'मुझे बचा लो, दम घुट रहा है'- कंक्रीट के ढेर के नीचे फंसे युवक ने फोन पर रोते हुए लगाई मदद की गुहार

चूंकि साकेत का यह इलाका कोचिंग सेंटरों और छात्र आवासों के लिए काफी जाना जाता है, इसलिए इस इमारत में भी कई छात्र किराए पर कमरा लेकर रह रहे थे। हादसे के तुरंत बाद विभिन्न शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले दर्जनों छात्र अपने लापता दोस्तों की तलाश में घटनास्थल प

May 31, 2026 - 11:18
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'मुझे बचा लो, दम घुट रहा है'- कंक्रीट के ढेर के नीचे फंसे युवक ने फोन पर रोते हुए लगाई मदद की गुहार
'मुझे बचा लो, दम घुट रहा है'- कंक्रीट के ढेर के नीचे फंसे युवक ने फोन पर रोते हुए लगाई मदद की गुहार
  • दिल्ली के साकेत में भरभराकर ढही बहुमंजिला इमारत, मलबे के नीचे दबी कई मासूम जिंदगियों को बचाने की जंग जारी
  • हादसे के बाद इलाके में मचा हाहाकार, अवैध निर्माण और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल को लेकर उठे गंभीर सवाल

देश की राजधानी दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में स्थित साकेत इलाके से एक बेहद हृदयविदारक और दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरी दिल्ली को हिलाकर रख दिया है। एक बहुमंजिला आवासीय इमारत के अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह जाने से मलबे के नीचे कई जिंदगियां दफन हो गईं, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। कंक्रीट और लोहे के सरियों के इस विशाल ढेर के बीच से आ रही अपनों की सिसकियों और चीखों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दी हैं। आपदा प्रबंधन की टीमें और स्थानीय लोग मिलकर मलबे को हटाने के काम में जुटे हैं, जबकि समय बीतने के साथ ही अंदर फंसे लोगों की सांसें भी उखड़ने लगी हैं और अपनों को खोने का डर बढ़ता जा रहा है। साकेत के इस रिहायशी इलाके में स्थित एक पुरानी और जर्जर हो चुकी इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे आस-पास के क्षेत्र में भूकंप जैसा कंपन महसूस हुआ। घटना के वक्त इमारत के भीतर कई लोग मौजूद थे, जिन्हें संभलने का न्यूनतम समय भी नहीं मिल सका और पूरी संरचना मलबे के एक विशाल ढेर में तब्दील हो गई। चीख-पुकार सुनकर आस-पास के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े और पुलिस व दमकल विभाग को इस भयानक त्रासदी की सूचना दी। शुरुआती समय में स्थानीय निवासियों ने अपने स्तर पर ही कंक्रीट के स्लैब और मलबे को हटाना शुरू किया, ताकि नीचे दबे लोगों को जल्द से जल्द हवा मिल सके और उनकी जान बचाई जा सके।

इस पूरे हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू तब सामने आया जब मलबे के भीतर फंसे एक युवक ने अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए बाहर मौजूद अपने परिचितों को कॉल किया। उसने अत्यंत रुंधे हुए गले और हांफती हुई आवाज में रोते हुए कहा कि उसे तुरंत बाहर निकाला जाए क्योंकि अंदर ऑक्सीजन की भारी कमी हो रही है और उसका दम घुट रहा है। इस दर्दनाक पुकार को सुनने के बाद बाहर खड़े परिजनों और दोस्तों में चीख-पुकार मच गई और वे मलबे को अपने हाथों से ही हटाने की कोशिश करने लगे। इस फोन कॉल के माध्यम से बचाव दल को मलबे के भीतर फंसे लोगों की सटीक लोकेशन का अंदाजा लगाने में काफी मदद मिली, जिसके बाद उस विशिष्ट हिस्से पर ध्यान केंद्रित किया गया।

चूंकि साकेत का यह इलाका कोचिंग सेंटरों और छात्र आवासों के लिए काफी जाना जाता है, इसलिए इस इमारत में भी कई छात्र किराए पर कमरा लेकर रह रहे थे। हादसे के तुरंत बाद विभिन्न शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले दर्जनों छात्र अपने लापता दोस्तों की तलाश में घटनास्थल पर एकत्र हो गए और बचाव कार्य में हाथ बंटाने लगे। छात्र अपने साथियों के मोबाइल नंबरों पर लगातार फोन लगा रहे हैं ताकि मलबे के नीचे से आने वाली रिंगटोन की आवाज के सहारे उनकी स्थिति का पता लगाया जा सके। कई छात्रों के मोबाइल फोन स्विच ऑफ आ रहे हैं, जिससे उनके सहपाठियों और सगे-संबंधियों की चिंताएं चरम पर पहुंच गई हैं और वे बदहवास होकर प्रशासनिक अधिकारियों से जानकारी मांग रहे हैं।

हादसे की भयावहता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और नागरिक सुरक्षा की टीमों को क्रेन और अत्याधुनिक लाइफ-डिटेक्टर उपकरणों के साथ मौके पर बुलाया गया है। मलबे के भारी पत्थरों को काटने के लिए हाइड्रोलिक कटर का उपयोग किया जा रहा है, ताकि नीचे दबे लोगों को कोई अतिरिक्त चोट न पहुंचे। कंक्रीट के ढेरों के बीच छोटे-छोटे छेद करके ऑक्सीजन के पाइप अंदर डाले जा रहे हैं ताकि फंसे हुए लोगों को सांस लेने में आसानी हो सके। एम्बुलेंस और डॉक्टरों की एक विशेष टीम को भी घटनास्थल पर ही मुस्तैद रखा गया है, ताकि मलबे से बाहर निकाले जाने वाले किसी भी व्यक्ति को तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता दी जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, संकरी गलियों के कारण भारी क्रेन और मलबे उठाने वाली मशीनों को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस वजह से बचाव कार्य की गति प्रभावित हुई है और राहत दल को मैनुअल उपकरणों का अधिक सहारा लेना पड़ रहा है। आने वाले कुछ घंटे मलबे के भीतर दबे लोगों की जीवन रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

इस दर्दनाक हादसे ने दिल्ली के रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माण और प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस इमारत में बिना किसी मजबूत बुनियाद और स्वीकृत नक्शे के अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण कर लिया गया था, जिसकी शिकायत पहले भी की गई थी। निर्माण कार्य में बेहद घटिया दर्जे की सामग्री, जैसे कमजोर सीमेंट और पतले सरियों का इस्तेमाल किया गया था, जो इस भारी भरकम ढांचे का वजन संभालने में पूरी तरह अक्षम थे। भ्रष्ट व्यवस्था और बिल्डरों की मिलीभगत के कारण ही आज इतने बड़े पैमाने पर मासूम लोगों की जान जोखिम में पड़ गई है।

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