Child Health Care Tips: क्या आपका बच्चा भी खाता है मिट्टी या चॉक? न करें इग्नोर, पीडियाट्रिशियन ने बताई वजह

क्या आपका बच्चा मिट्टी या चॉक खाता है? पीडियाट्रिशियन डॉ. निमिषा अरोड़ा के अनुसार यह केवल जिद नहीं, बल्कि पोषण की कमी या मेडिकल कंडीशन हो सकती है।

Aug 2, 2026 - 13:07
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Child Health Care Tips: क्या आपका बच्चा भी खाता है मिट्टी या चॉक? न करें इग्नोर, पीडियाट्रिशियन ने बताई वजह
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अक्सर छोटे बच्चों में घर की दीवारों का प्लास्टर उखाड़कर खाने, चॉक या मिट्टी निगलने की आदत देखी जाती है। अधिकांश अभिभावक इसे बच्चों की सामान्य नादानी या एक बुरी आदत मानकर नजरअंदाज कर देते हैं या फिर डांट-डपटकर छोड़ देते हैं। हालांकि, बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) डॉ. निमिषा अरोड़ा ने इसे लेकर माता-पिता को आगाह किया है। विशेषज्ञ के अनुसार, बच्चों का गैर-खाद्य (Non-food) वस्तुएं खाना केवल जिद नहीं, बल्कि शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी या किसी मेडिकल कंडीशन का संकेत हो सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लक्षण दिखते ही बिना किसी देरी के बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें, ताकि सही कारण का पता लगाकर समय पर डॉक्टरी इलाज शुरू किया जा सके।

बच्चों में मिट्टी, कच्चा चावल, पेंसिल की लेड, चॉक या दीवार की पपड़ी खाने की प्रवृत्ति काफी आम देखी जाती है। चिकित्सा विज्ञान में गैर-खाद्य पदार्थों को बार-बार खाने की इस लालसा को 'पाइका डिसऑर्डर' (Pica Disorder) के रूप में जाना जाता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. निमिषा अरोड़ा ने अभिभावकों को सतर्क करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि बच्चा ऐसी गैर-पोषण वाली चीजें खा रहा है, तो यह केवल व्यवहार संबंधी समस्या नहीं है, बल्कि उसके शरीर में जरूरी मिनरल्स की गंभीर कमी का लक्षण हो सकता है।

बचपन में बच्चों का अपने आसपास की चीजों को मुंह में डालना एक स्वाभाविक विकास प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन जब बच्चा जानबूझकर चॉक, दीवार की सफेदी, मिट्टी या ईंट के टुकड़े खाने लगे, तो यह एक चिकित्सीय चिंता का विषय बन जाता है।

चिकित्सकीय शोध और विशेषज्ञों के अध्ययन बताते हैं कि बच्चों में इस तरह की चीजें खाने की मुख्य वजह शरीर में आयरन (Iron) और जिंक (Zinc) जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की कमी होती है। जब बच्चे के शरीर में खून या आवश्यक मिनरल्स का स्तर कम होने लगता है, तो उसका दिमाग अनजाने में ऐसी चीजों की ओर आकर्षित होता है।

इसके अतिरिक्त, कुछ मामलों में पेट में कीड़े (Worm Infestation) होने या मानसिक विकास से जुड़े कारणों के चलते भी बच्चे ऐसी चीजें खाने लगते हैं। अभिभावक अक्सर इस स्थिति को अनदेखा कर देते हैं या बच्चे को सजा देकर रोकने की कोशिश करते हैं, जिससे समस्या का वास्तविक समाधान नहीं हो पाता और बच्चे के स्वास्थ्य पर उल्टा असर पड़ता है।

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. निमिषा अरोड़ा ने अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण परामर्श जारी करते हुए कहा:

"अगर आपका बच्चा चॉक, मिट्टी या दीवार का प्लास्टर खाने का आदी है, तो इसे सामान्य मानकर टालने की भूल न करें। यह शरीर में खून की कमी (एनेमिया) या मिनरल्स की भारी डेफिशिएंसी का स्पष्ट संकेत हो सकता है। ऐसे में बच्चे को डांटने के बजाय तुरंत पीडियाट्रिशियन के पास ले जाएं, ताकि ब्लड टेस्ट के जरिए कमी का पता लगाया जा सके और उचित सप्लीमेंट्स दिए जा सकें।"

अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि शुरुआती स्तर पर ही यदि सही डायग्नोसिस हो जाए, तो सिरप या गोलियों के माध्यम से इस समस्या को कुछ ही हफ्तों में ठीक किया जा सकता है।

यदि बच्चे की इस आदत पर ध्यान न दिया जाए, तो इसके गंभीर स्वास्थ्य परिणाम हो सकते हैं:

पेट में संक्रमण और कीड़े: मिट्टी या दीवारों के प्लास्टर में हानिकारक बैक्टीरिया और परजीवी होते हैं, जो बच्चे के पाचन तंत्र को खराब कर सकते हैं।

लेड पॉइजनिंग (Lead Poisoning): पुरानी दीवारों के पेंट या प्लास्टर में लेड (सीसा) हो सकता है, जो बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास को बाधित कर सकता है।

आंतों में रुकावट: चॉक या अखाद्य पदार्थ पेट में जमा होकर आंतों में रुकावट (Intestinal Obstruction) पैदा कर सकते हैं।

कुपोषण: ऐसी चीजें खाने से बच्चे की भूख मर जाती है, जिससे उसका प्राकृतिक विकास रुक जाता है।

अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चे के खान-पान और आदतों पर कड़ी नजर रखें। यदि बच्चा ऐसी चीजें खाता दिखे, तो घरेलू उपचार या जबरदस्ती करने के बजाय पीडियाट्रिशियन से संपर्क करें। डॉक्टर आमतौर पर हीमोग्लोबिन और मिनरल प्रोफाइल टेस्ट की सलाह देते हैं। सही पोषण, संतुलित आहार और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं से इस समस्या को पूरी तरह से दूर किया जा सकता है।

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