन युवाओं को लामबंद करने का काम कर सकते हैं।
इस राजनीतिक खींचतान के बीच सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वह आगामी सभी भर्ती परीक्षाओं में सुरक्षा चक्र को मजबूत करे और परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय करे, ताकि राज्य के युवाओं में भरोसा कायम किया जा सके।
अभिजीत दिपके द्वारा राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दिए जाने के बाद छात्र संगठनों की बैठकें शुरू हो गई हैं। आने वाले दिनों में मुंबई, पुणे, नागपुर और नासिक जैसे प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं।
प्रशासनिक स्तर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और परीक्षा मंडल MPSC और TET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं के आयोजन को लेकर क्या नए सुरक्षा दिशानिर्देश और सुधार लागू करते हैं। वहीं, विपक्षी दल भी इस मुद्दे को भुनाने के लिए आने वाले दिनों में सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।

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