SP-Congress Rift: सपा-कांग्रेस में अनबन पर बीजेपी का तंज, कहा- मुस्लिम वोट बैंक के लिए हो रही नूराकुश्ती
UP Politics News: समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच बढ़ती सियासी अनबन पर भारतीय जनता पार्टी ने तंज कसा है। बीजेपी ने इसे 'मुस्लिम वोट' हासिल करने की नूराकुश्ती बताया।

- UP Politics: अखिलेश और कांग्रेस की खटपट पर बरसी भाजपा, 'मुस्लिम वोटों के तुष्टिकरण की मची है होड़'
- "मुस्लिम वोट बैंक के लिए है ये सारी बयानबाजी..." सपा-कांग्रेस के मतभेदों पर भाजपा ने क्यों लिया आड़े हाथ? जानें समीकरण
- यूपी सियासत: समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच तल्खी पर बीजेपी का तीखा हमला, तुष्टिकरण की राजनीति का लगाया आरोप
उत्तर प्रदेश की सियासत में 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के दो प्रमुख सहयोगियों समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच हालिया दिनों में उभरकर सामने आई वैचारिक व सांगठनिक अनबन ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस सियासी खटपट पर मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कड़ी चुटकी लेते हुए तीखा हमला बोला है। सोमवार (22 जून 2026) को लखनऊ में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान बीजेपी के वरिष्ठ प्रवक्ताओं ने विपक्षी गठबंधन में आई इस दरार को 'दिखावा' करार दिया। बीजेपी का दावा है कि सूबे में दोनों दलों के बीच चल रही यह बयानबाजी वास्तव में कोई वैचारिक मतभेद नहीं, बल्कि विशिष्ट रूप से 'मुस्लिम वोट बैंक' पर अपना एकछत्र कब्जा जमाने की एक सोची-समझी रणनीतिक नूराकुश्ती है। इस तीखे राजनीतिक पलटवार के बाद उत्तर प्रदेश में तुष्टिकरण बनाम ध्रुवीकरण की बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे, स्थानीय निकायों के विमर्श और सांगठनिक विस्तार को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं के बीच जुबानी तीर चल रहे हैं। दोनों दलों के स्थानीय संगठन एक-दूसरे के राजनीतिक जनाधार पर दावेदारी ठोक रहे हैं। इसी आंतरिक कलह को आधार बनाकर अब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष को घेरना शुरू कर दिया है। बीजेपी का साफ कहना है कि आगामी राजनीतिक जमीन को बचाने और अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच खुद को बड़ा हितैषी साबित करने के लिए दोनों दल जानबूझकर मतभेदों का नाटक रच रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनावों के बाद से ही कांग्रेस अपने सांगठनिक ढांचे को दोबारा खड़ा करने की कोशिश में जुटी है, जबकि समाजवादी पार्टी सूबे में खुद को मुख्य और सबसे मजबूत विकल्प मानती है। हाल ही में अल्पसंख्यक मुद्दों और कुछ क्षेत्रीय बयानों पर कांग्रेस और सपा के प्रदेश स्तरीय नेताओं के सुर अलग-अलग दिखाई दिए।
इसी पृष्ठभूमि में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने इस आंतरिक खींचतान पर टिप्पणी की। बीजेपी के रणनीतिकारों का तर्क है कि जब भी राज्य में अल्पसंख्यक राजनीति या तुष्टिकरण का नैरेटिव सेट करना होता है, तो दोनों पार्टियां खुद को अधिक आक्रामक दिखाने की होड़ में लग जाती हैं। बीजेपी प्रवक्ताओं ने कहा, "इनकी अनबन नीतिगत मुद्दों पर नहीं है। असल लड़ाई इस बात की है कि उत्तर प्रदेश का मुस्लिम वोट बैंक किसके पाले में जाएगा। कांग्रेस चाहती है कि उसका पुराना आधार वापस लौटे, वहीं सपा अपने इस पारंपरिक आधार को किसी भी कीमत पर खिसकने नहीं देना चाहती। इसी खींचतान में जनता को गुमराह करने के लिए ऐसी नूराकुश्ती वाली बयानबाजी की जा रही है।"
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भारतीय जनता पार्टी का आधिकारिक पक्ष: बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, "विपक्ष के पास विकास का कोई एजेंडा नहीं है। जब चुनाव पास आते हैं या उन्हें जमीन खिसकती दिखती है, तो वे केवल एक वर्ग विशेष के ध्रुवीकरण की राजनीति पर उतर आते हैं। जनता उनकी इस अवसरवादी राजनीति को अच्छी तरह समझ चुकी है।"
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समाजवादी पार्टी का रुख: सपा के वरिष्ठ नेताओं ने बीजेपी के इस आरोप को बेबुनियाद बताया है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि समाजवादी पार्टी 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के समावेशी सिद्धांत पर काम करती है। गठबंधन के भीतर लोकतंत्र है, जहां हर दल को अपनी बात रखने का अधिकार है और इसे कमजोरी या वोट बैंक की लड़ाई के रूप में देखना बीजेपी की संकीर्ण सोच है।
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कांग्रेस की प्रतिक्रिया: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी असली मुद्दों (जैसे बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्या) से ध्यान भटकाने के लिए हमेशा हर मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास करती है। कांग्रेस हर वर्ग के न्याय की लड़ाई लड़ रही है।
जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच इस बयानबाजी से भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है, जिससे भविष्य के चुनावों में आपसी समन्वय (Coordination) प्रभावित हो सकता है। बीजेपी इस मुद्दे को भुनाकर बहुसंख्यक मतदाताओं के बीच यह नैरेटिव मजबूत करने की कोशिश कर रही है कि विपक्ष केवल एक विशेष वर्ग की चिंता करता है। इस राजनीतिक दबाव के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सपा और कांग्रेस अपने मतभेदों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के बजाय बंद कमरों में सुलझाने की रणनीति अपनाते हैं या नहीं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा से देश की सत्ता का मार्ग तय करती रही है। बीजेपी द्वारा इस अनबन को मुस्लिम वोट बैंक की होड़ बताए जाने के बाद, आने वाले दिनों में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर अपने गठबंधन को एकजुट दिखाने का दबाव बढ़ेगा। सांगठनिक स्तर पर दोनों पार्टियां अपने-अपने कैडर को शांत करने का प्रयास कर सकती हैं। वहीं, बीजेपी इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाकर विपक्ष को पूरी तरह 'नीतिविहीन और अवसरवादी' साबित करने के अपने अभियान को और धार देगी।
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