Dus Ka Dum: विवादों और नफरत के डर से शो होस्ट नहीं करना चाहते थे सलमान खान, पिता सलीम खान की इस सलाह ने बदल दिया फैसला
सलमान खान शुरुआत में 'दस का दम' होस्ट करने से कतरा रहे थे। उन्हें डर था कि लोग उनसे नफरत करेंगे, लेकिन पिता सलीम खान की सलाह ने उनका करियर मोड़ दिया।

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान आज छोटे पर्दे के सबसे बड़े और सबसे सफल होस्ट माने जाते हैं। 'दस का दम' से लेकर 'बिग बॉस' तक, टेलीविजन पर उनकी मौजूदगी दर्शकों को बांधे रखती है। हालांकि, छोटे पर्दे पर उनका यह सफर इतना सीधा और आसान नहीं था। साल 2008 में जब सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के गेम शो '10 का दम' (Power of 10 का भारतीय रूपांतरण) का प्रस्ताव उनके पास आया था, तब सलमान खान इसे स्वीकार करने को लेकर बेहद डरे हुए और संशय में थे। उन्हें आशंका थी कि दर्शक और आम लोग उनसे नफरत करते हैं और यदि वे बिना किसी किरदार के असली रूप में टीवी पर आए, तो यह उनके करियर के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
उस दौर में सलमान खान कानूनी मुकदमों, मीडिया विवादों और अपनी 'बैड बॉय' छवि से जूझ रहे थे। फिल्मों में वे एक तय स्क्रिप्ट और किरदार के पीछे होते थे, लेकिन टीवी रियलिटी शो में किसी अभिनेता को अपनी वास्तविक शख्सियत के साथ पेश होना पड़ता था। सलमान को डर था कि अगर कैमरे के सामने उनका असली रूप लोगों को पसंद नहीं आया, तो जो थोड़ा-बहुत समर्थन उन्हें मिल रहा है, वह भी खत्म हो जाएगा।
पिता सलीम खान की वो सलाह जिसने बदल दिया नजरिया
इस असमंजस की स्थिति में सलमान खान ने अपने पिता और दिग्गज पटकथा लेखक सलीम खान से मार्गदर्शन मांगा। सलमान ने अपने पिता के सामने अपनी पूरी चिंता रखी कि किस तरह मीडिया ट्रायल और विवादों के कारण जनता के बीच उनकी नकारात्मक छवि बनी हुई है और ऐसे में टीवी पर जाना एक बड़ा जोखिम हो सकता है।
सलीम खान ने अपने बेटे की बात को बहुत धैर्य से सुना और उन्हें एक व्यावहारिक सलाह दी। सलीम खान ने उनसे कहा कि यदि लोग उनसे वाकई नफरत करते हैं या उनके बारे में गलत धारणा रखते हैं, तो उन्हें इस शो के जरिए जनता के सामने खुद को वैसे ही पेश करना चाहिए जैसे वे असल जिंदगी में हैं। सलीम खान का तर्क था कि फिल्मों में लोग सलमान को किरदारों के जरिए देखते हैं, लेकिन टीवी पर वे सीधे सलमान खान को देखेंगे। अगर वे सचमुच एक अच्छे इंसान हैं, तो दर्शक उनकी असलियत को पहचानेंगे और यदि नहीं हैं, तो यह बात भी सामने आ जाएगी। पिता के इस भरोसे और दो-टूक सलाह ने सलमान खान के मन का डर दूर कर दिया और उन्होंने शो के लिए हामी भर दी।
जब बदल गई सलमान खान की सार्वजनिक छवि
साल 2008 में जब 'दस का दम' का पहला सीजन ऑन-एयर हुआ, तो उसने भारतीय टेलीविजन की दुनिया में तहलका मचा दिया। सलमान खान का सहज, बेबाक, मजाकिया और आम लोगों से सीधे जुड़ने वाला अंदाज दर्शकों के दिलों में उतर गया। वे सेट पर आने वाले आम प्रतियोगियों के साथ उसी तरह बात करते थे जैसे कोई अपने परिवार या दोस्तों के बीच करता है।
इस शो ने सलमान खान की सार्वजनिक धारणा को पूरी तरह बदल दिया। विवादों के साए में घिरे अभिनेता की जगह लोगों को एक दरियादिल, संवेदनशील और जमीन से जुड़ा इंसान नजर आने लगा। जो दर्शक सिर्फ अखबारों की सुर्खियों के आधार पर उनके बारे में राय बनाते थे, उन्होंने सलमान के मानवीय और संवेदनशील पहलू को देखा। शो की टीआरपी ने नए रिकॉर्ड बनाए और इसने सलमान खान के करियर को एक नई ऊर्जा दी।
छोटे पर्दे के बेताज बादशाह बनने की शुरुआत
'दस का दम' की जबर्दस्त कामयाबी ने न केवल सलमान खान की छवि को संवारा, बल्कि इसने उन्हें छोटे पर्दे का सबसे चहेता होस्ट भी बना दिया। इस शो के दो सफल सीजन होस्ट करने के बाद ही मेकर्स को यह भरोसा हुआ कि सलमान खान टीवी दर्शकों से गहरा भावनात्मक जुड़ाव बना सकते हैं।
यही अनुभव आगे चलकर उनके लिए 'बिग बॉस' जैसे बड़े मंच का रास्ता खोलने में मददगार साबित हुआ। साल 2010 में सलमान खान ने 'बिग बॉस' सीजन 4 की कमान संभाली और तब से लेकर आज तक वे इस रियलिटी शो का पर्याय बने हुए हैं।
मनोरंजन जगत के विश्लेषकों का मानना है कि सलमान खान के करियर में 'दस का दम' एक अहम मोड़ (टर्निंग प्वाइंट) था। इसके बाद साल 2009 में आई फिल्म 'वांटेड' और फिर 'दबंग' ने उन्हें बॉक्स ऑफिस पर भी एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया। कई मौकों पर खुद सलमान खान भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि उनके पिता की उस एक सलाह ने उन्हें उस डर से बाहर निकाला था, जिसने उन्हें सालों तक घेरे रखा था। टीवी पर उनकी यह यात्रा इस बात का उदाहरण है कि ईमानदारी और खुलेपन से दर्शकों के साथ बनाया गया रिश्ता हमेशा लंबे समय तक कायम रहता है।
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