Indore Cyber Fraud: 3 करोड़ की साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, 21 पासबुक, 8 एटीएम और 20 चेकबुक के साथ मुख्य आरोपी गिरफ्तार

इंदौर क्राइम ब्रांच ने 3 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 21 पासबुक, 8 एटीएम और 20 चेकबुक बरामद की गई हैं।

Sep 14, 2026 - 14:03
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Indore Cyber Fraud: 3 करोड़ की साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, 21 पासबुक, 8 एटीएम और 20 चेकबुक के साथ मुख्य आरोपी गिरफ्तार
  • Indore Cyber Fraud: 3 करोड़ की साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, 21 पासबुक, 8 एटीएम और 20 चेकबुक के साथ मुख्य आरोपी गिरफ्तार
  • इंदौर क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन: म्यूल बैंक खातों के जरिए 3 करोड़ की धोखाधड़ी करने वाला शातिर दबोचा, भारी मात्रा में बैंकिंग किट बरामद
  • Indore News: साइबर ठगों के नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा, पासबुक और एटीएम कार्ड के साथ पकड़ा गया मुख्य सूत्रधार
  • 3 करोड़ के साइबर फ्रॉड में इंदौर क्राइम ब्रांच की कार्रवाई: बैंक खातों की सप्लाई करने वाला आरोपी अरेस्ट, मिले अहम सुराग

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में साइबर अपराधियों के संगठित वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ क्राइम ब्रांच को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने लगभग 3 करोड़ रुपये की ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके मुख्य संचालक को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी के कब्जे से 21 बैंक पासबुक, 8 सक्रिय एटीएम कार्ड और 20 चेकबुक सहित कई अहम डिजिटल दस्तावेज बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि आरोपी साइबर ठगी के जरिए हासिल की जाने वाली अवैध रकम को सुरक्षित ठिकाने लगाने के लिए 'म्यूल अकाउंट्स' (किराए के बैंक खातों) की एक पूरी व्यवस्था संचालित कर रहा था।

इंदौर पुलिस कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच इकाई को हाल के दिनों में ऑनलाइन निवेश, टास्क फ्रॉड और फर्जी डिजिटल लोन के नाम पर नागरिकों से करोड़ों रुपये की ठगी की कई तकनीकी शिकायतें प्राप्त हुई थीं। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से जुड़े इन मामलों के वित्तीय लेन-देन की कड़ियों का विश्लेषण करते हुए जांच दल ने पाया कि पीड़ितों से जमा कराई जाने वाली रकम कुछ विशिष्ट बैंक खातों में भेजी जाती थी और फिर कुछ ही मिनटों के भीतर एटीएम और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए निकाल ली जाती थी। तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खाता विवरणों के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध की लोकेशन ट्रेस कर उसे धर दबोचा।

  • म्यूल खातों का ताना-बाना और काम करने का तरीका

क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी की मुख्य भूमिका साइबर ठगी के सिंडिकेट को सक्रिय बैंक खाते उपलब्ध कराने की थी। साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे खातों को 'म्यूल अकाउंट' कहा जाता है। गिरोह के सदस्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों, छात्रों और छोटे दैनिक कामगारों को कुछ हजार रुपयों का प्रलोभन देकर उनके पहचान दस्तावेजों पर राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों में खाते खुलवाते थे।

खाता खुलने के तुरंत बाद उसकी पासबुक, नेट बैंकिंग किट, चेकबुक और एटीएम कार्ड आरोपी अपने कब्जे में ले लेता था। जब साइबर ठग देश के किसी भी हिस्से में बैठे नागरिक को फर्जी लिंक, शेयर बाजार में भारी मुनाफे का झांसा या डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने पर मजबूर करते, तो वह रकम सीधे इन खातों में मंगवाई जाती थी। इसके बाद आरोपी एटीएम के माध्यम से नकद निकासी करता या अन्य सुरक्षित डिजिटल वॉलेट्स व क्रिप्टो माध्यमों में फंड को ट्रांसफर कर मुख्य सरगनाओं तक पहुंचाता था। इस काम के बदले उसे कुल लेनदेन पर निश्चित प्रतिशत के रूप में कमीशन मिलता था।

  • बरामद बैंकिंग किट से खुली पोल

कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम ने जब आरोपी के ठिकानों पर तलाशी ली, तो वहां से बरामद सामग्री देखकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। आरोपी के पास से विभिन्न बैंकों की 21 चालू और बचत खातों की पासबुक, 8 एटीएम सह डेबिट कार्ड और 20 बिना इस्तेमाल की गई चेकबुक जब्त की गईं। इसके अतिरिक्त कई मोबाइल सिम कार्ड और स्मार्टफोन भी बरामद किए गए हैं, जिनका उपयोग बैंक खातों के वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) प्राप्त करने और इंटरनेट बैंकिंग संचालित करने के लिए किया जा रहा था।

जांच में सामने आया है कि इन बरामद बैंक खातों के जरिए पिछले कुछ महीनों में लगभग 3 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध वित्तीय लेन-देन किया जा चुका है। पुलिस ने संबंधित सभी बैंकों से इन खातों के विस्तृत स्टेटमेंट तलब किए हैं और शेष बची जमा राशि को तत्काल प्रभाव से फ्रीज (लेनदेन पर रोक) कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

  • देशव्यापी मामलों से जुड़ सकते हैं तार

इंदौर पुलिस का मानना है कि इस गिरोह के तार केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं हैं। जब्त किए गए खातों के नंबरों को जब केंद्रीय साइबर पोर्टल के डेटाबेस से मिलाया गया, तो देश के कई अन्य राज्यों जैसे राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में दर्ज साइबर शिकायतों से भी इनका सीधा जुड़ाव सामने आया है।

अक्सर ऐसे रैकेट में स्थानीय स्तर पर खाते जुटाने वाले लोग अलग होते हैं, जबकि तकनीकी रूप से ठगी को अंजाम देने वाले गिरोह के मुख्य सरगना किसी दूसरे राज्य या सीमा पार से कॉल सेंटर संचालित करते हैं। इंदौर क्राइम ब्रांच अब इस बात की कड़ियां जोड़ रही है कि आरोपी किन-किन मुख्य साइबर सिंडिकेट्स के संपर्क में था और वह कमीशन काटकर शेष रकम किन चैनलों के जरिए आगे भेजता था। आरोपी के फोन से मिले व्हाट्सएप चैट, टेलीग्राम ग्रुप्स और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड्स का फोरेंसिक विश्लेषण कराया जा रहा है।

  • नागरिकों के लिए चेतावनी: अपना खाता कभी न दें किराये पर

इस खुलासे के बाद पुलिस अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी लालच या कमीशन के चक्कर में अपने नाम पर खुले बैंक खाते, एटीएम कार्ड, आधार या पैन विवरण किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के बैंक खाते का उपयोग किसी गैरकानूनी गतिविधि या साइबर ठगी की रकम घुमाने के लिए होता है, तो खाताधारक को भी अपराध का साझीदार माना जाता है और उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता तथा आईटी एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

क्राइम ब्रांच ने बताया कि मामले में आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं और धोखाधड़ी के तहत नियमित प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। आरोपी को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जा रहा है, जिससे पूछताछ के बाद इस सिंडिकेट में शामिल अन्य बैंक कर्मियों, खाता सप्लायर्स और मुख्य साजिशकर्ताओं के नामों का खुलासा होने की पूरी संभावना है।

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