पहाड़ों पर आफत की बारिश: शिमला में होटलों और पार्किंग में गिरे भारी-भरकम पेड़, मलबे की चपेट में आए कई घर और गाड़ियां!

Shimla Rain News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भारी बारिश ने तबाही मचाई है। कई जगहों पर पेड़ गिरने और मलबे के कारण घरों, दुकानों और गाड़ियों को भारी नुकसान पहुंचा है।

Jun 27, 2026 - 11:24
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पहाड़ों पर आफत की बारिश: शिमला में होटलों और पार्किंग में गिरे भारी-भरकम पेड़, मलबे की चपेट में आए कई घर और गाड़ियां!
Shimla Rain Havoc
  • Shimla Rain Havoc: शिमला में आफत की बारिश, होटल और पार्किंग पर गिरे पेड़, घरों-दुकानों में घुसा मलबा
  • Himachal Weather Update: शिमला में मूसलाधार बारिश से तबाही, कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त, भूस्खलन के बाद रास्तों पर मलबा
  • Shimla Heavy Rain Damage: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भारी बारिश से भारी नुकसान, जनजीवन अस्त-व्यस्त

हिमाचल प्रदेश की राजधानी और प्रसिद्ध पर्यटन स्थल शिमला में पिछले 24 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश आम जनजीवन के लिए बड़ी आफत बनकर बरसी है। आज (27 जून 2026) सुबह हुए भारी भूस्खलन और तेज हवाओं के कारण शहर के कई रिहायशी इलाकों, होटलों और सार्वजनिक पार्किंग क्षेत्रों में भारी-भरकम पेड़ धराशायी हो गए। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से कई मुख्य सड़कों पर कीचड़युक्त मलबा जमा हो गया है, जो बहकर स्थानीय घरों और दुकानों के भीतर तक घुस गया। पहाड़ियों से गिरे पत्थरों और मलबे की चपेट में आने से पार्किंग में खड़ी दर्जनों गाड़ियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में जुट गई हैं।

यह पूरा घटनाक्रम उत्तर भारत में सक्रिय हुए मानसून के चलते पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश के शिमला में हुई भारी तबाही से जुड़ा है। जून के आखिरी सप्ताह में उम्मीद से ज्यादा तेज बारिश होने के कारण पहाड़ों की मिट्टी ढीली हो गई, जिसके परिणामस्वरूप शहर के विभिन्न हिस्सों में भूस्खलन (Landslide) और पेड़ गिरने की सिलसिलेवार घटनाएं दर्ज की गई हैं। इस अचानक आई आपदा के चलते न केवल स्थानीय निवासियों की निजी और व्यावसायिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है, बल्कि वीकेंड पर छुट्टियां मनाने आए पर्यटकों के बीच भी अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।

शिमला और उसके आसपास के इलाकों में कल रात से ही मूसलाधार बारिश का सिलसिला शुरू हो गया था। सुबह होते-होते बारिश की तीव्रता इतनी अधिक बढ़ गई कि शहर की ड्रेनेज प्रणाली पूरी तरह चोक हो गई। इसके बाद ऊपरी पहाड़ियों से भारी मात्रा में पानी के साथ गाद और मलबा (Debris) नीचे की ओर बहने लगा।

शहर के मुख्य सर्कुलर रोड, माल रोड के समीपवर्ती क्षेत्रों और संजौली व ढली जैसे रिहायशी इलाकों में स्थिति सबसे खराब देखी गई। एक प्रसिद्ध होटल के परिसर और उससे सटी पार्किंग में देवदार के विशालकाय पेड़ उखड़कर गिर गए, जिससे वहां खड़ी पर्यटकों और स्थानीय लोगों की गाड़ियां मलबे के नीचे दब गईं। इसके साथ ही, पहाड़ियों के नीचे बनी कई दुकानों और मकानों के निचले तल में भारी मात्रा में कीचड़ और पानी घुस गया, जिससे घरेलू सामान और व्यावसायिक स्टॉक पूरी तरह बर्बाद हो गया। गनीमत यह रही कि भूस्खलन तड़के और सुबह के समय हुआ जब सड़कों पर आवाजाही कम थी, जिससे एक बड़ा मानवीय हादसा टल गया।

इस आपदा के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार और शिमला जिला प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आ गया है। जिला उपायुक्त (DC) ने स्थिति का जायजा लेते हुए कहा, "भारी बारिश के कारण शहर के कुछ हिस्सों में पेड़ गिरने और संपत्तियों को नुकसान पहुंचने की सूचना मिली है। नगर निगम, लोक निर्माण विभाग (PWD) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को मौके पर तैनात किया गया है। मलबे को हटाने और यातायात को सुचारू करने के प्रयास युद्ध स्तर पर जारी हैं।"

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगले 48 घंटों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी रहेगा। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को अनावश्यक रूप से यात्रा न करने और नदी-नालों के साथ-साथ संवेदनशील ढलानों वाले इलाकों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है।

इस मूसलाधार बारिश का शिमला के आर्थिक और सामाजिक ढांचे पर गहरा असर पड़ा है:

  • यातायात ठप: मलबे और पेड़ों के सड़कों पर आ जाने से शिमला-कालका राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कई आंतरिक संपर्क मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गए हैं, जिससे सेब उत्पादकों और दैनिक यात्रियों को भारी असुविधा हो रही है।

  • पर्यटन पर ब्रेक: पर्यटन सीजन के बीच इस तरह की तबाही से होटलों की बुकिंग रद्द होने लगी है, जिससे स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को बड़ा आर्थिक झटका लगा है।

  • बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त: बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर गिरने से शहर के कई इलाकों में बिजली और पेयजल आपूर्ति बाधित हो गई है।

फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान बंद रास्तों को खोलने और मलबे में दबी गाड़ियों को सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित है। क्रेन और जेसीबी (JCB) मशीनों की मदद से पेड़ों को काटकर रास्तों से हटाया जा रहा है। जिन घरों और दुकानों में पानी भरा है, वहां से पानी निकालने के लिए पंप लगाए गए हैं। चूंकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और अधिक बारिश का अनुमान जताया है, इसलिए संवेदनशील स्थानों पर चौबीसों घंटे निगरानी के लिए विशेष कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए गए हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।

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