Swatantra Bhardwaj CJP Protest Controversy: जंतर-मंतर पर मारपीट के दावे पर विवाद, दिल्ली पुलिस ने खोपड़ी फटने की खबर को बताया बेबुनियाद

Swatantra Bhardwaj CJP Controversy: जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान हमले के दावों पर दिल्ली पुलिस ने बयान जारी कर गंभीर चोटों की खबरों को खारिज कर दिया है।

Sep 4, 2026 - 11:44
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Swatantra Bhardwaj CJP Protest Controversy: जंतर-मंतर पर मारपीट के दावे पर विवाद, दिल्ली पुलिस ने खोपड़ी फटने की खबर को बताया बेबुनियाद
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राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार पर हुए हमले का मामला एक बार फिर गरमा गया है। इंटरनेट मीडिया पर एक पॉडकास्ट की वीडियो क्लिप वायरल होने के बाद यह विवाद उपजा, जिसमें खुद को दक्षिणपंथी इंफ्लुएंसर बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज ने दावा किया कि उसने प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार का सिर फोड़ दिया था और राजनीतिक प्रभाव के कारण उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हुई। इस वायरल क्लिप के सामने आने और विपक्षी नेताओं के निशाने पर आने के बाद दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस ने सिर की हड्डी फटने या गंभीर चोट आने की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बेबुनियाद बताया है। पुलिस का कहना है कि यह चोट किसी हथियार से नहीं बल्कि कड़े से लगी थी और मामले में नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा चुकी है।

पूरा विवाद जंतर-मंतर पर 23 जून 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान हुई हाथापाई से जुड़ा है। आरोप है कि प्रदर्शन स्थल पर वीडियो बनाने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद मारपीट में बदल गया था। इसमें प्रदर्शन में शामिल निशु आजाद के पिता संजय कुमार के सिर पर चोट आ गई थी। हाल ही में एक पॉडकास्ट का वीडियो इंटरनेट पर प्रसारित हुआ, जिसमें आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को यह कहते सुना गया कि उसने पीड़िता के पिता का सिर फोड़ दिया था और उस पर गंभीर धाराएं बन सकती थीं, लेकिन इसके बावजूद उसे जेल नहीं जाना पड़ा। इस बयान के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

संसद मार्ग थाने में दर्ज प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, 23 जून की शाम को संजय कुमार अपनी बेटी और एक साथी के साथ जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में पहुंचे थे। शाम करीब 5:30 बजे जब वे अपने मोबाइल फोन से वीडियो बना रहे थे, तभी वीडियो बनाने की बात को लेकर कुछ युवकों से बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते बहस हाथापाई में बदल गई और आरोप है कि युवकों ने संजय कुमार पर हमला कर दिया।

घटना के बाद पुलिस ने मौके से आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को हिरासत में लिया था। पीड़ित को राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी चिकित्सकीय जांच (MLC) की गई। मामले में पुलिस ने धारा 115(2), 126(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई थी। हाल ही में जारी पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने दावा किया था कि उसे राजनीतिक संपर्कों की वजह से तुरंत राहत मिल गई थी, जिसने इस पूरे मामले को एक नए विवाद में बदल दिया।

पॉडकास्ट क्लिप वायरल होने के बाद विपक्षी दलों ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, विवाद बढ़ता देख स्वतंत्र भारद्वाज ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके बयान को संदर्भ से बाहर जाकर देखा जा रहा है। भारद्वाज का दावा है कि जंतर-मंतर पर 10-15 लोगों ने उन्हें घेर लिया था और उन्होंने केवल अपनी आत्मरक्षा (Self-Defence) में कदम उठाया था, जिसके दौरान यह दुर्घटना हुई। उन्होंने यह भी कहा कि पॉडकास्ट में कही गई बातें व्यंग्यात्मक (Sarcastic) लहजे में थीं और किसी राजनीतिक दबाव के चलते छूटने का दावा गलत है।

वहीं, पीड़ित परिवार और CJP संगठन ने आरोपी के खिलाफ सख्त धाराओं में कार्रवाई की मांग की है और दिल्ली पुलिस पर ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है।

इस मामले के चलते दिल्ली पुलिस की निष्पक्षता और जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े होने लगे थे। इंटरनेट मीडिया पर चल रहे तर्कों और आरोपों को देखते हुए दिल्ली पुलिस के नई दिल्ली जिला उपायुक्त (DCP) कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक विस्तृत बयान जारी किया।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि संजय कुमार को आई चोट किसी धारदार या घातक हथियार से नहीं, बल्कि हाथापाई के दौरान आरोपी द्वारा पहने गए लोहे के कड़े से लगी थी। आरएमएल अस्पताल की मेडिकल लीगल रिपोर्ट के मुताबिक चोटें साधारण प्रकृति (Simple Injuries) की थीं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि 'खोपड़ी में दरार' या अत्यधिक गंभीर चोट लगने की खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद और तथ्यों से परे हैं।

दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि मामले में निष्पक्षता से कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को कानून के तहत नोटिस जारी कर पूछताछ की जा चुकी है। पुलिस का कहना है कि किसी भी तरह के अनुचित राजनीतिक प्रभाव या हस्तक्षेप का आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत है।

मामले की जांच पूरी की जा रही है और पुलिस जल्द ही संबंधित सक्षम अदालत के समक्ष अपनी चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल करेगी। दूसरी ओर, CJP और पीड़ित पक्ष ने पुलिस स्टेशन जाकर आगे की कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है।

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