शेयर बाजार में रिकॉर्ड तोड़ तेजी, अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते से दलाल स्ट्रीट में आया चौतरफा उछाल

वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच वाशिंगटन और तेहरान से आई एक अभूतपूर्व और सुखद खबर ने सोमवार को भारतीय

Jun 15, 2026 - 11:06
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शेयर बाजार में रिकॉर्ड तोड़ तेजी, अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते से दलाल स्ट्रीट में आया चौतरफा उछाल
शेयर बाजार में रिकॉर्ड तोड़ तेजी, अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते से दलाल स्ट्रीट में आया चौतरफा उछाल
  • सेंसेक्स और निफ्टी ने लगाई लंबी छलांग, कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से निवेशकों की मिनटों में चमकी किस्मत
  • एविएशन, बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में मची लूट, वैश्विक अनिश्चितता खत्म होने से भारतीय अर्थव्यवस्था को मिली नई ऊर्जा

वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच वाशिंगटन और तेहरान से आई एक अभूतपूर्व और सुखद खबर ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में उत्सव का माहौल बना दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी सैन्य गतिरोध और युद्ध की स्थिति को समाप्त करने के लिए हुए ऐतिहासिक शांति समझौते की घोषणा के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों से अनिश्चितता के काले बादल पूरी तरह से छंट गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आए इस बड़े सकारात्मक बदलाव का सीधा और धमाकेदार असर दलाल स्ट्रीट पर देखने को मिला, जहां हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बाजार खुलते ही चौतरफा खरीदारी का तूफान आ गया। बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएससी) का निफ्टी 50 दोनों ही शुरुआती मिनटों में ही रॉकेट की गति से ऊपर की ओर भागे, जिससे बाजार खुलने का इंतजार कर रहे निवेशकों को मिनटों में ही लाखों-करोड़ों रुपये की चांदी हो गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और फारस की खाड़ी में जहाजों के आवागमन के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोले जाने के आधिकारिक निर्णय ने भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए संजीवनी का काम किया है। इस ऐतिहासिक भू-राजनीतिक सुधार की वजह से वित्तीय (बैंकिंग और एनबीएफसी), विमानन (एविएशन) और बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्र के शेयरों में सबसे शानदार और आक्रामक तेजी देखने को मिल रही है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए खाड़ी देशों में शांति की बहाली से देश के चालू खाता घाटे (कैड) में बड़ी कमी आने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। इसी उम्मीद के सहारे बड़े संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के साथ-साथ घरेलू निवेशकों (डीआईआई) ने भी सुबह से ही बाजार में आक्रामक लिवाली शुरू कर दी, जिसके चलते सूचकांकों ने अपने पिछले कई हफ्तों के नुकसान की भरपाई कुछ ही घंटों के भीतर कर डाली।

घरेलू शेयर बाजार के मुख्य सूचकांकों की चाल पर नजर डालें तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स कारोबार की शुरुआत में ही अपने पिछले बंद स्तर से एक हजार से भी अधिक अंकों की भारी बढ़त के साथ खुला और देखते ही देखते यह ऐतिहासिक ऊंचाइयों की ओर अग्रसर हो गया। ठीक इसी प्रकार की तूफानी तेजी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी 50 में भी दर्ज की गई, जिसने कारोबार की शुरुआत में ही महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तरों को पार करते हुए तीन सौ से अधिक अंकों की छलांग लगाई। इस चौतरफा तेजी के कारण बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के बढ़े हुए भरोसे और लिक्विडिटी के प्रवाह को पूरी तरह प्रदर्शित करता है। बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने भी लार्जकैप शेयरों के नक्शेकदम पर चलते हुए लंबी छलांग लगाई, जिससे छोटे और खुदरा निवेशकों के पोर्टफोलियो में भी बड़ा उछाल देखा गया। अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद एशिया के अन्य प्रमुख बाजारों जैसे जापान के निक्केई, हांगकांग के हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया के कोस्पी में भी दो से तीन प्रतिशत तक की भारी तेजी दर्ज की गई, जिसने भारतीय दलाल स्ट्रीट के बुल रन को अतिरिक्त ईंधन प्रदान किया।

सेक्टरवार प्रदर्शन के लिहाज से देखें तो एविएशन यानी विमानन क्षेत्र के शेयरों में आज सबसे ज्यादा चमक देखने को मिल रही है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से विमान ईंधन (एटीएफ) की लागत में भारी कटौती होने की उम्मीद है, जो इन कंपनियों के परिचालन मुनाफे को सीधे तौर पर बढ़ाएगी। इसके साथ ही वित्तीय और बैंकिंग क्षेत्र के सूचकांकों जैसे बैंक निफ्टी में भी जबरदस्त लिवाली का माहौल बना हुआ है, क्योंकि कच्चे तेल के सस्ते होने से मुद्रास्फीति (महंगाई) पर नियंत्रण पाना आसान होगा और केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों को भी इस वैश्विक समझौते से बड़ा सहारा मिला है, क्योंकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में आई स्थिरता से कच्चे माल की उपलब्धता आसान होगी और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली लागत और अनिश्चितता काफी हद तक कम हो जाएगी। बाजार के इस आक्रामक और सकारात्मक रुख के पीछे अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल यानी ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई भारी गिरावट एक सबसे बड़ा और प्रमुख कारक साबित हो रही है। शांति समझौते के लागू होने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के हटने के बाद खाड़ी देशों से तेल का निर्यात सुचारू रूप से शुरू होने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जिसके चलते कच्चे तेल के वैश्विक दाम में प्रति बैरल कई डॉलर की तात्कालिक कमी देखी गई है। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल का सस्ता होना हमेशा से एक बड़े उत्प्रेरक की तरह काम करता है, क्योंकि इससे देश के भीतर परिवहन लागत कम होती है, राजकोषीय दबाव घटता है और भारतीय रुपये को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होने में सीधी मदद मिलती है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भी पिछले कई दिनों से जारी अपनी बिकवाली के सिलसिले को पूरी तरह रोकते हुए भारतीय बाजार में शुद्ध खरीदार के रूप में वापसी की है, जिसने बाजार की इस तेजी को और अधिक मजबूती दी है।

इस ऐतिहासिक कारोबारी सत्र के दौरान बाजार के भीतर शॉर्ट कवरिंग का भी एक बड़ा दौर देखा गया, जहां मंदी की उम्मीद में बैठे ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशन को तेजी से काटना शुरू कर दिया, जिससे सूचकांकों की ऊपर जाने की रफ्तार और अधिक तेज हो गई। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, लार्सन एंड टुब्रो और इंटरग्लोब एविएशन जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों ने बाजार को ऊपरी स्तरों पर बनाए रखने में सबसे महत्वपूर्ण योगदान दिया। दूसरी तरफ, केवल आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) और पारंपरिक रूप से सुरक्षित माने जाने वाले फॉर्मा क्षेत्र के कुछ शेयरों में ही हल्की मुनाफावसूली या सुस्ती देखी गई, क्योंकि निवेशक अब अपना पैसा रक्षात्मक शेयरों से निकालकर उच्च विकास वाले चक्रीय (साइक्लिकल) और संवेदनशील क्षेत्रों में लगाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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