UP RERA IFMS New Rules: यूपी रेरा का 12वां संशोधन लागू, अब बिल्डर नहीं कर सकेंगे मेंटेनेंस फंड में मनमानी 

UP RERA IFMS Rules: यूपी रेरा ने 12वें संशोधन के तहत मेंटेनेंस फंड के नियम बदले। अब बिल्डरों को अलग खाते और एफडी में रखना होगा पैसा, आरडब्ल्यूए को मिलेगा पूरा फंड।

Aug 19, 2026 - 14:03
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UP RERA IFMS New Rules: यूपी रेरा का 12वां संशोधन लागू, अब बिल्डर नहीं कर सकेंगे मेंटेनेंस फंड में मनमानी 
  • UP RERA 12th Amendment: नोएडा, लखनऊ में फ्लैट खरीदारों को बड़ी राहत, जानिए IFMS मेंटेनेंस सिक्योरिटी के नए नियम 
  • नोएडा-लखनऊ में घर खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर: यूपी रेरा ने मेंटेनेंस फंड (IFMS) पर बदला नियम, बिल्डरों की मनमानी पर रोक 
  • UP RERA 12th Amendment: मेंटेनेंस सिक्योरिटी फंड (IFMS) को लेकर यूपी रेरा ने लागू किए सख्त नियम, ब्याज सहित RWA को ट्रांसफर होगा पैसा

उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने राज्य भर में फ्लैट और प्लॉट खरीदने वाले उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। यूपी रेरा ने अपने सामान्य विनियमों में 12वां संशोधन अधिसूचित करते हुए ब्याज मुक्त मेंटेनेंस सुरक्षा (IFMS) फंड के प्रबंधन और उपयोग को लेकर सख्त दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं। इस नए नियम के तहत अब नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के किसी भी शहर में रियल एस्टेट डेवलपर्स खरीदारों से लिए गए मेंटेनेंस डिपॉजिट का मनमाना इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इस कदम से बिल्डरों और रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के बीच वर्षों से चले आ रहे वित्तीय विवादों पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है। 

उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने यूपी रेरा (जनरल) रेगुलेशन, 2019 में 12वां संशोधन करते हुए रेगुलेशन 47 के तहत आईएफएमएस फंड की वसूली, रखरखाव, निवेश और हस्तांतरण के लिए व्यापक ढांचा तैयार किया है। नए नियमों के लागू होने के बाद अब बिल्डर घर खरीदारों से जमा कराए गए मेंटेनेंस सिक्योरिटी फंड को अपनी सामान्य निर्माण या व्यावसायिक परियोजनाओं में इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। यूपी रेरा ने स्पष्ट किया है कि यह फंड पूरी तरह से खरीदारों की सामूहिक संपत्ति है और इसका उपयोग केवल सोसायटियों की साझा सुविधाओं के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए ही किया जाएगा। 

यूपी रेरा द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, डेवलपर्स को अब रजिस्ट्री या सब-लीज डीड के निष्पादन के समय ही खरीदारों से श्रेणीवार निर्धारित दरों पर आईएफएमएस की राशि लेनी होगी। इसके साथ ही इस पूरी रकम को किसी भी अनुसूचित बैंक में एक अलग डेडिकेटेड बैंक खाते में जमा कराना अनिवार्य कर दिया गया है। यह राशि निष्क्रिय नहीं पड़ी रहेगी, बल्कि बिल्डर को विभिन्न बैंकों से कोटेशन लेकर इस फंड को सर्वाधिक ब्याज देने वाली फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) योजना में निवेश करना होगा, जिससे जमा पूंजी पर अधिकतम रिटर्न मिल सके।

प्राधिकरण ने विभिन्न श्रेणियों के आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स के लिए आईएफएमएस की मानक दरें भी निर्धारित की हैं, ताकि डेवलपर्स मनमाने शुल्क न वसूल सकें। ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी से लेकर सुपर लग्जरी फ्लैट्स के लिए 20 रुपये से 100 रुपये प्रति वर्ग फीट (कारपेट एरिया) की दर तय की गई है। वहीं व्यावसायिक संपत्तियों के लिए गैर-सेंट्रल एसी में 40 रुपये और सेंट्रल एसी प्रोजेक्ट्स में 50 रुपये प्रति वर्ग फीट की सीमा निर्धारित की गई है।

प्रोजेक्ट पूरा होने और कॉमन एरिया का हैंडओवर देने के समय प्रमोटर को पूरी मूल राशि और उस पर अर्जित समस्त ब्याज का हस्तांतरण संबंधित आरडब्ल्यूए या एसोसिएशन ऑफ अलॉटीज को करना होगा। इस ट्रांसफर के साथ यूनिट-वार वसूली, खर्चों का ऑडिट ट्रेल और चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित बैलेंस शीट प्रस्तुत करना भी अनिवार्य बनाया गया है। 

यूपी रेरा के चेयरमैन संजय आर. भूसरेड्डी ने इस संशोधन को पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि घर खरीदार अपनी जीवनभर की पूंजी से घर खरीदते हैं और कॉमन एरिया के रख-रखाव के लिए यह सिक्योरिटी डिपॉजिट देते हैं। अतः इस कोष की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना नियामक की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस व्यवस्था से आरडब्ल्यूए को वित्तीय मजबूती मिलेगी और सोसायटियों का प्रबंधन अधिक टिकाऊ व पारदर्शी होगा।

दूसरी तरफ, फ्लैट खरीदारों और आरडब्ल्यूए फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। लंबे समय से आरडब्ल्यूए की यह प्रमुख शिकायत रही थी कि बिल्डर हैंडओवर के वर्षों बाद भी मेंटेनेंस फंड ट्रांसफर नहीं करते या उसमें से मनमाने खर्च काटकर विवाद पैदा करते हैं। हालांकि, क्रेडाई और बिल्डर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे इन नियमों का पालन सुनिश्चित करेंगे, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि आरडब्ल्यूए भी हैंडओवर के बाद फंड के ऑडिट और उपयोग को लेकर समान जवाबदेही बनाए रखेगी। 

इस 12वें संशोधन का उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर पर सीधा और व्यापक प्रभाव पड़ेगा। पूर्व में प्रचलित बिल्डर-बायर एग्रीमेंट (BBA) या आवंटन पत्रों में यदि आईएफएमएस को लेकर कोई प्रतिकूल शर्त दर्ज थी, तो रेरा के इस संशोधन के बाद वह स्वतः निष्प्रभावी मानी जाएगी। अब होमबॉयर्स को यह स्पष्ट सुरक्षा मिल गई है कि उनके द्वारा दिया गया मेंटेनेंस डिपॉजिट सुरक्षित रूप से बैंक एफडी में बढ़ेगा और अंततः उनकी अपनी रेजिडेंट्स बॉडी को ही सौंपा जाएगा।

इसके साथ ही सोसायटियों में लिफ्ट, जेनरेटर, सुरक्षा उपकरण, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और पार्क जैसी महत्वपूर्ण साझा संपत्तियों के समय पर रिप्लेसमेंट और बड़े मेंटेनेंस कार्यों के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध रहेगा, जिससे रिहायशी सोसायटियों के बुनियादी ढांचे की उम्र बढ़ेगी।

यूपी रेरा ने सभी पंजीकृत प्रमोटरों को निर्देश दिया है कि वे अपनी परियोजनाओं में आईएफएमएस के लिए अलग खाते खोलने और बैंक कोटेशन के आधार पर एफडी बनाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करें। प्राधिकरण अब निर्माणाधीन और हैंडओवर की कगार पर खड़ी परियोजनाओं के वित्तीय रिकॉर्ड्स की नियमित निगरानी करेगा। जिन प्रोजेक्ट्स में हैंडओवर की प्रक्रिया चल रही है, वहां रेरा यह सुनिश्चित करेगा कि प्रमोटर निर्धारित समयसीमा के भीतर सीए ऑडिट रिपोर्ट के साथ संपूर्ण फंड आरडब्ल्यूए के सुपुर्द करें। नियमों का उल्लंघन करने वाले या फंड में हेराफेरी करने वाले प्रमोटरों के खिलाफ रेरा अधिनियम के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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