'ईश्वर उन्हें माफ नहीं करेगा': राम मंदिर के लिए जमीन बेचने वाले 75 वर्षीय दानवीर का चढ़ावा चोरी विवाद पर बड़ा बयान

अयोध्या राम मंदिर के लिए अपनी जमीन बेचकर 1 करोड़ रुपये दान करने वाले बुजुर्ग सियाराम उमरवैश्य ने चढ़ावा चोरी मामले पर गहरा दुख और नाराजगी व्यक्त की है।

Jun 28, 2026 - 13:07
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'ईश्वर उन्हें माफ नहीं करेगा': राम मंदिर के लिए जमीन बेचने वाले 75 वर्षीय दानवीर का चढ़ावा चोरी विवाद पर बड़ा बयान
Siyaram Umarvaishya
  • Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर के लिए 1 करोड़ दान देने वाले सियाराम का छलका दर्द, बोले- 'पैसे का बंदरबांट देख दुख हो रहा'
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  • Ayodhya Ram Mandir: 1 करोड़ रुपये दान करने वाले सियाराम उमरवैश्य का बड़ा बयान, चढ़ावा चोरी प्रकरण पर जताई गहरी नाराजगी

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के चढ़ावे और दान राशि की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद से देशभर के श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। इस बीच, मंदिर निर्माण के शुरुआती दौर में अपनी कीमती जमीन बेचकर 1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि दान करने वाले परम भक्त सियाराम उमरवैश्य की बेहद भावुक और तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। बुजुर्ग दानवीर ने राम मंदिर में हुए इस चढ़ावा चोरी प्रकरण पर गहरा दुख और क्षोभ व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि ढलती उम्र में उन्होंने पवित्र मन से यह सोचकर दान दिया था कि उनका पैसा भगवान के काम आएगा, लेकिन आज मंदिर प्रबंधन के अंतर्गत पैसों की हेराफेरी देखकर उनका मन अत्यंत व्यथित है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस कृत्य के लिए ईश्वर दोषियों को कभी माफ नहीं करेगा।

यह पूरा मामला अयोध्या राम मंदिर के खजाने और दानपात्रों से जुड़े धन के प्रबंधन और उसमें हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। इस प्रकरण में पुलिस और विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई के बीच, मंदिर के सबसे बड़े व्यक्तिगत दानदाताओं में से एक सियाराम उमरवैश्य ने सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने मंदिर से जुड़े कुछ लोगों पर दान की राशि का दुरुपयोग और आपसी बंदरबांट करने का खुला आरोप लगाया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरा देश मंदिर में हुई इस सुरक्षा और वित्तीय चूक को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।

बुजुर्ग दानवीर सियाराम उमरवैश्य ने अपने अतीत को याद करते हुए बताया कि साल 2018 में जब राम मंदिर आंदोलन और निर्माण की सुगबुगाहट तेज थी, तब उनकी उम्र लगभग 75 वर्ष हो चुकी थी। उन्होंने सोचा कि जीवन का कोई भरोसा नहीं है और क्यों न अपने जीवन की सबसे बड़ी पूंजी प्रभु श्री राम के चरणों में समर्पित कर दी जाए। इसी पावन भावना के साथ उन्होंने अपनी एक मूल्यवान जमीन बेची और उससे प्राप्त 1 करोड़ रुपये की पूरी राशि मंदिर निर्माण कोष में दान कर दी थी।

हालांकि, वर्तमान में अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े जो तथ्य और आरोपियों की गिरफ्तारियां सामने आ रही हैं, उसने सियाराम उमरवैश्य को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में अत्यंत भावुक होते हुए कहा, "हमने बड़े चाव और श्रद्धा से अपनी जमीन बेचकर वह राशि इसलिए दी थी कि वह हमारे राम के मंदिर के काम आएगी। लेकिन आज जब हम अखबारों और टीवी पर मंदिर के पैसों की चोरी और बंदरबांट की खबरें देखते हैं, तो दिल रो पड़ता है।" उन्होंने कहा कि आस्था के केंद्र में ऐसा लालच और पाप अक्षम्य है।

सियाराम उमरवैश्य के इस बेहद भावुक बयान के बाद अयोध्या के संत समाज और आम नागरिकों के बीच भी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कई वरिष्ठ संतों ने उनके सुर में सुर मिलाते हुए कहा है कि एक सच्चे दानदाता की आंखों में आंसू आना पूरी व्यवस्था के लिए शर्मनाक है। वहीं, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों ने अनौपचारिक रूप से इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे दानदाताओं की भावनाओं का पूरा सम्मान करते हैं। ट्रस्ट ने आश्वासन दिया है कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और एक-एक पैसे का हिसाब पूरी पारदर्शिता के साथ जनता के सामने रखा जाएगा।

एक ऐसे प्रतिष्ठित दानवीर का बयान जिसने मंदिर के लिए अपनी संपत्ति तक बेच दी, समाज पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग सियाराम उमरवैश्य के वीडियो और वक्तव्यों को साझा कर मंदिर प्रबंधन में सुधार की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने आम जनता के मन में यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि भविष्य में धार्मिक संस्थाओं को दिए जाने वाले दान की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयानों से मंदिर प्रशासन पर नैतिक दबाव बहुत अधिक बढ़ गया है।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस की एसआईटी और वित्तीय विंग की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पकड़े गए आरोपियों के बैंक खातों और संपत्तियों को खंगाला जा रहा है ताकि दान की चोरी की गई राशि को पूरी तरह से रिकवर किया जा सके। सरकार और स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि भक्तों की आस्था और विश्वास को दोबारा बहाल किया जा सके। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में ट्रस्ट दान राशि के प्रबंधन के लिए कुछ नए और कड़े नियमों की घोषणा कर सकता है।

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