जैसलमेर में DRDO गेस्ट हाउस मैनेजर गिरफ्तार- पाकिस्तान के लिए जासूसी का आरोप, सोशल मीडिया से भेजी गोपनीय जानकारी। 

Jaisalmer: राजस्थान के जैसलमेर से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के गेस्ट हाउस के मैनेजर महेंद्र ....

Aug 14, 2025 - 12:46
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जैसलमेर में DRDO गेस्ट हाउस मैनेजर गिरफ्तार- पाकिस्तान के लिए जासूसी का आरोप, सोशल मीडिया से भेजी गोपनीय जानकारी। 
जैसलमेर में DRDO गेस्ट हाउस मैनेजर गिरफ्तार- पाकिस्तान के लिए जासूसी का आरोप, सोशल मीडिया से भेजी गोपनीय जानकारी। 

राजस्थान के जैसलमेर से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के गेस्ट हाउस के मैनेजर महेंद्र प्रसाद को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। राजस्थान पुलिस की CID (सुरक्षा) इकाई ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। महेंद्र प्रसाद पर आरोप है कि वह सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स को DRDO वैज्ञानिकों और भारतीय सेना के अधिकारियों की गतिविधियों से जुड़ी गोपनीय जानकारी भेज रहा था। यह गिरफ्तारी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बढ़ी हुई निगरानी के दौरान हुई, जब पुलिस को संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली। महेंद्र प्रसाद, जो 32 साल का है और उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के पल्युन गांव का रहने वाला है, जैसलमेर के चंदन फील्ड फायरिंग रेंज के पास DRDO के गेस्ट हाउस में अनुबंध के आधार पर मैनेजर के तौर पर काम करता था। यह गेस्ट हाउस एक उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र है, जहां DRDO के वैज्ञानिक और भारतीय सेना के अधिकारी मिसाइल और अन्य हथियारों के परीक्षण के लिए आते हैं। पुलिस को स्वतंत्रता दिवस के पहले बढ़ी हुई निगरानी के दौरान महेंद्र की संदिग्ध गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली। जांच में पता चला कि वह लंबे समय से सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के हैंडलर्स के संपर्क में था और उनके साथ संवेदनशील जानकारी साझा कर रहा था।

पुलिस ने बताया कि महेंद्र प्रसाद ने DRDO वैज्ञानिकों और सेना के अधिकारियों की आवाजाही, मिसाइल परीक्षण और अन्य रक्षा गतिविधियों से जुड़ी जानकारी पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजी। यह जानकारी चंदन फील्ड फायरिंग रेंज और पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज जैसे संवेदनशील स्थानों से संबंधित थी, जो भारत के रक्षा और हथियार परीक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं। महेंद्र पिछले चार से पांच साल से इस गेस्ट हाउस में काम कर रहा था और उसे वहां आने वाले अतिथियों की पूरी जानकारी होती थी। उसने इन जानकारियों को PDF फाइलों के रूप में अपने हैंडलर्स को भेजा, जिसमें गेस्ट लिस्ट और उनके द्वारा किए जाने वाले कार्यों का विवरण शामिल था। CID (सुरक्षा) के महानिरीक्षक विष्णुकांत ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजस्थान में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया था। इस दौरान खुफिया जानकारी मिली कि महेंद्र प्रसाद संदिग्ध गतिविधियों में शामिल है। इसके बाद उसे 4 अगस्त को हिरासत में लिया गया और जयपुर के केंद्रीय पूछताछ केंद्र में विभिन्न खुफिया एजेंसियों ने उससे संयुक्त पूछताछ की। उसके मोबाइल फोन की तकनीकी जांच में पुष्टि हुई कि उसने मिसाइल परीक्षण, हथियारों और सेना की गतिविधियों से जुड़े वीडियो और दस्तावेज पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजे थे। इस सबूत के आधार पर, 12 अगस्त को उसके खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 के तहत मामला दर्ज किया गया और उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

महेंद्र को जयपुर की एक अदालत में पेश किया गया, जहां उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस जासूसी नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हो सकता है और कितनी जानकारी लीक हुई। यह भी पता लगाया जा रहा है कि महेंद्र कितने समय से यह गतिविधियां कर रहा था और उसने कितनी संवेदनशील जानकारी साझा की। चंदन और पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज भारत के रक्षा तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, और यहां होने वाले मिसाइल और हथियार परीक्षण राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं। ऐसे में, इस तरह की जासूसी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। यह घटना हाल के समय में जासूसी से जुड़े कई मामलों में से एक है। इससे पहले मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे। इस ऑपरेशन के बाद भारत में जासूसी के कई मामले सामने आए, जिसमें पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से 15 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें एक यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा, एक छात्र देवेंद्र सिंह और एक CRPF जवान मोती राम जाट शामिल थे। जैसलमेर में ही कुछ दिन पहले एक अन्य संदिग्ध, शकूर खान, को भी जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पहला, DRDO जैसे संवेदनशील संगठन में अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति और उनकी पृष्ठभूमि की जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। महेंद्र प्रसाद एक अनुबंध कर्मचारी था, और इतने संवेदनशील स्थान पर उसकी नियुक्ति से पहले उसकी पूरी जांच नहीं की गई। दूसरा, सोशल मीडिया के दुरुपयोग का मुद्दा। इस मामले में महेंद्र ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके गोपनीय जानकारी भेजी, जो यह दिखाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को जासूसी के लिए कितनी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। तीसरा, राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ता खतरा। भारत-पाकिस्तान सीमा से केवल 200 किलोमीटर दूर स्थित पोखरण और चंदन जैसे क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील हैं, और ऐसी घटनाएं रक्षा तंत्र की सुरक्षा में सेंध का संकेत देती हैं।

सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कुछ लोगों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया और मांग की कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। एक यूजर ने लिखा, “यह शर्मनाक है कि DRDO जैसे संगठन में जासूस काम कर रहे हैं। कर्मचारियों की जांच को और सख्त करना होगा।” वहीं, कुछ लोगों ने इसे सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता का उदाहरण बताया। एक अन्य यूजर ने लिखा, “CID और खुफिया एजेंसियों ने समय रहते कार्रवाई की, वरना नुकसान और बड़ा हो सकता था।” पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि महेंद्र को इस जासूसी के लिए कितना पैसा मिला और क्या उसने किसी अन्य व्यक्ति को इस नेटवर्क में शामिल किया। इसके अलावा, यह भी जांच का विषय है कि क्या उसने कोई अन्य संवेदनशील दस्तावेज या वीडियो साझा किए। पुलिस ने सभी संबंधित एजेंसियों को अलर्ट पर रखा है और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। यह घटना राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक चेतावनी है। सरकार और रक्षा संगठनों को चाहिए कि वे कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को और सख्त करें। साथ ही, सोशल मीडिया पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के लिए और बेहतर तकनीक का इस्तेमाल किया जाए। यह भी जरूरी है कि संवेदनशील स्थानों पर काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वे किसी भी विदेशी एजेंसी के जाल में न फंसें।

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