Aaj Ka Mausam 5 July: 13 राज्यों में भारी बारिश और तूफान का अलर्ट, तटीय इलाकों में 4.19 मीटर ऊंचे ज्वार की चेतावनी

Aaj Ka Mausam 5 July: मौसम विभाग ने आज 13 राज्यों में भारी बारिश और तूफान का अलर्ट जारी किया है। तटीय इलाकों में 4.19 मीटर ऊंचे ज्वार-भाटे की चेतावनी भी दी गई है।

Jul 5, 2026 - 12:24
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Aaj Ka Mausam 5 July: 13 राज्यों में भारी बारिश और तूफान का अलर्ट, तटीय इलाकों में 4.19 मीटर ऊंचे ज्वार की चेतावनी
Aaj Ka Mausam 5 July
  • Weather Update Today: देश के 13 राज्यों में मौसम विभाग का भारी बारिश का अलर्ट, अगले 5 दिनों तक ऐसा रहेगा मौसम
  • Mausam Alert: 13 राज्यों में आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश की चेतावनी, समंदर में उठेगा 4.19 मीटर ऊंचा ज्वार!
  • Weather Alert Today: 13 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी, तटीय क्षेत्रों में ऊंचे ज्वार-भाटे की गंभीर चेतावनी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय मानसून को देखते हुए आज, 5 जुलाई 2026 को पूरे भारत के मौसम को लेकर एक बड़ा बुलेटिन जारी किया है। मौसम विभाग ने आज देश के 13 प्रमुख राज्यों में आंधी-तूफान के साथ मूसलाधार बारिश का 'ऑरेंज' और 'येलो' अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही, तटीय क्षेत्रों में समुद्र के भीतर 4.19 मीटर तक ऊंचे ज्वार-भाटे (High Tide) उठने की गंभीर चेतावनी दी गई है, जिससे मछुआरों और स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। वर्तमान में दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में जहां मानसून बेहद आक्रामक रूप दिखा रहा है, वहीं उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले पांच दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में मौसमी गतिविधियां इसी तरह उग्र रहने के आसार हैं।

देश के विभिन्न हिस्सों में मानसूनी हवाओं के तेजी से आगे बढ़ने के कारण भारी वर्षा का दौर शुरू हो चुका है। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से उठने वाली मानसूनी लहरें इस समय देश के दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों पर सबसे ज्यादा मेहरबान हैं। आज के लिए विभाग ने विशेष रूप से 13 राज्यों को चिन्हित किया है, जहां गरज-चमक के साथ भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। सबसे बड़ी चिंता का विषय तटीय इलाकों में समुद्र का बढ़ता जलस्तर है, जहां 4.19 मीटर ऊंची लहरें उठने का पूर्वानुमान लगाया गया है, जो निचले इलाकों में जलभराव का कारण बन सकती हैं।

देशभर में मानसून की चाल इस बार असमान बनी हुई है, जिसके कारण अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में मौसम का मिजाज अलग नजर आ रहा है।

मौसम विभाग द्वारा जारी विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार घटनाक्रम इस प्रकार है:

  • तटीय इलाकों के लिए संकट: मुंबई, कोंकण और पश्चिमी तट के अन्य हिस्सों में आज दोपहर के समय 4.19 मीटर तक ऊंची ज्वार की लहरें उठने की आशंका है। स्थानीय प्रशासन ने तटीय सड़कों और समुद्र तटों पर लोगों के जाने पर अस्थायी रोक लगा दी है।

  • पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में मूसलाधार आफत: असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश के साथ-साथ केरल और कर्नाटक के तटीय इलाकों में पिछले 24 घंटों से लगातार बारिश हो रही है। कई नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच चुकी हैं।

  • उत्तर-पश्चिम भारत में इंतजार: दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता फिलहाल कमजोर श्रेणी में है। यहां हल्की बूंदाबांदी या उमस भरी गर्मी का माहौल बना हुआ है, लेकिन आने वाले दिनों में यहां भी बदलाव की उम्मीद है।

इस गंभीर मौसमी अलर्ट को देखते हुए राज्य सरकारों और आपदा प्रबंधन टीमों ने तुरंत अपनी प्रतिक्रिया दी है।

  • आपदा प्रबंधन विभाग (NDRF/SDRF): तटीय और पहाड़ी राज्यों में राहत और बचाव दलों को पूरी तरह से हाई अलर्ट पर रखा गया है। विशेष रूप से भूस्खलन (Landslide) की आशंका वाले इलाकों में चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।

  • मौसम वैज्ञानिकों का कहना है: भूमध्यरेखीय प्रणालियों और स्थानीय वायुमंडलीय दबाव में आ रहे बदलावों के कारण भारी बारिश वाले क्षेत्रों में अचानक बाढ़ (Flash Floods) की स्थिति बन सकती है। आम जनता को सलाह दी गई है कि वे बहुत जरूरी न होने पर जलभराव वाले क्षेत्रों की यात्रा से बचें।

  • स्थानीय प्रशासन की अपील: तटीय जिलों के जिलाधिकारियों ने मछुआरों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि जब तक समुद्र में ज्वार की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक वे गहरे पानी में न जाएं।

इस मानसूनी बारिश और ऊंचे ज्वार-भाटे की चेतावनी का सीधा असर जनजीवन और यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है। पूर्वोत्तर राज्यों में भारी वर्षा के कारण कई संपर्क मार्ग टूट गए हैं, जिससे परिवहन सेवा प्रभावित हुई है। तटीय शहरों में ऊंचे ज्वार के कारण जल निकासी की व्यवस्था धीमी पड़ सकती है, जिससे शहरों के निचले हिस्सों में पानी भरने की समस्या गंभीर हो सकती है। हालांकि, कृषि क्षेत्र के लिए यह बारिश देश के कुछ हिस्सों में वरदान साबित हो रही है, जहां किसान धान की रोपाई के लिए लंबे समय से पानी का इंतजार कर रहे थे।

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