अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाटो देशों को सख्त अल्टीमेटम: "ईरान के परमाणु मंसूबे यूरोप और अमेरिका के लिए बड़ा खतरा"।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने एक बार फिर अपने चिरपरिचित आक्रामक अंदाज में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्य
- ईरान की नौसैनिक शक्ति पर ट्रंप का तंज: "उनके सभी 159 जहाज समुद्र की तलहटी में डूबे, अब परमाणु हथियारों की बारी"
- मैक्रॉन के साथ 'टैरिफ वॉर' की कहानी: 250% शुल्क की धमकी देकर ट्रंप ने फ्रांस को दवाओं की कीमतें बढ़ाने पर किया मजबूर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने एक बार फिर अपने चिरपरिचित आक्रामक अंदाज में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्य देशों को ईरान और वैश्विक सुरक्षा के मुद्दों पर खरी-खरी सुनाई है। वाशिंगटन में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पूरी दुनिया को आगाह करते हुए कहा कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ट्रंप ने इस खतरे को केवल इजराइल तक सीमित न बताते हुए कहा कि यदि ईरान परमाणु संपन्न होता है, तो वह बहुत जल्द इन हथियारों का इस्तेमाल न केवल इजराइल और मध्य पूर्व पर करेगा, बल्कि यूरोप भी उसके निशाने पर होगा। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी जोड़ा कि अंततः अगला नंबर अमेरिका का ही होगा, लेकिन वे अपने कार्यकाल में ऐसा कभी नहीं होने देंगे। ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ट्रंप ने ईरानी नौसेना की मौजूदा स्थिति पर बेहद तीखा और विवादास्पद दावा किया। उन्होंने कहा कि ईरान के पास कुल 159 जहाज थे और इस समय उनका हर एक जहाज समुद्र की तलहटी में डूबा हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान हाल के हफ्तों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ओमान की खाड़ी में हुई भीषण नौसैनिक झड़पों की ओर इशारा करता है, जहां अमेरिकी नौसेना ने जवाबी कार्रवाई में ईरानी बेड़े को भारी नुकसान पहुंचाया था। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि जिस देश की नौसेना अब अस्तित्व में ही नहीं है, उसे परमाणु महत्वाकांक्षाओं को पालने के बजाय अपनी हकीकत को पहचानना चाहिए। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ईरान की सैन्य क्षमता को शून्य बताने जैसा है।
ईरान के मुद्दे पर नाटो सहयोगियों, विशेषकर इटली और स्पेन की निष्क्रियता पर ट्रंप ने भारी नाराजगी व्यक्त की है। ट्रंप का मानना है कि जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु खतरे को रोकने के लिए मदद मांगी, तब ये देश पीछे हट गए। उन्होंने कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना कोई बड़ी समस्या नहीं है, वे बुद्धिमान नहीं हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि नाटो एक साझा रक्षा संगठन है, लेकिन कुछ देश केवल सुरक्षा का लाभ लेना चाहते हैं और जिम्मेदारी के समय अमेरिका के साथ खड़े नहीं होते। उन्होंने यहां तक संकेत दिया कि यदि नाटो देश अपनी भूमिका नहीं बदलते, तो अमेरिका इन देशों से अपनी सेनाओं की वापसी पर गंभीरता से विचार कर सकता है। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन को केवल तीन मिनट की बातचीत में अपनी शर्तें मानने पर मजबूर कर दिया। ट्रंप के अनुसार, उन्होंने फ्रांस से आने वाली दवाओं और वाइन पर 250% तक के भारी-भरकम टैरिफ की धमकी दी थी, जिसके बाद मैक्रॉन को अमेरिकी हितों के अनुरूप दवाओं की ऊंची कीमतें स्वीकार करनी पड़ीं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ अपने संबंधों और व्यापारिक वार्ताओं का जिक्र करते हुए ट्रंप ने एक बार फिर उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उन्होंने दवाओं की ऊंची कीमतों के मुद्दे पर मैक्रॉन को झुकने के लिए विवश कर दिया। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी जनता अन्य देशों के स्वास्थ्य तंत्र को सब्सिडी नहीं दे सकती, इसलिए उन्होंने फ्रांस को चेतावनी दी थी कि यदि वे दवाओं की कीमतों में बदलाव नहीं करते हैं, तो अमेरिका फ्रांस से आने वाले सामानों पर 250% शुल्क लगा देगा। ट्रंप ने इस बातचीत का विवरण देते हुए कहा कि मैक्रॉन ने घबराकर तुरंत "नो, नो, डोनाल्ड" कहते हुए उनकी शर्तों को स्वीकार कर लिया। हालांकि फ्रांस की ओर से इन दावों को आधिकारिक तौर पर खारिज किया गया है, लेकिन ट्रंप इसे अपनी 'आर्ट ऑफ द डील' की एक और जीत के रूप में पेश कर रहे हैं।
यूरोप के साथ अमेरिका के बढ़ते व्यापारिक और सुरक्षा मतभेदों ने अटलांटिक के दोनों पार के संबंधों में दरार पैदा कर दी है। ट्रंप का तर्क है कि यूरोप यूक्रेन जैसे मुद्दों पर अमेरिका से भारी मदद लेता है, लेकिन जब ईरान के साथ युद्ध की स्थिति आई, तो कई यूरोपीय देशों ने अमेरिकी विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र तक साझा करने से मना कर दिया। ट्रंप ने नाटो को एक 'पेपर टाइगर' की संज्ञा दी और कहा कि यह संगठन उन लोगों के लिए बना है जो अमेरिका के पैसों पर पल रहे हैं। राष्ट्रपति की इस बयानबाजी ने जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों को अपनी रक्षा नीतियों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है, क्योंकि ट्रंप अब 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति को और अधिक आक्रामक तरीके से लागू कर रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में इजराइल की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया और कहा कि ईरान का परमाणु मुक्त होना इजराइल के अस्तित्व के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में स्थिरता तभी आ सकती है जब ईरान की आक्रामकता को पूरी तरह कुचल दिया जाए। ट्रंप ने बताया कि उनकी प्रशासन की नीति स्पष्ट है—अधिकतम दबाव और यदि आवश्यक हो, तो पूर्ण सैन्य कार्रवाई। उन्होंने उन देशों की भी आलोचना की जो ईरान के साथ व्यापार जारी रखना चाहते हैं, और चेतावनी दी कि वे देश भी अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में आएंगे। ट्रंप के इन कड़े शब्दों ने यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले समय में मध्य पूर्व और यूरोप के प्रति अपनी नीतियों में कोई नरमी नहीं बरतेंगे।
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