US Iran War Tension: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिका का ईरान पर हवाई हमला, ट्रंप बोले- 'अस्तित्व मिटा देंगे'
पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरान पर सैन्य हमला कर उसके मिसाइल और ड्रोन ठिकाने तबाह कर दिए हैं। ट्रंप ने दी चेतावनी।

- US Iran War Tension: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिका का ईरान पर हवाई हमला, ट्रंप बोले- 'अस्तित्व मिटा देंगे'
- पश्चिम एशिया में महायुद्ध की आहट: अमेरिका ने ईरान के मिसाइल ठिकानों को बनाया निशाना, ट्रंप ने दी आखिरी चेतावनी
- US Attacks Iran: अमेरिकी सेना का ईरान पर बड़ा हमला, युद्धविराम उल्लंघन के बाद डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा एक्शन
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में भू-राजनीतिक परिस्थितियां एक बार फिर बेहद संवेदनशील और विस्फोटक हो गई हैं। अमेरिका ने शनिवार को ईरान के सैन्य ठिकानों पर एक बड़ा हवाई हमला किया है। यह दंडात्मक सैन्य कार्रवाई रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के पास पनामा के झंडे वाले एक वाणिज्यिक तेल टैंकर पर हुए हमले के जवाब में की गई है। अमेरिकी प्रशासन का स्पष्ट आरोप है कि ईरान ने दोनों देशों के बीच हुए युद्धविराम समझौते का खुला उल्लंघन किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ईरान को विनाशकारी परिणाम भुगतने की सीधी चेतावनी दी है। इस ताजा सैन्य टकराव के बाद वैश्विक बाजारों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हड़कंप मच गया है।
शनिवार को अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के लड़ाकू विमानों ने संयुक्त रूप से ईरान की सीमा के भीतर स्थित संवेदनशील सैन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के अनुसार, यह हमला पूरी तरह से सुरक्षात्मक और जवाबी कार्रवाई का हिस्सा था। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नजदीक अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग पर बढ़ रही अस्थिरता और पनामा के एक तेल टैंकर को निशाना बनाए जाने के बाद वाशिंगटन ने इस सैन्य ऑपरेशन को हरी झंडी दिखाई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ईरान द्वारा की गई उकसावे की कार्रवाई का तार्किक जवाब बताया है।
इस ताजा विवाद की पृष्ठभूमि कुछ दिनों पहले से तैयार हो रही थी, जब अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों की उपस्थिति में एक अस्थायी युद्धविराम समझौता हुआ था। हालांकि, शनिवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक बड़ा हादसा हुआ जब पनामा के ध्वज के साथ जा रहे एक तेल टैंकर पर ड्रोन या मिसाइल से हमला किया गया। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने इस हमले के पीछे सीधे तौर पर ईरानी सेना (आईआरजीसी) का हाथ होने के पुख्ता सबूत मिलने का दावा किया।
इस समझौते के टूटने के तुरंत बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्देश पर अमेरिकी विमानों ने ईरान के भीतर सर्जिकल स्ट्राइक की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर जारी एक बयान में इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि अमेरिकी विमानों ने ईरान के बार-बार होने वाले युद्धविराम उल्लंघनों का जवाब देते हुए उसके मिसाइल भंडार, ड्रोन उत्पादन केंद्रों और अत्याधुनिक रडार ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान अपनी शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को तुरंत नहीं रोकता, तो अमेरिका इससे भी बड़ी सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है, जिससे 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान' का अस्तित्व हमेशा के लिए समाप्त हो सकता है।
इस हमले के बाद दोनों देशों की तरफ से बेहद आक्रामक रुख देखने को मिल रहा है। वाशिंगटन में व्हाइट हाउस और पेंटागन ने साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। दूसरी तरफ, तेहरान से आ रही शुरुआती खबरों के मुताबिक, ईरानी सरकार ने इस अमेरिकी हमले को अपनी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का मजाक उड़ाना करार दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इस अकारण हमले का जवाब देने का अधिकार उनके पास सुरक्षित है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र (UN) और यूरोपीय संघ (EU) ने दोनों पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने और तनाव को कम करने की अपील की है।
इस सैन्य कार्रवाई का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ना शुरू हो गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण कच्चे तेल के परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इस हमले की खबर फैलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में अचानक भारी उछाल देखा गया है। इसके अलावा, विमानन कंपनियों ने पश्चिम एशिया के हवाई क्षेत्र का उपयोग करने से बचना शुरू कर दिया है, जिससे कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रूट बदलने पड़े हैं। कूटनीतिक मोर्चे पर, इस हमले ने क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के सभी प्रयासों को गहरा झटका दिया है।
आने वाले दिन पश्चिम एशिया की भावी दिशा तय करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान ने इस अमेरिकी हमले का जवाब देने के लिए किसी अन्य वाणिज्यिक जहाज या अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया, तो यह संघर्ष एक पूर्ण युद्ध का रूप ले सकता है। अमेरिकी नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ओमान की खाड़ी में अपनी गश्त बढ़ा दी है और पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट पर रखा गया है। वैश्विक समुदाय की नजरें अब ईरान के अगले कदम और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इस आपातकालीन स्थिति पर होने वाली संभावित बैठक पर टिकी हैं।
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