Khandwa Jansunwai: खंडवा जनसुनवाई में पहुंचा कुत्ता, नगर निगम के ₹40 लाख खर्च और 13 हजार डॉग बाइट पर उठे सवाल
Khandwa Jansunwai MP News: खंडवा कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान अनोखा नजारा दिखा। नगर निगम द्वारा श्वान नसबंदी पर खर्च 40 लाख रुपये और 13 हजार डॉग बाइट मामलों पर शिकायत दर्ज।

- MP News: खंडवा कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में अनोखा प्रदर्शन, श्वान को लेकर पहुंचे शिकायतकर्ता ने खोली नसबंदी दावों की पोल
- अनोखा विरोध: खंडवा जनसुनवाई में पहुंचा डॉगी, नगर निगम के 40 लाख रुपये खर्च और 13 हजार डॉग बाइट पर मचा हड़कंप
- Khandwa News: जनसुनवाई में श्वान को लेकर पहुंचा युवक, नगर निगम के 40 लाख रुपये के डॉग स्टरलाइजेशन बजट पर उठाए गंभीर सवाल
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान उस वक्त अधिकारी और आम नागरिक हतप्रभ रह गए जब एक शिकायतकर्ता अपने साथ एक श्वान (कुत्ते) को लेकर सीधे कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में पहुंच गया। शिकायतकर्ता ने खंडवा नगर निगम द्वारा आवारा श्वानों के नियंत्रण और नसबंदी के नाम पर खर्च किए गए लगभग 40 लाख रुपये के बजट में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। साथ ही शहर में सामने आए 13 हजार से अधिक डॉग बाइट के मामलों का हवाला देते हुए प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की मांग की। जनसुनवाई में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने इस अनोखे शिकायती पत्र को संज्ञान में लेते हुए संबंधित विभाग को आवश्यक जांच के निर्देश दिए हैं।
खंडवा कलेक्ट्रेट परिसर में हर सप्ताह आयोजित होने वाली जनसुनवाई आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान का प्रमुख मंच है। हालिया सत्र में आम फरियादियों के बीच एक युवक अपने साथ एक पालतू कुत्ते को लेकर पहुंचा। उसने अधिकारियों के समक्ष श्वान की ओर से प्रतीकात्मक रूप से आवेदन सौंपते हुए नगर निगम के दावों पर सवाल खड़े किए। शिकायतकर्ता का मुख्य बिंदु यह था कि नगर निगम प्रशासन द्वारा कागजों पर श्वानों की नसबंदी और टीकाकरण के नाम पर 40 लाख रुपये की भारी भरकम धनराशि व्यय की गई, लेकिन धरातल पर आवारा श्वानों की संख्या कम होने के बजाय निरंतर बढ़ रही है।
शिकायतकर्ता जब श्वान को साथ लेकर जनसुनवाई कक्ष के भीतर दाखिल हुआ तो एक पल के लिए सुरक्षाकर्मियों और अन्य आवेदकों के बीच कौतूहल का माहौल बन गया। युवक ने मंच पर बैठे प्रशासनिक अधिकारियों के सामने खड़े होकर तर्क दिया कि शहर में नगर पालिका निगम द्वारा श्वान नियंत्रण को लेकर जो आंकड़े दिए जा रहे हैं, वे वास्तविकता से कोसों दूर हैं।
शिकायती पत्र में उल्लेख किया गया कि स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय अस्पतालों के रिकॉर्ड के अनुसार शहर और आसपास के इलाकों में अब तक लगभग 13 हजार लोग डॉग बाइट का शिकार होकर एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच चुके हैं। यदि 40 लाख रुपये की राशि वास्तव में नसबंदी और शेल्टर प्रबंधन पर ईमानदारी से खर्च की गई थी, तो फिर सड़कों पर श्वानों का आतंक और काटने की घटनाएं इस कदर क्यों बढ़ीं। युवक ने आरोप लगाया कि श्वान नसबंदी के नाम पर टेंडर आवंटन और सत्यापन प्रक्रिया में घोर लापरवाही बरती गई है, जिसकी उच्चस्तरीय वित्तीय और तकनीकी जांच आवश्यक है।
इस अनोखे विरोध प्रदर्शन पर जनसुनवाई में उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों ने त्वरित संज्ञान लिया। अधिकारियों ने शिकायतकर्ता को आश्वस्त किया कि प्रस्तुत किए गए सभी तथ्यों और आंकड़ों की समीक्षा की जाएगी। नगर निगम आयुक्त और स्वास्थ्य शाखा के संबंधित अधिकारियों से इस मामले में स्पष्टीकरण और व्यय से संबंधित पूरी फाइल तलब करने की बात कही गई है।
दूसरी तरफ, नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि श्वान नसबंदी का कार्य एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के तहत निर्धारित मापदंडों के अनुसार ही किया जाता है। निगम का पक्ष है कि एजेंसी द्वारा किए गए कार्यों का समय-समय पर सत्यापन किया जाता है और बजट का उपयोग नियमानुसार ही हुआ है। हालांकि, नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि शहर के प्रमुख चौराहों और आवासीय कॉलोनियों में आवारा श्वानों की बढ़ती संख्या प्रशासनिक दावों पर निरंतर सवाल खड़े कर रही है।
जनसुनवाई में श्वान को लेकर पहुंचने की इस अनूठी घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। इस प्रदर्शन ने सीधे तौर पर शहरी निकायों में बजट के क्रियान्वयन, पारदर्शिता और जनसुरक्षा के मुद्दों को मुख्य विमर्श में ला खड़ा किया है। शहर के विभिन्न संगठनों ने अब नगर निगम से आवारा पशुओं और श्वानों की नसबंदी प्रक्रिया का भौतिक ऑडिट कराने और डॉग बाइट के बढ़ते मामलों पर तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग तेज कर दी है।
इस शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने नगर निगम की संबंधित शाखा को बजट व्यय और क्रियान्वित नसबंदी अभियानों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या कार्य में लापरवाही के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही शहर के संवेदनशील वार्डों में आवारा श्वानों के सुरक्षित प्रबंधन और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे से कार्ययोजना बनाने पर विचार किया जा रहा है।
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