बहू ने 85 वर्षीय ससुर की बेरहमी से की पिटाई, फिर पति को जबरन जहर खिलाकर खुद भी किया जानलेवा आत्मघाती प्रयास
मध्य प्रदेश के विंध्य अंचल के अंतर्गत आने वाले नवगठित मैहर जिले के नादन थाना क्षेत्र से एक बेहद ही हृदयविदारक, स्तब्ध
- मध्य प्रदेश के नवगठित मैहर जिले के नादन गांव में जमीन विवाद और बुजुर्ग पिता के भरण-पोषण को लेकर उपजा पारिवारिक कलह खूनी संघर्ष में तब्दील
- नादन देहात थाना क्षेत्र में मची भारी सनसनी, गंभीर हालत में पति-पत्नी रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर, पुलिस ने विभिन्न धाराओं में दर्ज किया आपराधिक मुकदमा
मध्य प्रदेश के विंध्य अंचल के अंतर्गत आने वाले नवगठित मैहर जिले के नादन थाना क्षेत्र से एक बेहद ही हृदयविदारक, स्तब्ध कर देने वाली और पारिवारिक रिश्तों को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। नादन गांव में रहने वाले एक संपन्न परिवार के भीतर बुजुर्ग पिता की देखभाल की जिम्मेदारी उठाने और कृषि भूमि के मालिकाना हक के बंटवारे को लेकर पिछले कई महीनों से सुलग रही असंतोष की आग शुक्रवार को अचानक एक भयानक और खूनी हिंसा के रूप में भड़क उठी। संपत्ति के लालच और पारिवारिक ईर्ष्या से अंधी हुई एक बहू ने न केवल मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखकर अपने 85 वर्षीय लाचार ससुर की लाठी-डंडों से बेरहमी से पिटाई कर दी, बल्कि इस खौफनाक वारदात के तुरंत बाद उसने अपने सगे पति को कथित तौर पर जबरन जहरीला पदार्थ खिला दिया और स्वयं भी वही जहर गटक कर अपनी जीवन लीला समाप्त करने का आत्मघाती प्रयास किया। इस दोहरे खौफनाक कदम की खबर जैसे ही गांव की गलियों में फैली, पूरे नादन ग्रामीण इलाके में तीव्र गति से हड़कंप, दहशत और गहरी सनसनी का माहौल व्याप्त हो गया तथा बड़ी संख्या में डरे हुए ग्रामीण घटनास्थल पर एकत्र हो गए।
इस दुखद और जघन्य घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर यदि गौर किया जाए तो इस पूरे विवाद की जड़ें जमीन की मिल्कियत और बुजुर्ग माता-पिता के प्रति संतानों की उदासीनता से गहराई से जुड़ी हुई हैं। गांव के सम्मानित और वृद्ध नागरिक 85 वर्षीय छोटे लाल गौतम के पास कुल मिलाकर करीब ढाई एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि थी, जिसे उन्होंने अपनी बढ़ती उम्र और अस्वस्थता को देखते हुए कुछ समय पहले ही अपने तीनों बेटों के बीच पूरी तरह से बराबर-बराबर हिस्सों में कानूनी तौर पर बांट दिया था। चूंकि छोटे लाल गौतम अब शारीरिक रूप से पूरी तरह असमर्थ हो चुके थे और उन्हें चौबीसों घंटे सहारे की आवश्यकता थी, इसलिए गांव के प्रबुद्ध नागरिकों और स्थानीय पंचायत के पंचों के हस्तक्षेप के बाद सामाजिक स्तर पर एक लिखित समझौता तैयार किया गया था। इस पंचायत स्तरीय सामाजिक व्यवस्था के तहत यह सर्वसम्मति से तय किया गया था कि तीनों बेटे और उनकी पत्नियां बारी-बारी से एक-एक महीने तक अपने वृद्ध पिता को अपने पास रखेंगे, उनके भोजन-दवा का पूरा प्रबंध करेंगे और उनकी सेवा-सुश्रुषा की संपूर्ण जिम्मेदारी उठाएंगे।
परंतु, जमीन का मालिकाना हक अपने नाम ट्रांसफर होते ही बेटों और बहुओं के रंग बदलने लगे और पंचायत द्वारा बनाई गई यह पवित्र भरण-पोषण की व्यवस्था कागजों तक ही सिमट कर रह गई। छोटे लाल गौतम के मंझले बेटे की पत्नी इस व्यवस्था को लेकर लंबे समय से असंतुष्ट थी और उसका मानना था कि पिता की सेवा का सबसे ज्यादा वित्तीय और मानसिक बोझ उसी के हिस्से आ रहा है, जबकि जमीन सभी को बराबर मिली है। इसी बात को लेकर घर के भीतर रोजाना सुबह-शाम तीखी बहस, गाली-गलौज और मानसिक प्रताड़ना का दौर चलता रहता था, जिसने अंततः शुक्रवार को एक हिंसक और खूनी मोड़ ले लिया। शुक्रवार की सुबह जब बुजुर्ग छोटे लाल गौतम ने नियमानुसार भोजन और दवा की मांग की, तो तैश में आई बहू अपना मानसिक संतुलन खो बैठी और उसने घर में रखी लाठी उठाकर उस असहाय और वृद्ध व्यक्ति पर ताबड़तोड़ प्रहार करना शुरू कर दिया, जिससे बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े और चीखने-चिल्लाने लगे। ग्रामीण अंचलों में जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों और बुजुर्गों की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के चक्कर में सगे रिश्तों के भीतर होने वाली हत्या और आत्महत्या की ऐसी प्रवृत्तियां वर्तमान समय में सामाजिक ताने-बाने के लिए एक बहुत गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।
बुजुर्ग पिता की इस क्रूर पिटाई को देखकर जब उसका पति अपनी पत्नी को शांत करने और अपने पिता को बचाने के लिए बीच-बचाव करने आगे आया, तो उन्माद से भरी महिला ने अपने पति पर ही हमला बोल दिया। घर के भीतर मचे इस कोहराम के बीच महिला ने पहले से लाकर रखे गए कृषि कार्य में उपयोग होने वाले अत्यधिक घातक कीटनाशक जहर की बोतल निकाली और अपने पति को शारीरिक रूप से काबू में करते हुए उसे जबरन वह जहरीला पदार्थ पिला दिया। पति को तड़पता देख और कानून के शिकंजे के साथ-साथ ग्रामीणों के आक्रोश के डर से घबराकर महिला ने बिना एक पल गंवाए उस बची हुई जहरीली दवा को खुद भी पूरी तरह से गटक लिया। कुछ ही मिनटों के भीतर जहर के तीव्र असर के कारण पति और पत्नी दोनों के मुंह से झाग निकलने लगा और वे दोनों घर के आंगन में ही अचेत होकर गिर पड़े, जिसके बाद घर में मौजूद बच्चों के रोने की आवाज सुनकर पड़ोसियों ने तुरंत घर के भीतर प्रवेश किया।
घर के भीतर का यह भयावह और रोंगटे खड़े कर देने वाला नजारा देखकर ग्रामीणों के पैरों तले जमीन खिसक गई और उन्होंने बिना कोई समय गंवाए इस सामूहिक त्रासदी की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस और एम्बुलेंस सेवा को दी। मौके पर पहुंची नादन देहात थाने की पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए गंभीर रूप से घायल और अचेत पड़े पति-पत्नी को तुरंत नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद भी उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। दोनों की नाजुक और चिंताजनक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों के पैनल ने उन्हें बेहतर और गहन चिकित्सा सुविधा के लिए तुरंत रीवा के संजय गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लिए रेफर कर दिया, जहां वर्तमान में दोनों सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में वेंटिलेटर सपोर्ट पर जीवन और मृत्यु के बीच बेहद कठिन जंग लड़ रहे हैं।
इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले की कानूनी और प्रशासनिक विधिक प्रक्रियाओं को लेकर मैहर के अनुमंडल पुलिस अधिकारी ने साफ किया है कि पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम को अत्यंत गंभीरता से लिया है। घायल बुजुर्ग पिता छोटे लाल गौतम के लिखित बयानों और ग्रामीणों के चश्मदीद साक्ष्यों के आधार पर आरोपी बहू के खिलाफ घरेलू हिंसा, वरिष्ठ नागरिकों के उत्पीड़न, जानलेवा हमला करने और अपने पति को जहर देकर हत्या करने के प्रयास जैसी विभिन्न गंभीर और गैर-जमानती विधिक धाराओं के तहत मामला पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस की एक विशेष टीम वर्तमान में रीवा मेडिकल कॉलेज में तैनात है ताकि जैसे ही दोनों आरोपियों को होश आए, उनके मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज किए जा सकें और इस खौफनाक साजिश के पीछे के सभी तकनीकी और वास्तविक कारणों को कानूनी तौर पर स्थापित किया जा सके।
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