Kanwar Yatra 2026: 301 लीटर गंगाजल लेकर निकले मेरठ के आकाश भोला, गौ माता को राष्ट्र माता बनाने की अनोखी मांग
Kanwar Yatra 2026: मेरठ के आकाश भोला 301 लीटर गंगाजल की विशाल कांवड़ लेकर हरिद्वार से औघड़नाथ मंदिर की ओर बढ़ रहे हैं। जानें गौ माता से जुड़ा उनका संकल्प।

- Kanwar Yatra News: हरिद्वार से औघड़नाथ मंदिर तक 301 लीटर की विशाल कांवड़, आकाश भोला की आस्था बनी मिसाल
- गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने का संकल्प! 301 लीटर गंगाजल के साथ मेरठ के आकाश भोला की विशाल कांवड़ यात्रा
- Kanwar Yatra Updates: 301 लीटर गंगाजल वाली विशाल कांवड़ बनी कौतूहल का केंद्र, आकाश भोला का अनोखा संकल्प
सावन के पवित्र महीने में चारों ओर शिवभक्ति का अद्भुत और मनमोहक रंग देखने को मिल रहा है। इसी धार्मिक आस्था के बीच मेरठ के निवासी शिवभक्त आकाश सैनी उर्फ आकाश भोला अपनी 301 लीटर गंगाजल वाली विशाल कांवड़ यात्रा को लेकर कांवड़ मार्ग पर श्रद्धालुओं के बीच गहरे आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। आकाश भोला अपने 10 युवा साथियों की टोली के साथ गौ माता को 'राष्ट्र माता' घोषित किए जाने की विशेष मनोकामना को लेकर उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी से गंगाजल उठाकर पैदल मेरठ के ऐतिहासिक औघड़नाथ मंदिर की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। रास्ते भर उनकी इस अनूठी कांवड़ के दर्शन और स्वागत के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है।
पवित्र सावन मास के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रहने वाले कांवड़िया आकाश सैनी (आकाश भोला) 301 लीटर गंगाजल की विशाल कांवड़ लेकर यात्रा कर रहे हैं। हरिद्वार की हर की पौड़ी से शुरू हुई यह यात्रा मेरठ स्थित ऐतिहासिक और प्रसिद्ध औघड़नाथ मंदिर तक जाएगी। 301 लीटर जल की क्षमता वाली इस भारी-भरकम कांवड़ को ले जाना एक कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसे आकाश अपनी 10 सदस्यीय समर्पित युवाओं की टोली के साथ मिलकर पूरा कर रहे हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ गौ सेवा और गौ माता को राष्ट्रीय दर्जा दिलाने की जन-जागरूकता फैलाना है।
सावन शुरू होते ही लाखों कांवड़िए हरिद्वार और अन्य पवित्र धामों से जल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ते हैं। हालांकि, इनमें से कुछ शिवभक्त अपने अनूठे संकल्प और विशाल कांवड़ों के कारण हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। आकाश भोला ने अपनी 10 सदस्यीय टोली के साथ पवित्र नगरी हरिद्वार की हर की पौड़ी से पूजा-अर्चना के बाद 301 लीटर गंगाजल भरा और पैदल पदयात्रा आरंभ की।
कांवड़ मार्ग पर जैसे-जैसे यह विशाल कांवड़ आगे बढ़ रही है, इसे देखने के लिए मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ एकत्र हो रही है। कांवड़ की विशालता और उसमें रखे गंगाजल के वजन को संतुलित करते हुए आगे बढ़ना बेहद कठिन है, लेकिन युवाओं की यह टोली बिना रुके अपने लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर है।
यह पहली बार नहीं है जब आकाश ने ऐसी साहसिक और भक्तिपूर्ण यात्रा उठाई है। इससे पूर्व की यात्रा में भी आकाश भोला 261 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाकर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक सफलतापूर्वक कर चुके हैं। इस वर्ष उन्होंने अपने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए कांवड़ का आकार और गंगाजल की मात्रा बढ़ाकर 301 लीटर कर दी है, जो उनके मजबूत संकल्प और प्रगाढ़ आस्था को दर्शाता है।
अपनी इस विशेष कांवड़ यात्रा के विषय में बात करते हुए आकाश भोला ने बताया:
"हमारी यह यात्रा केवल जल चढ़ाने तक सीमित नहीं है। हम भोलेनाथ से प्रार्थना कर रहे हैं और समाज को संदेश दे रहे हैं कि गौ माता को 'राष्ट्र माता' का दर्जा मिलना चाहिए। भगवान शिव की कृपा से 10 भाइयों की हमारी टोली इस 301 लीटर गंगाजल को मेरठ के औघड़नाथ मंदिर तक सुरक्षित ले जाकर बाबा का जलाभिषेक करेगी।"
वहीं, यात्रा मार्ग में स्वागत करने वाले स्थानीय श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे युवाओं की अटूट आस्था और गौ संरक्षण के प्रति उनका यह संकल्प समाज को एक सकारात्मक प्रेरणा देता है।
301 लीटर गंगाजल वाली कांवड़ कांवड़ पटरी और मुख्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है। जगह-जगह पर स्थानीय निवासियों, सामाजिक संगठनों और शिवभक्तों द्वारा इस टोली का भव्य स्वागत किया जा रहा है। कई स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया, तो कहीं उन्हें मेडल, मालाएं और स्मृति चिह्न (शील्ड) देकर सम्मानित किया गया। यह यात्रा धार्मिक माहौल को और अधिक भक्तिमय बनाने के साथ-साथ गौ संरक्षण के विचार को भी मजबूती से बढ़ावा दे रही है।
आकाश भोला और उनके साथी निर्धारित समय सारणी के अनुसार पैदल यात्रा पूरी करते हुए मेरठ पहुंचेंगे। मेरठ के ऐतिहासिक औघड़नाथ मंदिर पहुंचकर वे विधिवत मंत्रोच्चार के बीच 301 लीटर गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे और अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करेंगे। प्रशासन ने भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ऐसी विशेष कांवड़ों के सुगम आवागमन के लिए मार्ग पर विशेष प्रबंध किए हैं।
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