Samastipur DCLR Bribery Case: रोसड़ा DCLR और नौकर को जेल, आवास से मिले थे ₹15.82 लाख नकद 

Samastipur DCLR Bribery Case: समस्तीपुर के रोसड़ा की डीसीएलआर और उनके नौकर को मुजफ्फरपुर की विशेष निगरानी अदालत ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पढ़ें रिपोर्ट।

Aug 29, 2026 - 12:40
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Samastipur DCLR Bribery Case: रोसड़ा DCLR और नौकर को जेल, आवास से मिले थे ₹15.82 लाख नकद 
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बिहार के समस्तीपुर जिले में प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के बाद रोसड़ा की भूमि सुधार उप-समाहर्ता (डीसीएलआर) और उनके घरेलू सहायक को मुजफ्फरपुर स्थित विशेष निगरानी अदालत के आदेश पर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने अधिकारी को दो लाख रुपये की कथित रिश्वत और एक वाशिंग मशीन लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। इसके उपरांत सरकारी आवास पर की गई सघन तलाशी में 13.82 लाख रुपये की अतिरिक्त नकदी बरामद हुई, जिससे कुल बरामदगी 15.82 लाख रुपये तक पहुंच गई। इस कार्रवाई के बाद से जिले के प्रशासनिक और राजस्व महकमे में हलचल मची हुई है, जबकि जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क की विस्तृत पड़ताल में जुटी है। 

समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अनुमंडल में पदस्थापित भूमि सुधार उप-समाहर्ता (डीसीएलआर) और उनके घरेलू सहायक पर भूमि विवाद से जुड़े मामले में पक्ष में फैसला सुनाने के नाम पर घूस मांगने का आरोप लगा था। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने गुप्त सत्यापन के बाद योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया। छापेमारी के दौरान और उसके बाद आवास की तलाशी में 15.82 लाख रुपये की कुल नकदी बरामद की गई। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए दोनों को मुजफ्फरपुर स्थित विशेष निगरानी न्यायालय (उत्तर बिहार) में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 

विभूतिपुर थाना क्षेत्र के एक स्थानीय निवासी ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि भूमि विवाद निराकरण से जुड़े एक वाद में उनके पक्ष में निर्णय देने के एवज में अधिकारी और उनके सहयोगी द्वारा अवैध राशि की मांग की जा रही थी। शिकायत का प्राथमिक सत्यापन कराने के बाद एजेंसी के स्तर पर धावा दल का गठन किया गया।

तय रणनीति के तहत रोसड़ा स्थित सरकारी आवास पर परिवादी द्वारा कथित रिश्वत की पहली किस्त के रूप में दो लाख रुपये नकद और एक वाशिंग मशीन सौंपी गई। इसी दौरान निगरानी की टीम ने मौके पर दबिश देकर दोनों को पकड़ लिया। इसके बाद आवासीय परिसर की गहन तलाशी ली गई, जिसमें विभिन्न कमरों से 13.82 लाख रुपये की अतिरिक्त नकदी, जमीन से जुड़ी कई संवेदनशील फाइलें और वित्तीय दस्तावेज बरामद किए गए। 

विशेष लोक अभियोजक के अनुसार, जांच एजेंसी ने अदालत के समक्ष पर्याप्त साक्ष्य, बरामदगी सूची और जब्ती के दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को जेल भेजने का आदेश दिया। निगरानी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बरामद नकदी के स्रोतों और बैंक खातों के लेन-देन की गहन वित्तीय ऑडिट कराई जा रही है।

दूसरी ओर, हिरासत में लिए जाने के दौरान अधिकारी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए इसे एक साजिश का हिस्सा करार दिया था। मामले के कानूनी प्रतिनिधि अदालत में बचाव पक्ष के तर्क रखने की तैयारी कर रहे हैं।

इस बड़ी कार्रवाई का सीधा असर समस्तीपुर और आसपास के जिलों के राजस्व एवं भूमि सुधार कार्यालयों के कामकाज पर देखा जा रहा है। आम नागरिकों और जमीन से जुड़े विवादों के पक्षकारों के बीच इस तरह की कार्रवाई से यह संदेश गया है कि भ्रष्टाचार की शिकायतों पर एजेंसियां सक्रिय हैं।

वहीं प्रशासनिक हलकों में आंतरिक सतर्कता और निगरानी तंत्र को मजबूत करने को लेकर विमर्श तेज हो गया है। कई अन्य लंबित फाइलों और निर्णयों की भी आंतरिक समीक्षा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। 

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो अब बरामद रुपयों के वास्तविक स्रोत, अघोषित संपत्तियों, बैंक लॉकरों और निवेश से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रहा है। मामले में औपचारिक चार्जशीट दाखिल करने के लिए साक्ष्यों का संकलन तेजी से किया जा रहा है।

अदालत में पेशी के बाद अब विभागीय स्तर पर भी संबंधित अधिकारी के खिलाफ प्रशासनिक निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया नियमानुसार शुरू की जाएगी।

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