दिल्ली-एनसीआर में मौसम का यू-टर्न: तीन साल में सबसे ठंडा रहा अप्रैल का यह मंगलवार।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंगलवार का दिन मौसम के लिहाज से बेहद खास रहा। सुबह से ही सूरज के दर्शन नहीं हुए और घने बादलों की चादर

Apr 8, 2026 - 15:37
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दिल्ली-एनसीआर में मौसम का यू-टर्न: तीन साल में सबसे ठंडा रहा अप्रैल का यह मंगलवार।
दिल्ली-एनसीआर में मौसम का यू-टर्न: तीन साल में सबसे ठंडा रहा अप्रैल का यह मंगलवार।
  • बादल और बारिश ने छीनी गर्मी की तपिश: दिल्ली में सामान्य से कई डिग्री नीचे गिरा तापमान
  • वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का डबल अटैक: एनसीआर के शहरों में झमाझम बारिश से लौटी ठंडक

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंगलवार का दिन मौसम के लिहाज से बेहद खास रहा। सुबह से ही सूरज के दर्शन नहीं हुए और घने बादलों की चादर ने पूरे शहर को अपनी आगोश में ले लिया। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, यह पिछले तीन सालों में अप्रैल महीने का सबसे कम अधिकतम तापमान वाला दिन दर्ज किया गया है। आमतौर पर अप्रैल के पहले सप्ताह तक दिल्ली का तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच जाता है, लेकिन इस बार सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण स्थिति पूरी तरह विपरीत रही। ठंडी हवाओं के चलने और लगातार हो रही बूंदाबांदी ने वातावरण में नमी बढ़ा दी, जिससे दिन के समय भी लोगों को ठिठुरन का एहसास हुआ।

तापमान में आई इस भारी गिरावट का मुख्य कारण उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर बना एक चक्रवाती परिसंचरण तंत्र है। इसके प्रभाव से अरब सागर से आने वाली नमी वाली हवाएं सीधे मैदानी इलाकों तक पहुंच रही हैं। मंगलवार को दिल्ली के सफदरजंग वेधशाला में अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग 10 से 12 डिग्री सेल्सियस नीचे रिकॉर्ड किया गया। यह गिरावट इतनी तीव्र थी कि दोपहर के समय भी तापमान फरवरी के अंतिम सप्ताह जैसा महसूस हो रहा था। गुरुग्राम और नोएडा में भी इसी तरह की स्थिति बनी रही, जहाँ तेज हवाओं की गति ने ठंडक को और अधिक बढ़ा दिया। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के बदलाव जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का संकेत हो सकते हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले 48 घंटों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है। विभाग का अनुमान है कि हिमालयी क्षेत्रों में हो रही भारी बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में ठंडी हवाओं के रूप में जारी रहेगा, जिससे अगले दो दिनों तक तापमान में बड़ी वृद्धि की संभावना नहीं है।

दिल्ली की वायु गुणवत्ता (AQI) में भी इस बारिश और तेज हवाओं के कारण बड़ा सुधार देखने को मिला है। पिछले कुछ दिनों से धूल भरी आंधियों और बढ़ते प्रदूषण के कारण हवा की गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई थी, लेकिन मंगलवार को हुई बारिश ने धूल के कणों को जमीन पर बैठा दिया। इसके परिणामस्वरूप, दिल्ली-एनसीआर के अधिकांश हिस्सों में वायु गुणवत्ता 'संतोषजनक' श्रेणी में दर्ज की गई। साफ आसमान और ठंडी हवाओं ने लोगों को प्रदूषण से बड़ी राहत दी है। हालांकि, इस बेमौसम बारिश ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, क्योंकि खेतों में तैयार खड़ी गेहूं की फसल के लिए यह पानी काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है।

परिवहन और यातायात की दृष्टि से देखें तो बारिश के कारण दिल्ली के निचले इलाकों में जलभराव की कुछ घटनाएं भी सामने आईं। मिंटो रोड, धौला कुआं और आईटीओ जैसे व्यस्त चौराहों पर वाहनों की रफ्तार धीमी रही। बादल छाए रहने के कारण दृश्यता (Visibility) भी सामान्य से कम थी, जिससे वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट्स का प्रयोग करना पड़ा। रेलवे और हवाई सेवाओं पर इसका आंशिक असर पड़ा, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति नियंत्रण में रही। लोग इस सुहावने मौसम का आनंद लेने के लिए पार्कों और इंडिया गेट जैसे पर्यटन स्थलों पर उमड़ पड़े, जहाँ सामान्य कामकाजी दिन होने के बावजूद भीड़ देखी गई।

मौसम के इस बदलाव ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी सतर्क रहने की सलाह देने पर मजबूर कर दिया है। अचानक गर्मी से ठंड की ओर हुए इस बदलाव के कारण वायरल इन्फेक्शन और फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। डॉक्टरों ने सुझाव दिया है कि इस बदलते मौसम में विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी बरतनी चाहिए और ठंडे पेय पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। चूंकि लोग मानसिक रूप से गर्मी के लिए तैयार थे, इसलिए तापमान में आई यह अचानक कमी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर सकती है। अस्पतालों में सर्दी-खांसी के मरीजों की संख्या में हल्की वृद्धि की खबरें भी मिल रही हैं।

दिल्ली-एनसीआर के अलावा पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी इसी तरह का मौसम बना हुआ है। पूरे उत्तर भारत में एक साथ सक्रिय हुए इस सिस्टम ने गर्मियों की शुरुआत को फिलहाल रोक दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, पहाड़ों पर एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ दस्तक दे रहे हैं, जिसके कारण मैदानी इलाकों में मौसम का यह मिजाज अभी कुछ दिन और बना रह सकता है। मंगलवार को दर्ज किया गया न्यूनतम तापमान भी सामान्य से काफी कम रहा, जिससे रातें और अधिक सर्द हो गईं। यह स्थिति उन लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण रही जो पहले ही अपने सर्दियों के कपड़े पैक कर चुके थे।

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