"अगर मैं ऐसा न करता तो वह बैन हो जाता": रहाणे ने 4 साल बाद खोला यशस्वी जायसवाल से जुड़ा बड़ा राज
अजिंक्य रहाणे ने यशस्वी जायसवाल को मैदान से बाहर भेजने के 4 साल पुराने विवाद पर बड़ा खुलासा किया है। जानिए कैसे कप्तान के एक फैसले ने जायसवाल को बैन से बचाया।

- अजिंक्य रहाणे का बड़ा खुलासा: यशस्वी जायसवाल पर लगने वाला था बैन, जानिए कैसे बचाई युवा स्टार की किस्मत
- मैदान से बाहर भेजने का सच: रहाणे ने बताया क्यों यशस्वी जायसवाल को दी थी सजा, ऐसे बचाया करियर
- क्रिकेट न्यूज: अजिंक्य रहाणे ने यशस्वी जायसवाल को मैदान से बाहर भेजने की घटना पर 4 साल बाद तोड़ी चुप्पी
भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने युवा सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल से जुड़े एक चर्चित विवाद पर करीब चार साल बाद बड़ा खुलासा किया है। सितंबर 2022 में खेले गए दुलीप ट्रॉफी के फाइनल मैच के दौरान वेस्ट जोन के कप्तान रहाणे ने अपनी ही टीम के युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल को लगातार स्लेजिंग करने के कारण ड्रेसिंग रूम भेज दिया था। अब रहाणे ने खुलासा किया है कि यदि वे जायसवाल को मैदान से बाहर न भेजते तो मैच रेफरी उन पर कड़ा कड़ा कड़ा बैन लगा सकते थे, जिससे इस युवा स्टार का करियर शुरुआत में ही खतरे में पड़ सकता था। रहाणे के इस कड़े लेकिन सूझबूझ भरे फैसले ने न केवल खेल भावना को बनाए रखा, बल्कि जायसवाल को भविष्य की बड़ी अनुशासनहीनता और संभावित बैन से भी बचा लिया।
यह पूरा मामला वर्ष 2022 में खेले गए दुलीप ट्रॉफी (Duleep Trophy) के खिताबी मुकाबले का है। वेस्ट जोन और साउथ जोन के बीच खेले जा रहे इस बेहद हाई-वोल्टेज मैच में यशस्वी जायसवाल वेस्ट जोन की तरफ से खेल रहे थे। मैच की चौथी पारी के दौरान मैदान पर माहौल काफी गर्म था और जायसवाल लगातार विपक्षी बल्लेबाज रविकुमार समर्थ पर फब्तियां कस रहे थे। बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद जब जायसवाल का स्लेजिंग का सिलसिला जारी रहा, तो कप्तान अजिंक्य रहाणे ने कड़ा कदम उठाते हुए उन्हें मैदान छोड़कर सीधे ड्रेसिंग रूम जाने का आदेश दे दिया था।
उस समय किसी कप्तान द्वारा अपनी ही टीम के खिलाड़ी को इस तरह मैदान से बाहर भेजने का दृश्य बेहद दुर्लभ और हैरान कर देने वाला था। सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में रहाणे के इस सख्त फैसले की काफी चर्चा हुई थी।
मैच के दौरान जायसवाल की लगातार स्लेजिंग की शिकायत साउथ जोन के बल्लेबाजों और मैदानी अंपायरों ने वेस्ट जोन के कप्तान अजिंक्य रहाणे से की थी। अंपायरों की चेतावनी के बाद रहाणे ने जायसवाल को अलग ले जाकर व्यक्तिगत रूप से समझाया कि वे खेल पर ध्यान दें और विपक्षी खिलाड़ी से उलझना बंद करें। इसके बावजूद अगली ही गेंद के बाद जायसवाल फिर से वही हरकत दोहराते नजर आए।
स्थिति को बिगड़ता देख और अंपायरों की बढ़ती नाराजगी को भांपते हुए रहाणे ने तुरंत फैसला लिया। उन्होंने अंपायर से बात की और जायसवाल को मैदान से बाहर भेज दिया। इसके चलते वेस्ट जोन को कुछ समय के लिए 10 खिलाड़ियों के साथ ही फील्डिंग करनी पड़ी थी। बाद में जब जायसवाल शांत हुए और अपनी गलती का अहसास हुआ, तब उन्हें दोबारा मैदान पर आने की अनुमति दी गई।
रहाणे का खुलासा
हाल ही में दिए गए एक साक्षात्कार में अजिंक्य रहाणे ने इस पूरे वाकये पर विस्तार से बात की और इसके पीछे की मुख्य वजह बताई। रहाणे ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी खिलाड़ी को नीचा दिखाना या अपमानित करना नहीं था, बल्कि एक कप्तान और वरिष्ठ खिलाड़ी के रूप में टीम और खिलाड़ी के हितों की रक्षा करना था।
रहाणे ने बताया कि मैच रेफरी उस मुकाबले पर बेहद सख्त नजर बनाए हुए थे। अगर वे जायसवाल को मैदान से बाहर न भेजते, तो मैच रेफरी उस युवा खिलाड़ी पर लेवल-2 या लेवल-3 के तहत कोड ऑफ कंडक्ट (Code of Conduct) के उल्लंघन का मामला दर्ज करते। ऐसी स्थिति में जायसवाल पर कई मैचों या महीनों का प्रतिबंध (बैन) लग सकता था, जो उनके उभरते हुए करियर के लिए एक बड़ा झटका साबित होता। रहाणे ने कहा कि एक कप्तान के तौर पर यह मेरी जिम्मेदारी थी कि मैं अपने खिलाड़ी का बचाव करूं और उसे यह समझाऊं कि आक्रामकता का इस्तेमाल बल्ले से होना चाहिए, न कि शब्दों से।
अनुशासन से बदली किस्मत
रहाणे का यह कड़ा फैसला यशस्वी जायसवाल के करियर के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ (Turning Point) साबित हुआ। इस वाकये के बाद जायसवाल के व्यवहार और मानसिक दृष्टिकोण में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। उन्होंने अपनी आक्रामकता का रुख बल्ले की ओर मोड़ा और घरेलू क्रिकेट के साथ-साथ आईपीएल (IPL) और फिर भारतीय राष्ट्रीय टीम में रनों का अंबार लगा दिया।
यदि उस दिन रहाणे ने सख्त कदम न उठाया होता और जायसवाल पर बैन लग जाता, तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी एंट्री टल सकती थी। रहाणे की इस मेंटरशिप ने जायसवाल को एक परिपक्व खिलाड़ी बनाने में अहम भूमिका निभाई। आज जायसवाल भारतीय टेस्ट और टी20 टीम के सबसे भरोसेमंद सलामी बल्लेबाजों में से एक बन चुके हैं।
यह घटना भारतीय क्रिकेट में सीनियर खिलाड़ियों द्वारा दी जाने वाली मेंटरशिप और अनुशासन के महत्व को रेखांकित करती है। वर्तमान में अजिंक्य रहाणे और यशस्वी जायसवाल दोनों ही अपने-अपने स्तर पर भारतीय क्रिकेट में योगदान दे रहे हैं। जहां जायसवाल भारतीय टीम के प्रमुख स्तंभ बन चुके हैं, वहीं रहाणे जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों का यह अनुभव नए और युवा खिलाड़ियों को खेल की मर्यादा और नियमों के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की प्रेरणा देता है।
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