NCP Merger Row: एनसीपी विलय पर संजय राउत का बड़ा खुलासा, बोले- 2 साल से चल रही थी चर्चा
Sanjay Raut on NCP Merger: शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने एनसीपी के संभावित विलय पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह चर्चा पिछले दो वर्षों से चल रही है।

- Sanjay Raut on NCP: शरद पवार की एनसीपी के विलय पर बोले संजय राउत, 'सुप्रिया ताई पर पूरा भरोसा'
- महाराष्ट्र की राजनीति में नया भूचाल! NCP के विलय पर संजय राउत का चौंकाने वाला बयान, सुप्रिया सुले को लेकर कही यह बात
- एनसीपी विलय विवाद: संजय राउत का दावा, दो साल से चल रही है चर्चा, सुप्रिया सुले पर जताया भरोसा
महाराष्ट्र की सियासत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP - शरद चंद्र पवार) के किसी अन्य दल में संभावित विलय या भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है। मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए संजय राउत ने शनिवार को दावा किया कि एनसीपी के भीतर चल रही यह चर्चा कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले 2 साल से इस विषय पर मंथन चल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने एनसीपी की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले के नेतृत्व क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें 'सुप्रिया ताई' पर पूरा भरोसा है। राउत के इस बयान के बाद महा विकास अघाड़ी (MVA) के भीतर और महाराष्ट्र के सियासी हलकों में नई चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिसका असर आगामी विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है।
यह पूरा मामला एनसीपी (शरद पवार गुट) के राजनीतिक भविष्य और महा विकास अघाड़ी गठबंधन के भीतर दलों के आपसी तालमेल से जुड़ा है। दरअसल, महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि शरद पवार अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस या किसी अन्य बड़े सहयोगी दल में कर सकते हैं। इन कयासों के बीच, गठबंधन सहयोगी शिवसेना (यूबीटी) के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने खुलकर इस विषय पर मीडिया के सामने अपनी बात रखी है। राउत ने न केवल इन चर्चाओं के अस्तित्व को स्वीकारा, बल्कि इसे काफी पुराना बताते हुए सुप्रिया सुले के प्रति अपनी पार्टी का विश्वास भी प्रदर्शित किया।
महाराष्ट्र में साल 2023 में एनसीपी के भीतर हुई बड़ी बगावत और अजित पवार के अलग होने के बाद से ही शरद पवार गुट अपने वजूद और सिंबल को लेकर कानूनी व राजनीतिक लड़ाई लड़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में पार्टी के भविष्य को लेकर अंदरूनी रणनीतियों पर काम चल रहा था। संजय राउत ने शनिवार को स्पष्ट किया कि जब महा विकास अघाड़ी का गठन हुआ और उसके बाद जो राजनीतिक घटनाक्रम बदले, तभी से विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा था।
संजय राउत ने अपने बयान में कहा, "एनसीपी के भविष्य और उसके सांगठनिक स्वरूप को लेकर जो चर्चाएं आज मीडिया में आ रही हैं, वे दरअसल पिछले दो सालों से चल रही हैं। शरद पवार साहब एक दूरदर्शी नेता हैं और वे हर परिस्थिति के लिए रणनीति तैयार रखते हैं।" जब उनसे पूछा गया कि क्या शरद पवार के बाद पार्टी की कमान और फैसले लेने की प्रक्रिया में कोई भ्रम है, तो राउत ने तुरंत सुप्रिया सुले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि सुप्रिया सुले एक परिपक्व नेता हैं और संसद से लेकर सड़क तक उन्होंने अपनी क्षमता साबित की है। शिवसेना (यूबीटी) को उनके राजनीतिक फैसलों और नेतृत्व पर पूरा भरोसा है।
संजय राउत के इस बयान के बाद महा विकास अघाड़ी और विपक्षी खेमे से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। एनसीपी (शरद चंद्र पवार) के स्थानीय प्रवक्ताओं ने राउत के बयान पर सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी के आंतरिक मामलों और भविष्य की रणनीति पर अंतिम फैसला केवल आदरणीय शरद पवार साहब ही लेंगे, हालांकि सहयोगियों का भरोसा हमेशा स्वागत योग्य है।
वहीं दूसरी तरफ, सत्ताधारी महायुति गठबंधन (बीजेपी, शिवसेना-शिंदे गुट और एनसीपी-अजित पवार गुट) ने इस बयान को लेकर तीखा तंज कसा है। सत्तापक्ष के नेताओं का कहना है कि संजय राउत के बयान से यह साफ हो गया है कि शरद पवार की पार्टी का अस्तित्व खतरे में है और वे खुद को बचाने के लिए पिछले दो साल से छटपटा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी की ओर से अभी इस विषय पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
संजय राउत के इस खुलासे का महाराष्ट्र की क्षेत्रीय राजनीति पर व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। सबसे पहली बात तो यह है कि इससे यह संकेत मिलता है कि महा विकास अघाड़ी के घटक दलों के बीच केवल सीटों के बंटवारे को लेकर ही नहीं, बल्कि भविष्य के सांगठनिक स्वरूप को लेकर भी शीर्ष स्तर पर बातचीत होती रही है। दूसरा, सुप्रिया सुले को लेकर राउत का यह सार्वजनिक समर्थन आगामी चुनावों में एमवीए के भीतर उनके कद को और मजबूत करेगा। हालांकि, इस बयान से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में थोड़ी दुविधा भी पैदा हो सकती है कि क्या सच में पार्टी का अस्तित्व किसी दूसरे दल में समाहित होने जा रहा है।
इस बयान के बाद अब सबकी निगाहें खुद शरद पवार और सुप्रिया सुले के अगले कदम पर टिकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले शरद पवार अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोलेंगे। संजय राउत के इस बयान के बाद एमवीए के शीर्ष नेताओं की एक समन्वय बैठक जल्द ही बुलाई जा सकती है, जिसमें इन बयानों से पैदा हुए भ्रम को दूर करने और आगामी चुनाव प्रचार की संयुक्त रणनीति पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की जाएगी। महाराष्ट्र की राजनीति में अगले कुछ दिन बयानों और स्पष्टीकरणों के लिहाज से बेहद सरगर्म रहने वाले हैं।
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