राहुल गांधी का सेक्रेटरी बताकर कांग्रेस नेता को लगाया ₹10 लाख का चूना, पुलिस एफआईआर में हुआ हैरान करने वाला खुलासा
हरियाणा कांग्रेस के कार्यकारी सदस्य संजीव को राहुल गांधी का सेक्रेटरी बताकर व्हाट्सएप कॉल के जरिए 10 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।

- कांग्रेस नेता से बड़ी ठगी: राहुल गांधी का पीए बनकर हरियाणा के संजीव कुमार से ऐंठे 10 लाख रुपए, एफआईआर दर्ज
- Rahul Gandhi के सचिव के नाम पर फर्जीवाड़ा: हरियाणा कांग्रेस नेता से व्हाट्सएप कॉल पर ₹10 लाख की धोखाधड़ी, जांच में जुटी पुलिस
- सियासी हलचल: राहुल गांधी का निजी सचिव बनकर हरियाणा कांग्रेस कमेटी के सदस्य से 10 लाख की साइबर लूट
हरियाणा के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों से साइबर ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला और गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहां हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के एग्जीक्यूटिव (कार्यकारी) मेंबर संजीव कुमार को खुद को लोकसभा सांसद और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का निजी सचिव (सेक्रेटरी) बताने वाले एक अज्ञात जालसाज ने अपना शिकार बनाया है। दर्ज कराई गई आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम इस साल 24 जनवरी को शुरू हुआ था, जब पीड़ित नेता संजीव को एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई थी। जालसाज ने संगठनात्मक रसूख और पार्टी के भीतर बड़े वादों का झांसा देकर कांग्रेस नेता से कथित तौर पर 10 लाख रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली। मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर साइबर सेल की मदद से आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
यह सनसनीखेज मामला वीआईपी प्रोफाइल और राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर नेताओं को ही निशाना बनाने वाले एक नए प्रकार के साइबर फ्रॉड की ओर इशारा करता है। ठगों ने इसके लिए व्हाट्सएप (WhatsApp) कॉल और डिजिटल माध्यमों का सहारा लिया। पीड़ित संजीव कुमार, जो हरियाणा कांग्रेस के एक सम्मानित और सक्रिय पदाधिकारी हैं, उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि वे सीधे राहुल गांधी के दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय के संपर्क में हैं। जालसाज ने इतनी बारीकी और आत्मविश्वास के साथ बातचीत की कि पीड़ित को शुरुआत में किसी भी प्रकार का संदेह नहीं हुआ और उन्होंने पार्टी हित व संगठनात्मक चर्चा के नाम पर मांगी गई राशि हस्तांतरित कर दी।
शिकायत और एफआईआर के ब्योरे के मुताबिक, पूरा घटनाक्रम 24 जनवरी को तब शुरू हुआ जब संजीव कुमार के मोबाइल पर एक व्हाट्सएप कॉल आई। फोन करने वाले व्यक्ति ने अपना परिचय राहुल गांधी के निजी सचिव के रूप में दिया। उसने बातचीत की शुरुआत में कांग्रेस पार्टी की आंतरिक गतिविधियों और आगामी रणनीतियों का जिक्र किया ताकि संजीव का भरोसा जीता जा सके। बातों-बातों में जालसाज ने कुछ गोपनीय संगठनात्मक कार्यों और फंड की तत्काल आवश्यकता का हवाला देते हुए संजीव से पैसों की मांग की।
उच्च नेतृत्व से सीधे संपर्क होने की खुशी और जिम्मेदारी के अहसास में, संजीव कुमार ने बिना किसी गहन वेरिफिकेशन के आरोपी द्वारा बताए गए बैंक खातों में अलग-अलग ट्रांजैक्शन के माध्यम से कुल 10 लाख रुपये भेज दिए। पैसे ट्रांसफर होने के बाद जब संजीव ने दिल्ली स्थित पार्टी के वास्तविक वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय कार्यालय से संपर्क साधने का प्रयास किया, तब उन्हें पता चला कि राहुल गांधी के कार्यालय से ऐसा कोई फोन या निर्देश कभी जारी ही नहीं किया गया था। खुद को ठगा हुआ महसूस करने के बाद उन्होंने तुरंत मामले की लिखित शिकायत पुलिस प्रशासन को सौंपी।
इस मामले पर हरियाणा कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व ने गहरी चिंता व्यक्त की है। पार्टी के एक प्रवक्ता ने संतुलित बयान देते हुए कहा, "आजकल साइबर अपराधी हाई-प्रोफाइल नामों का दुरुपयोग कर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। हमारे साथी संजीव कुमार इसी तरह के एक सुनियोजित स्कैम का शिकार हुए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि पुलिस प्रशासन इस डिजिटल फ्रॉड की कड़ियों को जोड़कर असली गुनहगारों को जल्द से जल्द बेनकाब करेगा।"
वहीं दूसरी तरफ, जांच अधिकारी और स्थानीय साइबर थाना पुलिस ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मामला दर्ज कर लिया गया है। जिस व्हाट्सएप नंबर से कॉल आई थी, उसका आईपी एड्रेस (IP Address) और कॉल डेटा रिकॉर्ड्स (CDR) खंगाले जा रहे हैं। इसके साथ ही, जिन बैंक खातों में 10 लाख रुपये की रकम ट्रांसफर की गई है, उन्हें फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि पैसों के ट्रेल (Money Trail) का पता लगाया जा सके।
इस हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी की घटना का असर राज्य के राजनीतिक गलियारों में साफ देखा जा रहा है। अब अन्य राजनेताओं और जनप्रतिधियों को भी अज्ञात नंबरों से आने वाली वीआईपी कॉल्स के प्रति सतर्क रहने की हिदायत दी जा रही है। यह मामला दर्शाता है कि डिजिटल युग में साइबर ठग केवल आम जनता को ही नहीं, बल्कि रसूखदार और प्रशासनिक समझ रखने वाले नेताओं को भी अपनी सोशल इंजीनियरिंग (Social Engineering) के जाल में आसानी से फंसा रहे हैं।
पुलिस के तकनीकी विंग ने इस मामले में देश के अन्य हिस्सों में सक्रिय अंतरराज्यीय साइबर गिरोहों के शामिल होने की आशंका जताई है। आने वाले दिनों में बैंक खातों के केवाईसी (KYC) विवरण और सिम कार्ड के लोकेशन के आधार पर संदिग्धों को दबोचने के लिए छापेमारी की जा सकती है। इसके साथ ही, कांग्रेस कमेटी ने भी अपने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी तरह के वित्तीय लेनदेन से जुड़े कॉल या मैसेज आने पर सीधे केंद्रीय नेतृत्व से उसका सत्यापन अवश्य कर लें।
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