Delhi IGI Airport Expansion: इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बनेगा नया Pier E, 2030 तक अंतरराष्ट्रीय क्षमता में होगा भारी इजाफा
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) की अंतरराष्ट्रीय क्षमता बढ़ाने के लिए नया Pier E बनाने की योजना तैयार की गई है। जानिए 2030 तक के विस्तार प्लान की पूरी जानकारी।

- दिल्ली एयरपोर्ट का मास्टरप्लान 2030: टर्मिनल 3 पर जुड़ेगा नया 'पियर ई', ग्लोबल एविएशन हब बनने की दिशा में बड़ा कदम
- IGI Airport New Pier E: विदेशी उड़ानों के लिए बढ़ेगी दिल्ली एयरपोर्ट की क्षमता, जानें यात्रियों को क्या मिलेंगी नई सुविधाएं
- Delhi Airport Infrastructure: 2030 तक 10 करोड़ से अधिक पैसेंजर क्षमता का लक्ष्य, इंटरनेशनल कनेक्टिविटी को रफ्तार देगा
नई दिल्ली। देश के सबसे व्यस्त और विश्वस्तरीय इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) को एक प्रमुख वैश्विक विमानन केंद्र (Global Aviation Hub) के रूप में स्थापित करने के लिए व्यापक विस्तार योजना पर काम तेज हो गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और हवाई अड्डा संचालक दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) के मास्टरप्लान के तहत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और विदेशी यात्रियों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए टर्मिनल-3 (T3) के पास एक अत्याधुनिक नया 'पियर ई' (Pier E) विकसित किया जाएगा। वर्ष 2030 तक के रणनीतिक खाके के तहत तैयार किए जा रहे इस प्रोजेक्ट का सीधा उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्री संचालन क्षमता, एयरोब्रिज की संख्या और विमानों के पार्किंग बे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करना है।
भारत में तेजी से बढ़ते अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात और घरेलू विमानन कंपनियों—विशेषकर एयर इंडिया और इंडिगो—द्वारा दिए गए सैकड़ों नए विमानों के बड़े ऑर्डर को देखते हुए दिल्ली हवाई अड्डे पर अंतरराष्ट्रीय बुनियादी ढांचे के विस्तार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। नया Pier E बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए अतिरिक्त बोर्डिंग गेट्स, लंबी दूरी के वाइड-बॉडी विमानों के लिए समर्पित स्टैंड्स और यात्रियों के लिए सुगम ट्रांजिट सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
- क्या है नया Pier E और क्यों पड़ी इसकी आवश्यकता?
हवाई अड्डों की वास्तुकला में 'पियर' (Pier) मुख्य टर्मिनल भवन से बाहर की ओर निकला हुआ वह गलियारा होता है जहां विमानों के लिए एयरोब्रिज, पैसेंजर वेटिंग लाउंज और बोर्डिंग गेट्स स्थित होते हैं। वर्तमान में आईजीआई एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार के संचालन के लिए अलग-अलग पियर्स कार्य कर रहे हैं।
विदेशी उड़ानों की लगातार बढ़ती मांग और कनेक्टिंग अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के बढ़ते दबाव को देखते हुए नया Pier E अंतरराष्ट्रीय विंग के विस्तार के रूप में कार्य करेगा। इस नए पियर के जुड़ने से:
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए प्रत्यक्ष एयरोब्रिज बोर्डिंग की संख्या में बड़ा इजाफा होगा।
यात्रियों को दूरदराज के रिमोट बे (Remote Bays) तक ले जाने के लिए बसों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टर्नअराउंड समय (विमान के उतरने और दोबारा उड़ान भरने के बीच का समय) में कमी आएगी।
अंतरराष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय (I-to-I) और घरेलू से अंतरराष्ट्रीय (D-to-I) ट्रांजिट का समय काफी घट जाएगा।
- 2030 तक का पूरा विजन और क्षमता का विस्तार
दिल्ली हवाई अड्डे ने हाल ही में टर्मिनल 1 (T1) के पुनर्विकास और चौथे रनवे (Runway 29R/11L) के संचालन के साथ अपनी कुल वार्षिक यात्री क्षमता को लगभग 10 से 10.5 करोड़ (100–104 मिलियन) तक पहुंचाया है। हालांकि, मौजूदा क्षमता का बड़ा हिस्सा घरेलू उड़ानों द्वारा उपयोग किया जाता है।
नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अनुमान के अनुसार, 2030 तक भारत से विदेश जाने वाले और वैश्विक स्तर पर भारत को ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल करने वाले यात्रियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। 2030 के विजन डॉक्यूमेंट के तहत:
इंटरनेशनल पैसेंजर हैंडलिंग क्षमता: मौजूदा लगभग 2 से 2.2 करोड़ अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की वार्षिक क्षमता को बढ़ाकर 3.5 से 4 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य है।
चौड़े विमानों (Wide-Body Aircraft) के लिए अनुकूलता: एयरबस A350 और बोइंग 777X जैसे अगली पीढ़ी के विशालकाय विमानों के लिए उन्नत एयरोब्रिज और कोड-एफ/कोड-ई श्रेणी के स्टैंड विकसित किए जाएंगे।
स्मार्ट इमिग्रेशन और ऑटोमेशन: नए पियर में बायोमेट्रिक आधारित 'फास्ट-ट्रैक इमिग्रेशन' (FTI-TTP), स्वचालित बैगेज हैंडलिंग और एआई-संचालित यात्री ट्रैकिंग सिस्टम लागू किए जाएंगे।
- दुबई और सिंगापुर जैसे ग्लोबल हब से प्रतिस्पर्धा की तैयारी
भारत सरकार और विमानन उद्योग का दीर्घकालिक लक्ष्य दिल्ली को दुबई, दोहा और सिंगापुर के चांगी एयरपोर्ट की तर्ज पर एक शक्तिशाली 'ग्लोबल मेगा हब' बनाना है। वर्तमान में यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पूर्वी एशिया या ऑस्ट्रेलिया के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों का एक बड़ा वर्ग खाड़ी देशों के हवाई अड्डों के जरिए ट्रांजिट करता है।
भारत की भौगोलिक स्थिति पूर्व और पश्चिम के बीच एक प्राकृतिक सेतु का काम करती है। यदि दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट का बुनियादी ढांचा सुदृढ़ होता है, तो वैश्विक एयरलाइंस और भारतीय कैरियर्स लंबी दूरी की उड़ानों के लिए दिल्ली को अपना प्राथमिक स्टॉपओवर बना सकेंगे। Pier E का निर्माण इसी रणनीतिक योजना की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
- यात्रियों को क्या सीधे फायदे मिलेंगे?
इस विस्तार परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद आम और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के अनुभव में कई बड़े सुधार देखने को मिलेंगे:
सुरक्षा जांच और इमिग्रेशन में कम समय: अतिरिक्त काउंटर्स और ई-गेट्स के चलते पीक आवर्स के दौरान लगने वाली लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी।
विश्वस्तरीय लाउंज और रिटेल अनुभव: नए पियर में अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स, वेलनेस जोन, प्रीमियम ट्रांजिट लाउंज और ड्यूटी-फ्री शॉपिंग के विस्तृत विकल्प जोड़े जाएंगे।
कनेक्टिविटी और बैगेज ट्रांसफर: दो उड़ानों के बीच सामान के हस्तांतरण (Baggage Transfer) की गति तेज होगी, जिससे कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने का जोखिम न्यूनतम हो जाएगा।
हवाई अड्डा प्राधिकरण और डेवलपर द्वारा इस परियोजना की विस्तृत इंजीनियरिंग डिजाइन और चरणबद्ध निर्माण समयसीमा को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि वर्तमान उड़ानों के संचालन में किसी तरह की बाधा डाले बिना निर्माण कार्य को 2030 के पूर्व निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप पूरा किया जा सके।
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